Saturday, July 13, 2024
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पंजाब में फिर से ‘बेअदबी’… गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास गुटका साहिब के फटे हुए पन्ने मिले: इलाके में तनाव, FIR दर्ज

कुछ स्थानीय लोगों ने गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास एक गली में गुटका साहिब के फटे पन्ने देखे थे और पुलिस को सूचित किया। जिसके बाद उन्होंने जाँच शुरू कर दी।

पंजाब में बार फिर से ‘बेअदबी’ का मामला सामने आने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया है। यह मामला लुधियाना के डाबा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले बसंत नगर इलाके की है। यहाँ रविवार (16 जनवरी 2022) शाम को गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास गुटका साहिब के फटे हुए पन्ने मिले। जिसके बाद इलाके में तनाव बढ़ गया है।

पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से फटे हुए पन्नों को इकट्ठा किया और गुरुद्वारा साहिब के कर्मचारियों को सौंप दिया। संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP, ग्रामीण) रावचरण सिंह बराड़ ने कहा कि कुछ स्थानीय लोगों ने गुरुद्वारा रेरू साहिब के पास एक गली में गुटका साहिब के फटे पन्ने देखे थे और पुलिस को सूचित किया। जिसके बाद उन्होंने जाँच शुरू कर दी।

मामले में पुलिस ने सुखदीप सिंह की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। डाबा थाना प्रभारी उप निरीक्षक दविंदर सिंह ने कहा कि अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 295-A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही है और आरोपित का पता लगा रही है। फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

गौरतलब है कि हाल ही में पंजाब के अमृतसर जिले के अजनाला शहर स्थित भागूपुर हवेलियाँ गुरुद्वारा में बेअदबी के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि उसने गुरुग्रंथ साहिब के स्वरूप को पालकी साहिब से उठा कर मेज पर रख दिया। इसके बाद उसने ‘गुटका साहिब’ को उठाकर अपनी जेब में डाल लिया। उसने रुमाल साहिब को भी उठाकर जेब में रख लिया और भागने की कोशिश करने लगा। तभी गुरुद्वारे के प्रबंधकों ने उसे पकड़ कर एक कमरे में बंद कर दिया। उसे मानसिक रूप से असंतुलित बताया गया था।

‘रुमाल साहिब’ एक प्रकार का पवित्र रुमाल है। जिन सिखों ने अपने बाल कटा लिए हैं और पगड़ी नहीं पहनते हैं, वो गुरुद्वारा समेत सिखों के अन्य पवित्र स्थल में जाने पर इसे अपने सिर पर रखते हैं। हिन्दू समाज के लोग भी गुरुद्वारा में दर्शन करने जाते हैं तो इससे अपना सिर ढकते हैं। अधिकतर गुरुद्वारा में अतिथियों के लिए इसे पहले से ही बड़ी संख्या में रखा जाता है। अगर गुरुद्वारा से ये नहीं मिलता है, तो लोग घर से ही साफ़-सुथरा रुमाल लेकर जा सकते हैं।

इससे पहले पंजाब के मुक्तसर जिले से गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी का मामला सामने आया था। यहाँ सेवादार के बेटे पर ही आरोप था कि उसने धर्मग्रंथ को मूल स्थान से उठाकर आँगन में रखकर उसका अनादर किया। दिसंबर 2021 में अमृसर के स्वर्ण मंदिर में कथित बेअदबी के आरोप में आरोपित की दरबार साहिब परिसर में ही हत्या कर दी गई थी।

बता दें कि ‘गुटका साहिब’ को सिख समुदाय में एक पवित्र पुस्तक के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसका आकार छोटा होता है। इसमें गुरुओं की कुछ चुनी हुई ‘वाणी’ को प्रकाशित किया जाता है। ‘गुटका’ शब्द संस्कृत और पाली भाषाओं से आता है, जिसका अर्थ होता है – सुरक्षित रखना, या फिर लिफाफे में रखना। 18वीं शताब्दी में जब इस्लामी आक्रांताओं का अत्याचार बढ़ गया था, तब इसके छोटे आकार के कारण सिख संतों ने ‘गुटका साहिब’ पास में रखना और इसे लेकर यात्रा करना उचित समझा। इसके कई प्रकार हैं, जैसे – रोज पाठ किए जाने वाले ‘गुटका साहिब’ को ‘नितनेम गुटका’ कहते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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