Tuesday, August 9, 2022
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राजस्थान में एक संत ने की आत्मदाह की कोशिश, दूसरे दो दिन से टावर पर: अवैध खनन के खिलाफ 550 दिनों से आंदोलन, फिर भी सोई है कॉन्ग्रेस सरकार

यहाँ बताना आवश्यक है कि वर्ष 2009 में भी भरतपुर के डीग व कामां तहसील में पड़ रहे ब्रज के धार्मिक पर्वतों को संरक्षित वनक्षेत्र घोषित किया गया था। उस समय तहसील में अंतर होने से ब्रज के प्रमुख पर्वत कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र होने से छूट गया था। इसके कारण वहाँ खनन जारी है।

राजस्थान (Rajasthan) में अपराधियों के सामने अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार (Congress Government) के घुटने टेकने के बाद साधु-संतों को सामने आना पड़ा है।

अवैध खनन के खिलाफ संतों के जारी आंदोलन के दौरान 65 वर्षीय बाबा विजयदास ने बुधवार (20 जुलाई 2022) को शरीर पर किरोसीन डालकर आत्मदाह करने की कोशिश की। गंभीर रूप से झुलसने के बाद बाबा को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

दरअसल, भरतपुर जिले के डीग क्षेत्र में आदिबद्री धाम और कनकांचल में अवैध खनन के विरोध में साधु-संतों का करीब 550 दिनों से गाँव पसोपा में आंदोलन चल रहा है। इधर बाबा नारायणदास मंगलवार (19 जुलाई 2022) को विरोध में टावर पर चढ़ गए और पूरी रात उन्होंने वहीं गुजारी। इस दौरान बाबा को टावर पर ही ग्लूकोज और अन्य सामग्री पहुँचाई गई।

बुधवार को भी आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में साधु-संत इकट्ठा हो गए। विरोध के दौरान ही सुबह करीब 11.30 बजे विजयसदास नाम के एक संत ने धरनास्थल के पीछे जाकर ज्वलनशील पदार्थ अपने शरीर पर छिड़ककर आग लगा ली। 

संत को आत्मदाह करता देख वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य संतों ने तुरंत आग बुझाई। संत विजयदास को डीग के स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें आरबीएम जिला अस्पताल रेफर किया गया है। अस्पताल के बाहर भी संतों का जमावड़ा लगा हुआ है।

संत विजयदास गाँव पासोपा के मंदिर पर ही रहते हैं। उधर बाबा नारायण दास अभी टावर पर ही बैठे हैं। मौके पर तैनात भारी पुलिस बल उन्हें मनाकर उतारने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, बाबा नारायणदास खनन के खिलाफ अपने विरोध पर अडिग हैं। बुधवार को भरतपुर के संभागीय आयुक्त कार्यालय में साधु-संतों के साथ वार्ता की बात कही जा रही है।

गौरतलब है कि अवैध खनन के विरोध में 16 जनवरी 2021 से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है। 6 अप्रैल 2021 को साधु-संतों का एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात की थी।

11 जुलाई 2022 को बाबा हरिबोल दास ने अलीपुर में आयोजित सभा के दौरान कफन पहनकर आत्मदाह करने का ऐलान किया था। इस दौरान उन्होंने कफन यात्रा निकाली थी और 19 जुलाई 2021 को आत्मदाह करने की घोषणा की थी।

वहीं, मान मंदिर के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री के नेतृत्व में 11 सितंबर 2021 को एक प्रतिनिधिमंडल कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से भी मुलाकात की थी। प्रियंका गाँधी ने प्रतिनिधिमंडल से अवैध खनन को लेकर सरकार की ओर से आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन यह आश्वासन ही रह गया। 

संतों का कहना है कि अवैध खनन को लेकर अब 100 से भी अधिक अधिकारियों और सैकड़ों विधायक एवं मंत्रियों को 350 से भी ज्यादा ज्ञापन दिए गए, लेकिन उनकी माँगें पूरी नहीं की गईं।

अवैध खनन के खिलाफ साधु-संतों ने आसपास के गाँवों में कई बार जनसंपर्क अभियान, पदयात्रा, धरना-प्रदर्शन, ट्रैक्टर रैली, सड़क जाम, आमरण अनशन, क्रांति यात्रा आदि तक की, लेकिन आदिबद्री-कनकांचल पर्वतों पर खनन नहीं रूका। इसके बाद संतों में आक्रोश फैल गया। 

यहाँ बताना आवश्यक है कि वर्ष 2009 में भी भरतपुर के डीग व कामां तहसील में पड़ रहे ब्रज के धार्मिक पर्वतों को संरक्षित वनक्षेत्र घोषित किया गया था। उस समय तहसील में अंतर होने से ब्रज के प्रमुख पर्वत कनकांचल और आदिबद्री का कुछ हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र होने से छूट गया था। इसके कारण वहाँ खनन जारी है।

यदि कनकांचल और आदिबद्री पर्वत के क्षेत्र को वन संरक्षित क्षेत्र का दर्जा दे दिया जाता है तो वहाँ खनन नहीं हो पाएगा। इससे तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. हिमांशु गुप्ता ने प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा था। बता दें कि 1996 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार वन संरक्षित क्षेत्र में खनन प्रतिबंधित है।

बता दें कि कि अवैध खनन राजस्थान मेें भ्रष्टाचार का एक प्रमुख कारण है। खनन को लेकर आए दिन हत्याएँ होती रहती हैं। पिछले साल खनन घोटाला भी सामने आया था। खनन घोटाला के कारण राज्य को लगभग 1000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।

दरअसल, लाइमस्टोन (चूना पत्थर) की माइंस को मार्बल की श्रेणी में डाल कर ‘RDSA माइनिंग’ को आवंटित कर दिया गया। बता दें कि लाइमस्टोन मेजर मिनरल की श्रेणी में आता है, जिसकी नीलामी केंद्र द्वारा तय नियमों के अनुसार होती है।

राजस्थान के खनन विभाग ने प्रतापगढ़ के पिपलखूँट तहसील के दाँता में 74.249 हेक्टेयर और केला-मेला में 10.4162 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले लाइमस्टोन (सीमेंट बनाने में इसका उपयोग होता है) को मार्बल (संगमरमर) दिखा दिया।

मार्बल माइनर मिनरल में आता है, इसीलिए इसकी नीलामी में राज्य की ही भूमिका होती है। इस तरह श्रेणी बदल कर दोनों ब्लॉक का आवंटन किया गया। खनन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल और खान निदेशक केबी पांड्या इस मामले में निशाने पर हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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