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लग्जरी कारों से लेकर विदेशी वाइन और दवाओं तक, ‘मदर ऑफ ऑल डील’ से सब होगा सस्ता: जानिए भारत-EU के महा-समझौते की पूरी ABCD

इस डील से 'मेक इन इंडिया' को पूरी दुनिया में नई पहचान मिलेगी। जब भारत में बना सामान यूरोप में बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के बिकेगा, तो हमारे कारखानों में उत्पादन बढ़ेगा और लोगों को काम मिलेगा। इससे भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना जल्द पूरा हो सकेगा।

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने मंगलवार (27 जनवरी 2026) को वैश्विक व्यापार के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। करीब 18 सालों की लंबी बातचीत के बाद नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुक्त व्यापार समझौते यानि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर इआधिकारिक हस्ताक्षर हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत के व्यापारिक इतिहास का सबसे बड़ा और अहम समझौता करार दिया। इस डील से न केवल 27 यूरोपीय देशों के बाजार भारतीयों के लिए खुलेंगे, बल्कि आम जनता के लिए लग्जरी कारों से लेकर विदेशी वाइन और कैंसर की दवाओं तक, बहुत कुछ सस्ता होने वाला है।

क्या है यह ‘मदर ऑफ ऑल डील’ और क्यों है इतनी खास?

यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (यानी सभी समझौतों की जननी) कहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशों को व्यापार के जरिए एक-दूसरे से जोड़ता है। अगर दुनिया की कुल कमाई (GDP) को देखें, तो उसका चौथा हिस्सा (25%) अकेले भारत और यूरोप के पास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा है कि यह डील ऐसी बनाई गई है जिससे भारत और यूरोप, दोनों की तरक्की हो।

यह समझौता भारत के लिए एक बड़ी जीत है क्योंकि अब व्यापार के लिए हमें सिर्फ चीन या अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पीएम मोदी के अनुसार, यह डील आपसी भरोसे और बराबरी के रिश्ते पर टिकी है। इस महा-समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि साल 2032 तक यूरोप को भेजा जाने वाला भारत का सामान दोगुना हो जाएगा, जिससे देश में लाखों युवाओं के लिए नौकरी के नए मौके खुलेंगे।

आम जनता के लिए खुशखबरी: क्या-क्या होने वाला है सस्ता?

इस ऐतिहासिक समझौते का सबसे बड़ा फायदा आपकी जेब को होने वाला है। अब यूरोप से आने वाली 90% से ज्यादा चीजों पर या तो टैक्स बिल्कुल खत्म हो जाएगा या बहुत कम लगेगा। उदाहरण के लिए, मर्सिडीज, ऑडी और BMW जैसी शानदार कारें, जो पहले भारी टैक्स (110%) की वजह से बहुत महंँगी थीं, अब धीरे-धीरे सस्ती होंगी क्योंकि उन पर टैक्स घटकर सिर्फ 10% रह जाएगा।

खाने-पीने के शौकीनों के लिए तो यह किसी लॉटरी जैसा है। विदेशी वाइन पर लगने वाला भारी टैक्स 150% से घटकर सिर्फ 20% रह जाएगा और बीयर के दाम भी करीब आधे हो जाएँगे। साथ ही, इटली का पास्ता, चॉकलेट, जैतून का तेल (Olive Oil) और विदेशी फलों के जूस अब आपके घर के बजट में फिट हो सकेंगे क्योंकि इन पर लगने वाला फालतू टैक्स हटा दिया गया है। सबसे बड़ी राहत सेहत को लेकर है। कैंसर की दवाइयाँ और इलाज में काम आने वाली आधुनिक मशीनें 11% तक सस्ती होंगी, जिससे आम आदमी के लिए इलाज का खर्च कम होगा।

राज्यों को मिलेगा बड़ा बूस्ट: पीयूष गोयल का ‘मास्टर मैप’

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक नक्शे (मैप) के जरिए बताया है कि यह डील भारत के हर राज्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस समझौते की वजह से भारत के राज्यों से बाहर जाने वाले सामान (निर्यात) में करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए की भारी बढ़ोतरी हो सकती है। आसान शब्दों में कहें तो, अब हमारे राज्यों में बना सामान यूरोप के बाजारों में जमकर बिकेगा।

जैसे, पंजाब और हरियाणा से मशीनों और फर्नीचर का व्यापार बढ़ेगा, तो गुजरात से हीरे-जवाहरात और रसायनों (केमिकल्स) की माँग बढ़ेगी। महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्य दवाइयों और बिजली के सामान (इलेक्ट्रॉनिक्स) के बड़े केंद्र बन जाएँगे। वहीं, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे समुद्री किनारों वाले राज्यों से मछली, झींगा और मसालों को यूरोप भेजना बहुत आसान हो जाएगा। उत्तर प्रदेश और राजस्थान की मशहूर कलाकृतियों (हैंडीक्राफ्ट्स) और चमड़े के सामान को भी यूरोप के 27 देशों में बिना किसी रोक-टोक के बेचा जा सकेगा। यह हमारे छोटे और मंझोले व्यापारियों (MSME) के लिए तरक्की का सबसे बड़ा मौका है।

सुरक्षा और रक्षा में नई शुरुआत: अब मिलकर लड़ेंगे भारत और यूरोप

सिर्फ व्यापार ही नहीं, भारत और यूरोप ने एक ऐतिहासिक ‘सुरक्षा और रक्षा समझौता’ भी किया है। यूरोपीय नेता उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि आज की अशांत दुनिया में भारत और यूरोप जैसे दो बड़े लोकतांत्रिक देशों का साथ आना पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। जापान और दक्षिण कोरिया के बाद भारत एशिया का तीसरा ऐसा देश बन गया है, जिसके साथ यूरोप ने इतना खास और गहरा रक्षा समझौता किया है।

इस समझौते का सीधा मतलब यह है कि अब भारत और यूरोप मिलकर आतंकवाद, इंटरनेट के जरिए होने वाले खतरों (साइबर अटैक) और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर एक साथ काम करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह डील दिखाती है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसा कितना बढ़ गया है। दुनिया में आज जो उथल-पुथल मची है, उसे देखते हुए भारत और यूरोप का यह कदम शांति और संतुलन बनाए रखने में बहुत मददगार साबित होगा।

भारतीय निर्यातकों की ‘चांदी’: कपड़ों से लेकर जेम्स-ज्वेलरी तक

यह डील सिर्फ विदेश से सामान खरीदने के बारे में नहीं है, बल्कि हमारे देश के व्यापारियों के लिए तरक्की का नया रास्ता है। इसका सबसे बड़ा फायदा हमारे कपड़ा उद्योग को होगा। अब तक भारतीय कपड़ों पर यूरोप में 10% टैक्स लगता था, जो अब बिल्कुल खत्म (जीरो) हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े सस्ते होंगे और भारत इस मामले में वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों को पछाड़कर दुनिया में सबसे आगे निकल सकता है।

साथ ही, आईटी (IT) सेक्टर में काम करने वाले भारतीयों के लिए भी अच्छी खबर है। अब उनके लिए यूरोप में अपनी सेवाएँ देना और वहाँ जाकर काम करना बहुत आसान हो जाएगा। यही नहीं, हीरे-जवाहरात, खिलौने और चमड़े का सामान बेचने वाले व्यापारियों को भी अब बिना किसी भारी टैक्स के यूरोप के बड़े शहरों में अपना सामान बेचने का मौका मिलेगा। जानकारों का कहना है कि इस पूरे बदलाव से भारत के लाखों युवाओं को नौकरी के नए और बेहतर अवसर मिलेंगे।

एंटोनियो कोस्टा का ‘गोवा कनेक्शन’ और भावुक संदेश

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इस बड़ी मीटिंग में एक बहुत ही दिल छू लेने वाली बात कही। उन्होंने बड़े गर्व के साथ सबको बताया कि वे सिर्फ यूरोप के एक बड़े नेता ही नहीं हैं, बल्कि उनका भारत से गहरा रिश्ता है क्योंकि वे भारतीय मूल के नागरिक (OCI) भी हैं। उन्होंने कहा, “मेरा परिवार गोवा से ताल्लुक रखता है, जहाँ से मेरे पिता का परिवार विदेश गया था। इसीलिए, मेरे लिए यह समझौता सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि दिल का जुड़ाव है।”

कोस्टा ने महात्मा गाँधी की बात दोहराते हुए कहा कि दुनिया में शांति लड़ाई-झगड़े से नहीं, बल्कि सबको न्याय मिलने से आती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत और यूरोप के बीच हुआ यह समझौता करीब 200 करोड़ लोगों (2 अरब) के लिए तरक्की और भरोसे का एक नया दौर शुरू करेगा।

ग्रीन एनर्जी और जलवायु परिवर्तन पर बड़ा कदम

इस समझौते में धरती और पर्यावरण को बचाने का भी पूरा ध्यान रखा गया है। यूरोपीय संघ अगले दो सालों में भारत को प्रदूषण (ग्रीनहाउस गैसों) को कम करने के लिए करीब 500 मिलियन यूरो की बड़ी आर्थिक मदद देगा। साथ ही, दोनों ने मिलकर ‘ग्रीन हाइड्रोजन’ यानी साफ-सुथरी ऊर्जा पर काम करने के लिए एक खास टीम (टास्क फोर्स) बनाने का फैसला किया है।

इसके अलावा, भारत और यूरोप ने मिलकर ‘इंडिया-मिडल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) को और मजबूत बनाने पर बात की। यह एक ऐसा रास्ता है जो भारत को खाड़ी देशों के जरिए यूरोप से सीधे जोड़ेगा। इससे न सिर्फ व्यापार बहुत तेज होगा, बल्कि यह पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना विकास करने में भी मदद करेगा।

समझौता क्या यह वाकई गेम-चेंजर है?

18 साल के लंबे इंतजार के बाद हुआ यह समझौता भारत के लिए पासा पलटने वाला साबित होगा। यह डील ऐसे समय पर हुई है जब दुनिया भर के बाजारों में काफी उथल-पुथल मची है। भारत ने बहुत समझदारी दिखाते हुए अपने किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों को सुरक्षित रखा है। इसीलिए खेती-किसानी के सामान (डेयरी प्रोडक्ट्स) और छोटी कारों को इस समझौते से बाहर रखा गया है (25 लाख से कम की कारों पर टैक्स में कोई छूट नहीं दी गई है)।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस डील से ‘मेक इन इंडिया’ को पूरी दुनिया में नई पहचान मिलेगी। जब भारत में बना सामान यूरोप में बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के बिकेगा, तो हमारे कारखानों में उत्पादन बढ़ेगा और लोगों को काम मिलेगा। इससे भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना जल्द पूरा हो सकेगा। यह समझौता साफ़ तौर पर दिखाता है कि आज की दुनिया में भारत की आर्थिक ताकत कितनी तेज़ी से बढ़ रही है।

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