Tuesday, October 19, 2021
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‘हथिनी ने गलती से विस्फोटक खा लिया’ – शुरुआती जाँच का यह एंगल खतरनाक और बहुत ही असंवेदनशील

'हाथी ने गलती से फल खा लिया होगा'; 'हाथी को नहीं बताया गया था कि उसे खाने से पहले फल की गुणवत्ता की जाँच कर लेनी चाहिए थी' या फिर 'निर्देश पुस्तिका को पढ़ना चाहिए था'। - ऐसे तर्क या स्पष्टीकरण किसी तरह से एक संवेदनशील इंसान को आश्वस्त नहीं कर सकते हैं।

केरल के पलक्कड़ से कुछ दिन पहले एक गर्भवती हथिनी की मौत का मामला सामने आया था। जहाँ उसने विस्फोटक से भरा अनानास खा लिया था। उसके मौत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देश भर में इसको लेकर बवाल मच गया था।

इस फ़ोटो में आप देख सकते हैं कि किस तरह मुँह में विस्फोटक के फटने की वजह से असहनीय दर्द को बर्दाश्त करते हुए पल-पल मरती हुई हथिनी शांतिपूर्वक पानी में खड़ी है। इस दृश्य को देखकर क्या कहा जा सकता है? क्या हथिनी को जानबूझकर टॉर्चर करने के लिए ये किया गया या फिर इन सब के पीछे कोई और मकसद था?

इस मामले में नकदी फसलों और मसालों की खेती करने वाले एक इस्टेट के कर्मचारी पी विल्सन को गिरफ्तार किया गया है। वहीं दो अन्य संदिग्ध अपराधी इस्टेट के मालिक अब्दुल करीम और उसका बेटा रियासुद्दीन फिलहाल फरार हैं। पी विल्सन इन्हीं के यहाँ काम करता था।

कथित तौर पर जाँच अधिकारियों के पूछे जाने पर आरोपित ने कहा कि उन्होंने जंगली सूअरों को डराने के लिए पटाखे से भरे फलों का एक जाल बनाया था, जो अक्सर उनके खेतों को नष्ट कर देते हैं। जाहिर तौर पर, खेतों में घुसने और फसलों को नष्ट करने वाले जंगली सूअरों को “डराने” के लिए केरल में फलों के अंदर विस्फोटक या विस्फोटक पदार्थों का इस्तेमाल करना उनके लिए आम बात है।

हालाँकि, आरोपित द्वारा अपने बचाव में कही गई बात सुनने में ही थोड़ी अजीब है, क्योंकि एक जंगली सूअर या किसी भी जानवर को फलों में विस्फोटक लगाकर डराने का कोई तुक ही नहीं बनता है। इसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से जानवर को किसी तरह फल खिलाना है, जिसका परिणाम बहुत ही घातक होगा, जैसा कि हाथी के मामले में हुआ।

सरकार, राज्य और केंद्र सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरण किसी तरह से एक संवेदनशील इंसान को आश्वस्त नहीं कर सकता है। यह स्पष्टीकरण प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है। संभवत: पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी किया गया यह बयान केरल सरकार द्वारा की जा रही जाँच के आधार पर है।

पर्यावरण मंत्रालय ने अपने बयान में पहले इस बात को स्वीकार किया था कि जंगली सूअर, जो पेड़ो को नुकसान पहुँचाते हैं, उन्हें फँसाने के लिए विस्फोटक से भरे फल लगाना ‘गैरकानूनी’ है। हालाँकि, इस बात पर भी जोर दिया कि हाथी ने ‘गलती से फल खा लिया होगा’।

एक तरह से यह कह देना कि ‘हाथी ने गलती से फल खा लिया होगा’; ‘हाथी को नहीं बताया गया था कि उसे खाने से पहले फल की गुणवत्ता की जाँच कर लेनी चाहिए थी’ या फिर ‘निर्देश पुस्तिका को पढ़ना चाहिए था’। हालाँकि यहाँ सवाल बहुत बड़ा है कि ऐसे बयान जारी करते वक़्त पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जरूरी बातों को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है।

न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार हाथी को आखिरी बार खेत में देखा गया था और जो आरोपित है, वह भी उसी खेत में काम करता था। दो अपराधी, जो इस वक़्त फरार है, वो उस खेत के मालिक हैं। इससे यह साबित होता है कि जंगली सूअरों को प्रताड़ित करने और उन्हें खेतों से दूर भगाने के लिए फलों में भरे हुए विस्फोटक का उपयोग करने का तरीका केरल में लंबे समय से स्थापित गैरकानूनी तरीका है।

अगर जंगली सूअरों की हत्या करने के लिए पहले से ही खेत में फलों से भरे विस्फोटक लगाए गए थे और चूँकि हाथी खेत में था, तो उसने वहाँ लगाए गए बहुत से विस्फोटक भरे फलों का सेवन किया होगा।

गौरतलब है चूँकि विस्फोटक में किसी भी प्रकार का मशीन नहीं लगा था कि यह केवल जंगली सूअर के खाने पर ही विस्फोट होगा, तो फिर इसका सेवन कोई भी दूसरा जानवर कर सकता था जिससे उसके मुँह में यह विस्फोटक फट जाता। और यही उस वक़्त गर्भवती हथिनी के साथ भी हुआ।

इस प्रकार यह कहना कि हथिनी ने गलती से जंगली सुअरों के लिए बनाया गया विस्फोटक खा लिया, तर्कसंगत नहीं है। इस तरह की बातें सिर्फ़ हमसे कुछ जंगली धारणाएँ बनाने के लिए गढ़ी या कही जाती है।

पहली बात, खेत के मालिक और वहाँ काम करने वाले ने क्या वहाँ से हथिनी के खाने के बाद विस्फोटक को हटा दिया होगा? जैसे हाथी के साथ ये हुआ, वैसे ही अगर खेत में सुअर होता तब भी श्रमिकों और मालिकों द्वारा केवल उनकी खेती को रौंदने की संभवना को लेकर उस जानवर की जिंदगी को बर्बाद करने का मकसद था?

इसलिए हाथी द्वारा गलती से विस्फोटक का सेवन करने जैसा तर्क किसी भी तरह उन लोगों का बचाव नहीं करता है। विस्फोटक खेत में आने वाले किसी भी जानवर के लिए था और उस वक़्त गर्भवती हाथी की किस्मत उसके साथ नहीं था। मीडिया में यह मामला फैलने के बाद लोगों हुए आक्रोश के कारण इसे केवल प्रसिद्धि मिली है।

जिस बयान में यह कहा गया कि हथिनी ने गलती से विस्फोटक खा लिया था, उसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि उसे जानबूझकर खिलाने वाली अफवाह या खबर दरअसल झूठी है।

हथिनी को टारगेट करके विस्फोटक नहीं खिलाया गया था, उसे कोई और भी खा सकता था। किसी ने भी उसे जबरदस्ती विस्फोटक नहीं खिलाया है, इस मामले में जानबूझकर कर खिलाने वाला कहने का मतलब बिल्कुल अलग है।

केरल में खेत के मालिकों द्वारा क्रूर तरीके से गर्भवती हथिनी के विस्फोटक खाने की वजह से हुए मौत को लेकर देश भर में लोग आक्रोशित हैं। हालाँकि पर्यावरण मंत्रालय स्वीकार कर रहा है कि यह तरीका गैरकानूनी है, लेकिन इस बात पर भी अधिक जोर नहीं दिया गया कि हथिनी द्वारा गलती से विस्फोटक का सेवन कैसे किया गया।

इसमें यह भी कहा गया कि इन क्रूर तरीकों को लागू करने वालों को किसी भी तरह से छूट नहीं देनी चाहिए लेकिन कानूनी सीमा के अंतर्गत ही इन्हें सजा दी जाएगी।

यह कहना कि हथिनी ने गलती से विस्फोटक खा लिया, जो किसी दूसरे जानवर के लिए बना था। यह बात इस ओर संकेत करती है कि इस तरह की क्रूर घटना वन जीवन को हानिकारक रूप में प्रभावित करेगी। इस तरह की क्रूर प्रथा को न ही राज्य सरकार और न ही पर्यावरण मंत्रालय को सामान्य रूप से देखा जाना चाहिए।

 

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Editorial Deskhttp://www.opindia.com
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