कमलेश तिवारी के हत्यारों को हर जिले में मिली मदद: बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत से नेपाल तक टेरर फंडिंग का खेल

कई राज्यों तक फैले तार से इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश में या तो कोई नया संगठन खड़ा हो गया है जो इस तरह की वारदात को अंजाम दे रहा है, या फिर किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का फायदा इन हत्यारों को मिला है।

सभी की निगाहें कमलेश तिवारी की हत्या के बाद इस बात पर टिकी हैं कि हत्यारे कब पकड़े जाएँगे। कई साज़िशकर्ता पुलिस की गिरफ़्त में आ चुके हैं और अब उन दोनों हत्यारों की तलाश जारी है, जिन्हें भगवा कपड़ों में देखा गया था। उन दोनों का नाम अशफाक और मोईनुद्दीन है। पुलिस ने दोनों के ऊपर ढाई-ढाई लाख रुपए का इनाम रखा है और उनकी फोटो भी सार्वजनिक कर दी गई है। कुल मिला कर अभी तक तीन राज्यों से गिरफ्तारियाँ हुई हैं। गुजरात के सूरत, महाराष्ट्र के नागपुर और उत्तर प्रदेश के बिजनौर और बरेली से गिरफ्तारियाँ की गई हैं। बिजनौर से उन दोनों मौलानाओं को गिरफ़्तार किया गया, जो पहले से ही कमलेश तिवारी की हत्या की बातें करते रहते थे।

अब ताज़ा सूचना ये आई है कि कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या करने के दौरान उनमें और हत्यारों में अच्छी-ख़ासी हाथापाई भी हुई थी। ये हाथापाई तब हुई होगी, जब कमलेश तिवारी ने बचने के लिए संघर्ष किया होगा। इस हाथापाई में हत्यारे घायल भी हो गए थे। इसके बाद उन्होंने बरेली में इलाज कराया था। इलाज कराने के बाद हत्यारों की लोकेशन बरेली के बाद लखीमपुर में मिली। पुलिस का कहना है कि अब वो उनके क़रीब पहुँच चुकी है और वे बच कर भाग नहीं पाएँगे। हालाँकि, अब तक के लोकेशन के आधार पर यही पता चला है कि हत्यारे नेपाल भागने की फ़िराक़ में थे। फ़िलहाल शाहजहाँपुर में एसटीएफ की टीम डेरा डाले हुए है और उनकी तलाश जारी है।

पता चला है कि बरेली के प्रेमनगर में हत्यारों ने एक मुफ़्ती से मुलाक़ात की थी। तहकीकात के बाद पुलिस ने मुफ़्ती कैफ अली नामक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। मुफ़्ती से मिलने के बाद ही उन हत्यारों ने कमलेश तिवारी हत्याकांड की सूचना सूरत और फिर दुबई तक दी। हालाँकि, जिस मुफ़्ती को हिरासत में लिया गया, उसने इन आरोपों से इनकार किया है। इस केस का दुबई कनेक्शन पुलिस के लिए सरदर्द बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के ख़िलाफ़ कई अहम सबूत और सुराग उसके हाथ लगे हैं।

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वहीं अगर कमलेश तिवारी के परिवार की बात करें तो अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने अस्थियों का विसर्जन किया। सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) की रात वाराणसी के दसाश्वमेध घाट पर उनकी अस्थियों का विसर्जन किया गया। कमलेश तिवारी की माँ कुसुम तिवारी और छोटे पुत्र मृदुल ने रात के वक़्त काशी पहुँच कर अस्थि-विसर्जन की प्रक्रिया संपन्न की। हाल ही में परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाक़ात की थी और उसके बाद सरकार से 11 माँगे रखी थीं। ख़बर आई थी कि सरकार ने परिवार की अधिकतर माँगें मान ली है।

हत्याकांड के बाद हत्यारों का लोकेशन ट्रेस किए जाने की प्रक्रिया में एक बहुत ही अजीब और खतरनाक ट्रेंड ये देखने को मिला है कि वो जहाँ भी, जिस भी इलाक़े में पहुँचे, वहाँ किसी न किसी परिचित ने उनकी मदद की। उपर्युक्त राज्यों के अलावा हरियाणा, दिल्ली और कर्नाटक तक से भी इस हत्याकांड के तार जुड़ने की सम्भावना है, जिसके लिए यूपी पुलिस इन राज्यों के उच्चाधिकारियों से सम्पर्क बनाए हुए है। सूरत, बरेली, लखीमपुर, शाहजहाँपुर, पीलीभीत और लखनऊ तक, हर जगह हत्यारों को कोई न कोई मदद करने वाला मिला। आरोपितों ने लखीमपुर के पलिया में एक टैक्सी चालक से मोबाइल माँग कर एक स्थानीय वकील को कॉल किया। फोन पर उन्होंने आत्मसमर्पण करने के बारे में बात की। वकील ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।

उधर एक अन्य ख़बर यह है कि नेपाल सीमा से लगे गुलरिया गाँव के पूर्व प्रधान सहित क़रीब 14 ऐसे लोग हैं, जो एटीएस की निगाह पर आए हैं। कई राज्यों तक फैले तार से इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि देश में या तो कोई नया संगठन खड़ा हो गया है जो इस तरह की वारदात को अंजाम दे रहा है, या फिर किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का फायदा इन हत्यारों को मिला है। पूर्व प्रधान से एटीएस ने पूछताछ भी की है। हालाँकि, ये मामला लखीमपुर और बरेली का ही है लेकिन इसका कमलेश तिवारी की हत्या से जोड़ कर देखे जाने की बात सामने नहीं आई है। यह दिखाता है कि इस क्षेत्र में टेरर फंडिंग का भी एक नया जंजाल पैदा हो रहा है।

दोनों हत्यारोपित पलिया में भी काफ़ी देर रुके थे। वहाँ उन्होंने ई-रिक्शा का भी इस्तेमाल किया था। उसी ई-रिक्शे से वो इनोवा गाड़ी तक गए थे। उस गाड़ी के ड्राइवर तौहीद ने पुलिस को बताया कि उसके मालिक का एक दोस्त गुजरात में रहता है, जिसके कहने पर उसने 5 हज़ार रुपए में बुकिंग की थी। पलिया में रुक कर हत्यारों ने जानकारियाँ जुटाई थीं। इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने समय-समय पर कुल 7 लोगों को हिरासत में लिया है। कार चालक के अलावा बरेली से 4 और पीलीभीत से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। पीलीभीत से जिस युवक को गिरफ़्तार किया गया, वह भी फोन पर हत्यारों के संपर्क में बना हुआ था। पुलिस ने शनिवार (अक्टूबर 19, 2019) को ही हत्यारों को धर-दबोचा होते लेकिन शाहजहाँपुर में पुलिस के उस लोकेशन पर पहुँचने से पहले ही वो लोग भाग निकले।

उधर उत्तर प्रदेश के क़ानून मंत्री बृजेश पाठक ने कहा है कि आरोपितों को 6 महीने के ट्रायल में ही सज़ा-ए-मौत दिलाने के लिए कोर्ट से डे-टू-डे सुनवाई का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने पीड़ित परिजनों से भी मुलाक़ात की। उधर बिजनौर के दोनों मौलानाओं से जानकारी के बाद कुछ अहम जानकारियाँ हाथ लगने की बात कही जा रही है। दोनों से किसी गोपनीय जगह पर पूछताछ की गई।

शाहजहाँपुर से आए अपडेट के मुताबिक हत्यारे दिल्ली भागना चाहते थे लेकिन कड़ी चौकसी के कारण मुरादाबाद से आगे नहीं बढ़ पाए। सभी जिलों में हत्यारों के कनेक्शन और उन्हें मिल रही मदद के कारण यह साफ़ हो गया है कि उन्होंने अच्छी-खासी तैयारी कर रखी थी। शाहजहाँपुर के मस्जिदों और मुसाफ़िरख़ानों पर पुलिस नज़र बनाए हुए है। लोकल पुलिस ऐसे लोगों पर भी नज़र रख रही है जो गुजरात से सम्बन्ध रखते हैं क्योंकि आशंका है कि हत्यारे किसी गुजराती के यहाँ ही ठहरे हुए हैं, जिसका घर रेलवे स्टेशन के नजदीक हो। फ़िलहाल ये हत्यारे आगे-आगे भाग रहे हैं और पुलिस उनके पीछे है। एक तरह से चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा है और उनकी गिरफ़्तारी कब तक संभव होगी, यह चर्चा का विषय है।

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