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PM मोदी ने ‘सेंगोल’ को किया ‘साष्टांग दंडवत प्रणाम’, नए संसद भवन में हाथ जोड़कर पहुँचे: उद्घाटन के बाद सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन, मजदूरों को भी सम्मान

नए संसद भवन के निर्माण के लिए देश भर से सामग्रियाँ जुटाई गई हैं। जैसे कि नागपुर से सागौन की लकड़ी, राजस्थान के सरमथुरा से सैंडस्टोन, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से कालीन, अगरतला से बाँस की लकड़ी और महाराष्ट्र के औरंगाबाद और जयपुर से अशोक प्रतीक को मँगवाया गया है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने रविवार (28 मई 2023) को सुबह तमिलनाडु से आए पुजारियों (अधीनम) की उपस्थिति में हवन-पूजन किया। उसके बाद उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास राजदंड या राजदंड को स्थापित किया। इस अवसर पर अधीनमों ने मंत्रोच्चार किया। पीएम ने महात्मा गाँधी को पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

संगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित करने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राजदंड को सांष्टांग प्रणाम किया। उसके बाद अधीनमों के साथ उसे लेकर स्पीकर के आसन के पास गए। इस दौरान लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला भी उनके साथ मौजूद थे।

सदन में घुसने के दौरान पारंपरिक तमिल वाद्य बजाया जा रहा था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री से आगे-आगे शहनाई बजाई जा रही है। नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान पूजा-पाठ के दौरान मंत्रोच्चार होते रहे। अंदर भी अधीनम मंत्रोच्चार करते रहे।

सेंगोल को स्थापित करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन के बाहर कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे। यहाँ पर उनकी कैबिनेट के सभी मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। यहाँ पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम स्थल पर हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध सहित विभिन्न धर्मों के आचार्य मौजूद थे। इस दौरान इन धर्माचार्यों ने अपने-अपने धर्मों के अनुसार पाठ किया। यहाँ पर एक आचार्य ने गीता का पाठ किया। इस दौरान पीएम मोदी ने संसद भवन बनाने वाले श्रमिकों से भी मुलाकात की।

बताते चलें कि नए संसद भवन के निर्माण के लिए देश भर से सामग्रियाँ जुटाई गई हैं। जैसे कि नागपुर से सागौन की लकड़ी, राजस्थान के सरमथुरा से सैंडस्टोन, उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से कालीन, अगरतला से बाँस की लकड़ी और महाराष्ट्र के औरंगाबाद और जयपुर से अशोक प्रतीक को मँगवाया गया है।  

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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