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मणिपुर में भगवान जगन्नाथ की यात्रा के लिए तैयार किया जा रहा था रथ, अज्ञात बंदूकधारियों ने की फायरिंग: जाँच में जुटी पुलिस

यह रथ यात्रा मैतेई समुदाय के लोग निकलते हैं। मणिपुर सरकार की वेबसाइट बताती है कि इम्फाल में निकलने वाली यह रथ यात्रा राज्य के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। रथ यात्रा ओडिशा के पुरी में निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा की तरह ही होती है।

मणिपुर की राजधानी इम्फाल में शुक्रवार रात (4 जुलाई, 2024) को रथ यात्रा के लिए बनाए जा रहे रथ पर हमला किया गया। अज्ञात बदमाशों ने रात करीब 12.30 बजे निर्माणाधीन रथ पर फायरिंग की और फिर मौके से फरार हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना इम्फाल के सना कोनुंग के पास हुई, जहाँ रथ खड़ा किया गया था। हमलावर एडवांस हॉस्पिटल की दिशा से एक कार में सवार होकर आए थे। इसके बाद उन्होंने रथ पर दो राउंड फायरिंग की। फायरिंग करने के बाद हमलावर तेजी से पैलेस गेट की ओर वापस भाग गए। फायरिंग में कोई हताहत नहीं हुआ है।

इंफाल ईस्ट पुलिस को इस घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद वह मामले की जाँच करने के लिए घटनास्थल पर पहुँची। यह रथ यात्रा 8 जुलाई, 2024 को होनी है। इसके लिए ही इस विशेष रथ को तैयार किया जा रहा था। इस रथ पर हमला क्यों हुआ, इसका कारण साफ़ नहीं है।

यह रथ यात्रा मैतेई समुदाय के लोग निकलते हैं। मणिपुर सरकार की वेबसाइट बताती है कि इम्फाल में निकलने वाली यह रथ यात्रा राज्य के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह उत्सव 10 दिनों तक चलता है। यह रथ यात्रा ओडिशा के पुरी में निकलने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा की तरह ही होती है।

इस रथ यात्रा में भी भगवान जगन्नाथ, बलदाऊ और सुभद्रा को रथ पर बिठाया जाता है। यह रथ लगभग 20 फीट ऊँचा होता है और इसे श्रृद्धालु अपने हाथों से खींचते हैं। इस रथ को काफी सजाया भी जाता है। यात्रा को इस उत्सव के पहले और अंतिम दिन ही निकाला जाता है।

इस रथ पर हमला बीते लगभग डेढ़ वर्षों से मणिपुर में चल रही अशांति के बीच हुआ है। राज्य के दो समुदायों कुकी और मैतेई के बीच चल रहे इस संघर्ष में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए हैं। सरकार लगातार यहाँ स्थितियाँ सामान्य करने में जुटी हुई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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