Tuesday, July 23, 2024
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‘सड़क पर नमाज हिंदू-मुस्लिम की सहमति से…’ – गुरुग्राम पुलिस ने डिलीट किया ट्वीट, BJP नेता ने CM खट्टर के आदेश को करवाया याद

2018 के आदेश में मद्रास हाई कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर नमाज जैसी गतिविधियों को गैरकानूनी बताया था। गुरुग्राम पुलिस शायद अनजान थी। सड़क पर नमाज के मामले को उसने हिंदू-मुस्लिम सहमति वाला मामला बता ट्वीट कर दिया। अब बवाल इतना कि...

गुरुग्राम में नमाज को लेकर विवाद हुआ। पब्लिक प्लेस पर नमाज क्यों हो – विवाद का कारण यही था। इस तरह के मामले में पुलिस विवाद की जाँच करती है और सुलझाती है। यहाँ उल्टा हो गया। खुद गुरुग्राम पुलिस फँस गई। फँसी एक ट्वीट के चक्कर में। पहले ट्वीट देख लेते हैं।

गुरुग्राम पुलिस का ट्वीट, यह स्क्रीनशॉट है क्योंकि ट्वीट डिलीट कर दिया गया है

मतलब पुलिस खुद बता रही है कि पब्लिक प्लेस पर नमाज हो रही है, दोनों पक्ष (हिंदू-मुस्लिम) सहमत हैं। खैर, पब्लिक प्लेस के मामले में पक्षों की सहमति वाला तर्क कानूनन होता तो गुरुग्राम पुलिस को अपना ट्वीट डिलीट नहीं करना पड़ता।

अवैध अतिक्रमण को नमाज़ के रूप में अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सही बताने वाली गुरुग्राम पुलिस का अजीब उत्तर किसी के गले नहीं उतरा। राष्ट्रव्यापी बेइज्जती के बाद गुरुग्राम पुलिस को अपना वह ट्वीट डिलीट करना पड़ा।

वहीं इस मामले पर हरियाणा भाजपा के प्रवक्ता रमन मालिक ने गुरुग्राम पोलिस को खट्टर सरकार के स्टैंड से अवगत कराते हुए पुराना सरकारी आदेश जारी किया। उन्होंने ट्वीट किया, “@DC_गुरुग्राम आपको गुरुग्राम पुलिस से जवाब माँगना चाहिए #Sector47 में नमाज़ के मामले में उनकी प्रतिक्रिया पर। मैंने आपको इस मामले में अपनी शिकायत और प्रश्न मेल कर दिए हैं। मई 2018 में ही CM खट्टर ने कहा था, धार्मिक स्थलों पर ही धार्मिक क्रियाकलाप होने चाहिए।”

ज्ञात हो कि पिछले कुछ समय से सार्वजनिक स्थल पर नमाज़ियों के अवैध कब्ज़े का गुरुग्राम की जनता ने मुखर विरोध किया है। बार-बार समझाए जाने के बाद भी कब्जाधारियों के न सुधरने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस से शिकायत करते हुए सवाल किया कि हिंदू त्यौहारों पर प्रशासन द्वारा थोपे जाने वाले प्रतिबंध और सख्ती इनके (नमाजियों) मामले आने पर कहाँ चली जाती है?

पुलिस और पब्लिक की इस बहस का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इस पूरे प्रकरण में पुलिस को स्पष्टीकरण देना पड़ा। स्पष्टीकरण में गुरुग्राम पुलिस ने लिखा:

“सार्वजनिक स्थानों पर ‘नमाज’ के स्थान हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा आपसी समझ के बाद तय किए गए हैं और यह जगह उनमें से एक है। सांप्रदायिक सद्भाव और शांति बनाए रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और हम इसे सुनिश्चित करेंगे।”

गुरुग्राम पुलिस के इस ट्वीट पर विरोध की झड़ी लग गई। आखिरकार गुरुग्राम पुलिस ने वो ट्वीट डिलीट कर दिया पर उसका स्क्रीनशॉट अभी तक वाद-विवाद का केंद्र बना हुआ है। ट्वीट को डिलीट करना हालाँकि गुरुग्राम पुलिस को राहत न दे पाई।

एडवोकेट अभिषेक शर्मा द्वारा दायर RTI

सड़क पर अतिक्रमण कर के मज़हबी गतिविधि चलाने को आपसी समझौता बताने वाले जवाब पर हिंदू आईटी सेल के एडवोकेट अभिषेक शर्मा ने RTI दायर कर दी। उन्होंने गुरुग्राम पुलिस से RTI के माध्यम से प्रश्न किया है कि पुलिस पूर्व में अतिक्रमण कर के नमाज़ पढ़ने वालों पर लिए गए एक्शन का ब्यौरा दे और यदि सार्वजनिक स्थलों पर नमाज़ आपसी सहमति से हो रही तो ये समझौता कब हुआ?

एडवोकेट अभिषेक शर्मा द्वारा दायर RTI

इस संबंध में ऑपइंडिया से बात करते हुए हिंदू आईटी सेल के संस्थापक सदस्यों में से एक अक्षित सिंह ने बताया कि 2018 के अपने आदेश में मद्रास हाई कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर नमाज जैसी गतिविधियों को गैरकानूनी बताया था।

फिलहाल ये कहना गलत नहीं होगा कि गुरुग्राम पुलिस के लिए उनका किया गया एक ट्वीट गले की फाँस बन चुका है। इस पूरे मामले का सबसे रोचक पहलू ये है कि सोशल मीडिया की सनसनी बन चुका ये मामला अराजनैतिक रूप में आम जनमानस व पुलिस के मध्य चल रहा है।

यहाँ यह भी जानना उचित होगा कि अवैध अतिक्रमण से होने वाली नमाज़ के चलते ही इससे पूर्व भी गुरुग्राम में अप्रैल 2018, मई 2018, अगस्त 2018, नवम्बर 2018, दिसंबर 2019 और मार्च 2021 में तनाव फैल चुका है। अब तो लोग प्रशासन से इतने नाराज हो चुके हैं कि नमाज की प्रतिक्रिया में ‘सड़कों पर हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दें क्या?’ जैसे सवाल पूछ रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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