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लुधियाना बम ब्लास्ट: ऐक्टिवेट करने के दौरान RDX बम हुआ ब्लास्ट: प्लांट करने गए पूर्व पुलिसकर्मी की ही मौत, हेरोइन तस्करी में हुआ था बर्खास्त

मृतक गगनदीप सिंह पंजाब पुलिस में मुंशी था, लेकिन अगस्त 2019 में हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। वह 2 साल जेल में रहने के बाद सितंबर 2021 में जमानत पर बाहर आया था।

पंजाब के लुधियाना कोर्ट परिसर में गुरुवार को हुए ब्लास्ट को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। पंजाब पुलिस ने फॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि कोर्ट परिसर में हुए धमाके में RDX का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस ने बताया कि धमाके के लिए 2 किलोग्राम RDX का इस्तेमाल किया गया था। धमाके के कारण पानी की पाइप लाइन फट गई थी। वहीं, ब्लास्ट में मारे गए व्यक्ति की पहचान पूर्व पुलिसकर्मी गगनदीप सिंह (30) के रूप में हुई है और उसके खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से लिंक सामने आए हैं।

बताया जा रहा है कि बब्बर खालसा से जुड़े हरविंदर सिंह रिंदा के निर्देश पर वह कोर्ट परिसर में बम लेकर पहुँचा था। बाथरूम में बम लेकर पहुँचने के बाद उसे मोबाइल के जरिए सक्रिय करने का निर्देश ले रहा था। इसी दौरान बम ब्लास्ट हो गया और गगनदीप खुद मारा गया।

केंद्रीय जाँच एजेंसी NIA ने जब घटनास्थल की जाँच के दौरान मोबाइल फोन और डोंगल मिले थे। इसके अलावा, उसकी जेब में 500 रुपये भी मिले थे। जाँच अधिकारियों ने इन्हीं नंबरों के आधार पर जाँच शुरू की। इस दौरान अधिकारियों को पता चला कि यह डोंगल खन्ना निवासी गगनदीप सिंह का है। मृतक के परिजनों ने भी गगनदीप के शव की पहचान कर ली है।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक गगनदीप सिंह पंजाब पुलिस में मुंशी था, लेकिन अगस्त 2019 में हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद उसे बर्खास्त कर दिया गया। वह 2 साल जेल में रहने के बाद सितंबर 2021 में जमानत पर बाहर आया था।

गगनदीप सिंह पुत्र अमरजीत सिंह खन्ना के जीटीबी नगर का रहने वाला था और एक महिला के साथ मिलकर तस्करी करता था। पंजाब पुलिस की STF ने गगनदीप को 785 ग्राम हेरोइन के साथ अगस्त 2019 में पकड़ा गया था। उस दौरान गगनदीप सिंह के साथ कुछ और लोग भी जुड़े हुए थे, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है। पुलिस को आशंका है कि ये लोग भी इस ब्लास्ट में शामिल हो सकते हैं।

गगनदीप छोटे कद का पहलवान टाइप का शख्स था। उसने अपने हाथ पर खंडे (सिख धर्म का प्रतीक चिह्न) का टैटू बनवा रखा था। उसके खिलाफ 11 अगस्त 2019 को U/S 21, 29-61-85 NDPS एक्ट के तहत पुलिस स्टेशन STF मोहाली फेज 4 में FIR नंबर 75 दर्ज हुई थी।

इस ब्लास्ट के पीछे बब्बर खालसा का हाथ बताया जा रहा है। बब्बर खालसा की स्थापना 1978 में की गई थी और 90 के दशक में भागकर पाकिस्तान में छिप कर बैठा वधावा सिंह बब्बर इसे संचालित करता है। बब्बर खालसा का मुख्य उद्देश्य सिखों के लिए खालिस्तान बनवाने का है। ये संगठन कनाडा, जर्मनी, ब्रिटेन और भारत के कुछ भागों में सक्रिय है। वहीं हरविंदर की बात करें तो ये कुछ समय पहले भारत से भागकर पाकिस्तान चला गया था। वहाँ इसने ऐसे गैंगस्टरों को एकजुट किया जो पंजाब में धमाका करवा सकें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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