Thursday, December 1, 2022
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दंगों की फंडिंग और प्लानिंग पर कसा शिकंजा, मंदर-नक़वी गिरोह ने शाहीन बाग प्रदर्शन खत्म करने को कहा

एक अन्य सेकुलर-लिबरल-बुद्धिजीवी सबा नकवी ने भी ट्वीट किया है कि कोरोनोवायरस के डर के कारण सभी विरोध प्रदर्शन वापस लेना चाहिए।

कोर्ट और सरकार के खिलाफ विरोध करने के लिए समुदाय विशेष को सड़कों पर उतरने के लिए  खुलेआम उकसाने का वीडियो वायरल होने के बाद अब हर्ष मंदर ने शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों से प्रदर्शन खत्म करने के लिए कहा है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर्ष मंदर ने कहा कि शाहीन बाग में पिछले कुछ महीनों से हो रहे विरोध प्रदर्शन को अब वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि इसका इस्तेमाल आरएसएस और उसके सहयोगियों द्वारा समुदाय विशेष के खिलाफ हेट कैंपेन को बढ़ावा देने के लिए ट्रिगर के रूप में किया गया। हर्ष मंदर ने दावा किया कि पिछले दिनों उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे भी समुदाय विशेष के खिलाफ हेट कैंपेन का ही सीधा परिणाम था।

मंदर और उसके गिरोह के अनुसार, शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन आरएसएस और उनके सहयोगियों के लिए एक हथियार बन गया है। वो इसका इस्तेमाल समुदाय विशेष के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए कर रहे हैं। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 फरवरी को सामने आए एक वीडियो में मंदर ने शाहीन बाग विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को वापस लेने के लिए कहा है। इसमें दावा किया गया कि हिंदू समूहों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए उनका शोषण किया गया।

एक अन्य सेकुलर-लिबरल-बुद्धिजीवी सबा नकवी ने भी ट्वीट किया है कि कोरोनोवायरस के डर के कारण सभी विरोध प्रदर्शन वापस लेना चाहिए।

बता दें कि इससे पहले हर्ष मंदर का एक वीडियो सामने आया था। जिसमें प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहते हैं, “ये लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में नहीं जीती जाएगी, क्योंकि हमने सुप्रीम कोर्ट को देखा है- एनआरसी के मामले में, कश्मीर के मामले में, अयोध्या के मामले में। उन्होंने (सुप्रीम कोर्ट) इंसानियत, समानता और सेक्युलरिज्म की रक्षा नहीं की है।” वे आगे कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में हम कोशिश जरूर करेंगे। लेकिन इसका फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि ये फैसला सड़कों पर होगा।

उन्होंने कहा था, “न्यायपालिका में सुप्रीम कोर्ट की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। लेकिन जिस तरह उसने कश्मीर मामले में जवाब दिया। अलीगढ़ और जामिया में पीटे जा रहे छात्रों की याचिकाओं पर प्रतिक्रिया दिखाई। अयोध्या मामले में फैसला दिया। जाहिर है कि हाल के वर्षों न्यायपालिका अल्पसंख्यकों के हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रही है।”

गौरतलब है कि गुरुवार (मार्च 12, 2020) को दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने कट्टरपंथी संगठन पीएफआई के सरगना परवेज़ और सेक्रेटरी इलियास को धर-दबोचा। दोनों पर शाहीन बाग प्रदर्शन की फंडिंग और दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को भड़काने का आरोप है। हाल ही में गिरफ्तार किए गए आईएसआईएस से जुड़े दंपति के लगातार संपर्क में भी दोनों थे। अब जाँच की आँच आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस तक पहुँच रही है। आप के सांसद संजय सिंह और ख़ुद को सबसे बड़ा दलित नेता बताने वाले कॉन्ग्रेस के उदित राज से भी परवेज़ लगातार संपर्क में था। पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि संजय सिंह के तार दंगाइयों से जुड़े हैं।

इसके अलावा पीएफआई और दंगाइयों की फंडिंग की भी जाँच की जा रही है। पीएफआई ने 73 बैंक एकाउंट्स खोल रखे थे, जिनमें 120.5 करोड़ रुपए जमा किए गए। रेहाब इंडिया फाउंडेशन से भी इसके लिंक जुड़े हुए हैं। 17 विभिन्न बैंकों में एकाउंट्स खोले गए थे। पीएफआई के बारे में ये बात भी पता चली है कि पिछले कुछ महीनों में उसे अधिकतर डोनेशन कैश के रूप में मिले हैं। इनमें से दो तिहाई धन बैंक में जमा किया गया था। चौंकाने वाली बात ये है कि एक तिहाई धन पीएफआई के शाहीन बाग स्थित मुख्यालय में रखा गया था।

इसके साथ ही दिल्ली हिंसा को लेकर गिरफ्तार PFI के सदस्य दानिश ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में खुलासा करते हुए बताया था कि PFI ने शाहीन बाग और दिल्ली हिंसा के लिए धन जुटाया था और साथ ही PFI ने दंगाइयों को हथियार भी सौंपे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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