Monday, November 29, 2021
Homeदेश-समाजठाणे: 2 वर्षों से यौन शोषण कर रहा था संपादक, ट्रेनी महिला ने मार...

ठाणे: 2 वर्षों से यौन शोषण कर रहा था संपादक, ट्रेनी महिला ने मार डाला

45 वर्षीय नित्यानंद पांडे के बारे में बताया जाता है कि वह मुंबई व ठाणे के सबसे भव्य जीवन जीने वाले पत्रकारों में से एक थे। शानदार महँगी गाड़ियों के शौक़ीन पांडे के मैगज़ीन को कई सरकारी विज्ञापन भी मिला करते थे।

मुंबई में एक समाचार पत्रिका के संपादक की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इंडिया अनबाउंड नामक इस पत्रिका के संपादक नित्यानंद पांडे विगत शुक्रवार (मार्च 15 , 2019) को ही गायब हो गए थे। उनके लापता होने की ख़बर मीडिया में आई थी और पुलिस ने भी मामला दर्ज किया था। अब यह मामला यौन शोषण से जुड़ा नज़र आ रहा है। पुलिस ने इस सम्बन्ध में एक ट्रेनी पत्रकार और एक प्रिंटर को गिरफ़्तार किया है।

मृत संपादक नित्यानंद पांडे का शव रविवार को विघटित अवस्था में बरामद किया गया गया। पुलिस ने गहन छानबीन के बाद 24 वर्षीय ट्रेनी पत्रकार अंकिता मिश्रा को गिरफ़्तार किया, जिसने शुरुआत में कुछ भी बताने से साफ़ इनकार कर दिया। पुलिस द्वारा सख्ती बरतने के बाद पूरा मामला सामने आया। अंकिता ने संपादक की हत्या से सम्बंधित सभी राज पुलिस के सामने खोल दिए। उसने पुलिस को बताया कि मृत संपादक उसे लगातार परेशान करते थे और 2 सालों से उसका यौन उत्पीड़न भी कर रहे थे।

अंकिता ने पुलिस को बताया कि उसने संपादक पांडे से बार-बार ऐसा करने को मना किया लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद अंकिता ने मैगज़ीन के प्रिंटर सतीश मिश्रा के साथ मिलकर एक योजना तैयार की। पांडे से छुटकारा पाने की जुगत में अंकिता ने उन्हें एक सुनसान जगह पर बुलाया। ऐसा करने के लिए अंकिता ने झूठ बोला कि वह उन्हें कोई प्रॉपर्टी दिखाना चाहती है। वहाँ अंकिता ने पांडे को एक मसालेदार ड्रिंक्स पिला दिया।

ड्रिंक्स पीने के बाद पांडे जैसे ही बेहोश हुए, अंकिता और सतीश ने गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। दोनों ने सम्पादक की लाश को भिवंडी के एक सुनसान इलाक़े में फेंक दिया। इसके बाद दोनों ही फरार हो गए। शव की बरामदगी के बाद पुलिस के जनसम्पर्क अधिकारी ने बताया था- “रविवार को भिवंडी तालुका के खारबाओ गाँव में नित्यानंद पांडेय का शव मिला। उनके सिर पर चोट के निशान हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

45 वर्षीय नित्यानंद पांडे के बारे में बताया जाता है कि वह मुंबई व ठाणे के सबसे भव्य जीवन जीने वाले पत्रकारों में से एक थे। शानदार महँगी गाड़ियों के शौक़ीन पांडे के मैगज़ीन को कई सरकारी विज्ञापन भी मिला करते थे। वेबसाइट के दावे के अनुसार, उनकी पत्रिका एक लाख से अधिक ग्राहकों को ख़बरें सीधे मेल किया करती थी।

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राजस्थान के मंत्री का स्वागत कर रहे थे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता, तभी इमरान ने जड़ दिया एक मुक्का: बाद में कहा – ये मेरे आशीर्वाद...

राजस्थान में एक अजोबोग़रीब वाकया हुआ, जब मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता भँवर सिंह भाटी को एक युवक ने मुक्का जड़ दिया।

‘मीलॉर्ड्स, आलोचक ट्रोल्स नहीं होते’: भारत के मुख्य न्यायाधीश के नाम एक बिना नाम और बिना चेहरा वाले ट्रोल का पत्र

हमें ट्रोल्स ही क्यों कहा जाता है, आलोचक क्यों नहीं? ऐसा इसलिए, क्योंकि हम उन लोगों की आलोचना करते हैं जो अपनी आलोचना पसंद नहीं करते।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
140,346FollowersFollow
412,000SubscribersSubscribe