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‘मुस्लिम गैंग’ से हिंदू बच्चियों की सुरक्षा के लिए 36 दिनों से जारी है ब्यावर का संघर्ष, CBI जाँच की माँग: स्कूल जाने वाली लड़कियों को ब्लैकमेल कर करते थे रेप, धर्मांतरण का डालते थे दबाव

नामजद आरोपितों में रेहान, सोहेल मंसूरी, लुकमान, अफराज, कैफे संचालक श्रवण जाट, आशिक, करीम, हकीम कुरैशी, जावेद, सांवरमल और अमान मंसूरी शामिल हैं।

राजस्थान के ब्यावर जिले के बिजयनगर में स्कूली छात्राओं के साथ रेप और ब्लैकमेल का मामला पिछले 36 दिनों से लोगों के दिलों में आग बनकर जल रहा है। 15 फरवरी 2025 को जब ये मामला सामने आया, तो हर कोई सन्न रह गया। नाबालिग लड़कियों के साथ हुई इस हैवानियत ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। शनिवार (22 मार्च 2025) को एक बार फिर बिजयनगर की सड़कों पर गुस्सा फूट पड़ा।

सर्व समाज संघर्ष समिति ने बिजयनगर बंद का ऐलान किया और लोग सीबीआई जाँच की माँग लेकर सड़कों पर उतर आए। बाजार बंद रहे, दुकानों के शटर डाउन थे और हर तरफ एक ही आवाज गूँज रही थी – इंसाफ चाहिए

रिपोट्स के मुताबिक, प्रदर्शन कारी लोगों का कहना है कि SIT की जाँच से उन्हें भरोसा नहीं। पहले इस केस को एडिशनल एसपी नेम सिंह देख रहे थे, लेकिन अब अजमेर रेंज के डीआईजी ओमप्रकाश ने जाँच की कमान आईपीएस अभिषेक अंदासु को सौंप दी। अभिषेक IIT बॉम्बे से पासआउट हैं और साइबर क्राइम के एक्सपर्ट माने जाते हैं। फिर भी लोग कह रहे हैं कि SIT की रफ्तार धीमी है और सच को पूरी तरह बाहर लाने के लिए सीबीआई ही सही रास्ता है। प्रदर्शनकारियों ने पैदल मार्च निकाला, नारे लगाए और प्रशासन से गुहार लगाई कि इस मामले की गहराई तक जाकर हर दोषी को सजा दी जाए।

ये मामला तब शुरू हुआ, जब 15 फरवरी को एक नाबालिग लड़की ने बिजयनगर थाने में शिकायत की। फिर धीरे-धीरे तीन और पीड़िताओं के परिवार सामने आए। आरोप है कि समुदाय विशेष के युवकों ने इन लड़कियों को पहले दोस्ती के जाल में फँसाया, फिर उनके अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया। इसके बाद रेप की वारदात को अंजाम दिया और उन्हें जबरन कलमा पढ़ने, रोजा रखने और धर्म बदलने के लिए मजबूर किया।

अब तक पुलिस ने 16 आरोपितों को पकड़ा है। इनमें 11 को जेल भेजा जा चुका है और 5 नाबालिगों को किशोर सुधार केंद्र में रखा गया है। नामजद आरोपितों में रेहान, सोहेल मंसूरी, लुकमान, अफराज, कैफे संचालक श्रवण जाट, आशिक, करीम, हकीम कुरैशी, जावेद, सांवरमल और अमान मंसूरी शामिल हैं।

बिजयनगर में शनिवार (22 मार्च 2025) को हालात तनावपूर्ण रहे। प्रशासन ने कोई रिस्क न लेते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया। DYSP सज्जन सिंह ने खुद मोर्चा संभाला। 8 थानों की पुलिस और RAC का जाब्ता शहर में नजर आया। लेकिन लोगों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि ये सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश है। वो चाहते हैं कि सीबीआई इसकी तह तक जाए और पीड़िताओं को पूरा इंसाफ मिले।

नए SIT प्रभारी अभिषेक अंदासु ने कहा, “हम इस केस को पूरी गंभीरता से देख रहे हैं। कोई लापरवाही हुई तो उसे ठीक करेंगे। जाँच तेज और निष्पक्ष होगी।” उनकी टीम में एडिशनल एसपी ब्यावर, मसूदा सीओ, दो थाना अधिकारी और एक सब इंस्पेक्टर शामिल हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये बदलाव लोगों का भरोसा जीत पाएगा? बिजयनगर के लोग अभी भी परेशान हैं। माँ-बाप अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। हर कोई चाहता है कि दोषियों को ऐसी सजा मिले कि कोई दोबारा ऐसी हरकत की हिम्मत न करे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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