Tuesday, July 23, 2024
Homeदेश-समाजना रंग फेंकें-ना गुब्बारे, ना गाना बजाएँ- ना नारे: होली आते ही राजस्थान के...

ना रंग फेंकें-ना गुब्बारे, ना गाना बजाएँ- ना नारे: होली आते ही राजस्थान के बाड़मेर में लगी धारा-144, आदेश में रखा गया ‘मजहबी भावनाओं’ का ख्याल

बाड़मेर के जिलाधिकारी लोकबंधु द्वारा जारी किए गए इस ऑर्डर पर राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ कुठाराघात है। यह आदेश अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर कलंक है।

राजस्थान में हिंदुओं के त्योहार आते ही प्रशासन प्रतिबंध लगाने शुरू कर दिया। बाड़मेर जिले के कलेक्टर की ओर से जिले में धारा 144 लगा दी है। प्रशासन के इस निर्णय पर विवाद हो गया है। ऑर्डर में लिखा है कि कोई भी इस तरीके से रंग न खेले कि किसी दूसरे की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे। इसका भाजपा और हिंदू संगठनों ने विरोध किया है।

बाड़मेर के जिलाधिकारी लोकबंधु द्वारा जारी किए गए इस ऑर्डर पर राजस्थान विधानसभा में प्रतिपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं के साथ कुठाराघात है। यह आदेश अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर कलंक है।

इस मामले को राजेंद्र राठौड़ ने विधानसभा में भी उठाया और कहा कि होली का पर्व रंगों का त्योहार है। उन्होंने कहा, “बाड़मेर कलेक्टर का एक आदेश मेरे हाथ में है। कलेक्टर ने 2 से 12 मार्च तक धारा 144 लागू की है। होली पर धारा 144 लागू करना हमारी धार्मिक भावना के साथ खिलवाड़ है।” उन्होंने सरकार इस ऑर्डर पर जवाब दे।

बाड़मेर जिलाधिकारी द्वारा निकाला गया आदेश (साभार: दैनिक भास्कर)

जिला कलेक्टर द्वारा निकाले गए आदेश में गाना बजाने और नारे लगाने पर पाबंदी लगाई है। आदेश में कहा गया है कि किसी भी धर्म का कोई व्यक्ति कोई ऐसा ऑडियो गाना नहीं चलाएगा और ना ही नारे लगाएगा, जिससे किसी दूसरे धर्म या व्यक्ति की भावना को ठेस पहुँचे।

आदेश में आगे कहा गया है कि होली पर इस तरह रंग ना खेलें कि दूसरे व्यक्ति की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचे। किसी व्यक्ति की इच्छा के विरूद्ध उस पर रंग ना डाले, जिससे कि साम्प्रदायिक या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचे।

उधर, कलेक्टर ने कहा कि यह ऑर्डर सभी त्योहारों से पहले निकाले जाते हैं। इसमें लोगों के इकट्ठा होने पर रोक नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर लोग शराब ना पीएँ, धारदार हथियार ना निकालें और लड़ाई-झगड़े आदि ना हों, इसलिए ऑर्डर निकाला गया है। ये ऑर्डर कई सालों से निकल रहे हैं।

पिछले साल भी हिंदुओं के त्योहारों से पहले राजस्थान के कई जिलों में धारा 144 लागू की गई थी। पिछले साल अप्रैल में कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) ने अजमेर जिले में हिंदू त्योहारों से पहले धारा 144 लागू किया था। इस फरमान में आयोजनों के दौरान धार्मिक चिन्ह वाले झंडों को नहीं लगाने की हिदायत दी गई थी।

उस भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अजमेर नगर निगम के डिप्टी मेयर नीरज जैन हिंदुस्तानी ने कॉन्ग्रेस शासन की तुलना मुगलराज से की थी। नीरज जैन ने ट्वीट कर लिखा था, “कोटा, बीकानेर, जोधपुर और अब अजमेर सहित अन्य शहर में गहलोत साब का नादिरशाही फ़रमान। किसी धार्मिक चिन्ह के झण्डे लगाना, DJ बजाना अपराध है! गौरतलब है कि एक और महावीर जयंती, दुर्गा अष्टमी, अम्बेडकर जयंती, राम नवमी और हनुमान जयंती के जुलूस और शोभा यात्रा पर ये आदेश।“

उस साल 10 अप्रैल को रामनवमी, 14 अप्रैल को महावीर जयंती और 16 अप्रैल को हनुमान जयंती थी। इन अवसरों पर हिंदू समुदाय धूमधाम से झाँकी एवं जुलूस निकालते हैं और पर्व को मनाते हैं। हालाँकि, राजस्थान सरकार ने फरमान जारी कर आयोजनों के दौरान धार्मिक झंडे पर रोक लगा दी थी। इसके बाद काफी बवाल हुआ था।

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 को पथराव की घटना के बाद कॉन्ग्रेस सरकार ने घरों पर धार्मिक झंडे फहराने पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा जुलूसों और शोभा यात्राओं के दौरान डीजे बजाने को लेकर पाबंदियाँ लगाई थी। ये पाबंदियाँ दुर्गा अष्टमी, राम नवमी, महावीर जयंती और हनुमान जयंती आदि हिंदू त्योहारों को चिह्नित करने के लिए की गईं।

राज्य के कई जिलों में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू कर दी गई है। राजस्थान सरकार ने अपने आदेश में यहाँ तक कहा था कि इस दौरान लोगों को घर के आगे से गुजरने वाली शोभा यात्रा को देखने के लिए अपने घरों की छतों पर खड़े होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इससे पहले 28 अक्टूबर 2021 को झुंझनू जिले के जिलाधिकारी उमर दीन खान ने दीपावली त्योहार के चलते धारा 144 लागू करने का आदेश जारी कर दिया था। इस दौरान धार्मिक ऑडियो चलाने से लेकर जयकारा लगाने तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद खूब बवाल हुआ। बवाल के बाद जिलाधिकारी को अपने आदेश में बदलाव करना पड़ा था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

नेचुरल फार्मिंग क्या है, बजट में क्यों इसे 1 करोड़ किसानों से जोड़ने का ऐलान: गोबर-गोमूत्र के इस्तेमाल से बढ़ेगी किसानों की आय

प्राकृतिक खेती एक रसायनमुक्त व्यवस्था है जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है, जो फसलों, पेड़ों और पशुधन को एकीकृत करती है।

नारी शक्ति को मोदी सरकार ने समर्पित किए ₹3 लाख करोड़: नौकरी कर रहीं महिलाओं और उनके बच्चों के लिए भी रहने की सुविधा,...

बजट में महिलाओं की हिस्सेदारी कार्यबल में बढ़ाने पर काम किया गया है। इसके अलावा कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास स्थापित करने का भी ऐलान हुआ।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -