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पाकिस्तान की मारिया को बचाने के लिए बमबारी से भी नहीं डरे हरियाणा के अंकित, यूक्रेन से कुत्ते को लेकर ही लौटे ऋषभ

पाकिस्तानी दूतावास ने कहा कि यह समय दोनों देशों के लोगों के लिए एक-दूसरे की टांग खींचने का नहीं, बल्कि प्यार और समर्थन दिखाने का है। आपसी नफरत से अधिक महत्वपूर्ण बच्चे हैं। दूतावास ने अंकित को 'शुक्रिया बेटा' कहा।

यूक्रेन औऱ रूस के बीच जारी युद्ध (Russia-Ukraine) का आज शुक्रवार (4 मार्च 2022) को नौवाँ दिन है। वहाँ फँसे भारतीय लोगों को रेस्क्यू करने के लिए सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ चला रही है। इस बीच हिंदुस्तानियों की दरियादिली सामने आई है। किसी ने कुत्ते के बिना यूक्रेन से आने से मना कर दिया तो किसी ने अनजान पाकिस्तानी लड़की की मदद की।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग में हरियाणा के रहने वाले अंकित ने बमबारी के बीच पाकिस्तानी लड़की की जान बचाकर उसे रोमानिया (Romania) के बॉर्डर तक पैदल पहुँचाया। अंकित वहाँ पर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट में यूक्रेनी भाषा के छात्र हैं। दरअसल, यूक्रेन में रूस की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। इसके कारण वहाँ फँसे करीब 80 छात्रों को बंकरों में छिपने के लिए कहा गया। इन लोगों में अंकित अकेला भारतीय थे और उनके साथ थी पाकिस्तान की मारिया।

भीषण बमबारी के बीच अचानक अंकित को लगा कि उन्हें किसी तरह से रोमानिया के बॉर्डर तक पहुँचना चाहिए, ताकि वहाँ से भारत सरकार उन्हें रेस्क्यू कर सके। यही सोचकर जब अंकित वहाँ से जाने लगे तो पाकिस्तानी स्टूडेंट मारिया ने अंकित से मदद माँगी और उनसे कहा कि वह भी निकलना चाहती है। बस फिर क्या था, दोनों वहाँ से बचते-बचाते रोमानिया बॉर्डर के लिए निकल पड़े।

दो दिनों से भूखे दोनों फायरिंग से बचते-बचाते 5 किलोमीटर तक चलकर रेलवे स्टेशन पहुँचे। ट्रेन से दोनों टर्नोपिल पहुँचे। टर्नोपिल से पाकिस्तानी दूतावास ने उन दोनों को रोमानिया बॉ़र्डर के लिए बस से रवाना किया, लेकिन बस ने उन दोनों को 15-20 किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया। इसके बाद दोनों इतनी दूर पैदल चलकर बॉर्डर तक पहुँचे।

अंकित के इस जज्बे को पाकिस्तान के दूतावास ने भी सलाम किया और कहा कि यह समय दोनों देशों के लोगों के लिए एक-दूसरे की टांग खींचने का नहीं, बल्कि प्यार और समर्थन दिखाने का है। आपसी नफरत से अधिक महत्वपूर्ण बच्चे हैं। दूतावास ने अंकित को ‘शुक्रिया बेटा’ कहा।

कुत्ते के लिए यूक्रेन से आने से इनकार किया

इसी तरह से उत्तराखंड के देहरादून के रहने वाले ऋषभ कौशिक (21) ऑपरेशन गंगा के तहत हंगरी के बुडापेस्ट से भारत लाए गए। वह अपने साथ अपने पालतू कुत्ते को भी लाए। ऋषभ खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ रेडियो इलेक्ट्रॉनिक्स से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कर रहे हैं। इससे पहले उन्होंने युद्धग्रस्त यूक्रेन से आने से इसलिए इनकार कर दिया था कि अगर वे अगर अपने कुत्ते को छोड़कर चले गए तो उसका ख्याल कौन रखेगा। उन्होंने कहा था, “अगर मेरा डॉग नहीं जा सकता है तो मैं भी नहीं जाऊँगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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