Wednesday, January 27, 2021
Home देश-समाज कहानी वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन की जिन्हें केरल की राजनीति ने बर्बाद किया

कहानी वैज्ञानिक नाम्बी नारायणन की जिन्हें केरल की राजनीति ने बर्बाद किया

नारायणन की इस कहानी में सेक्स है, पैसा है, राजनीतिक साज़िश है, देशद्रोह की बात है, और अंततः एक वैज्ञानिक की जीत है जिसे आगे बढ़ने से रोकने के लिए केरल सरकार और आला अधिकारियों ने लम्बी साज़िश रची थी।

बात लगभग 1995 के दौर की है, सत्ता की कुर्सी को लेकर केरल की कॉन्ग्रेस में भीतरी घमासान चल रहा था। उस दौर में मुख्यमंत्री के करुणाकरण के सुपुत्र ने अपने पिता के गुट के कुछ कॉन्ग्रेसी नेताओं का अपमान कर दिया था और विरोधी गुट के ए के एंटनी, इसका फ़ायदा उठाते हुए ख़ुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे। एंटनी के क़रीबी थे ओमन चंडी जो उस समय करुणाकरण के मंत्रालय में वित्त मंत्री थे।

करुणाकरण की ख़ास बात ये थी कि उनकी पुलिस विभाग में ख़ासी पहुँच और बड़ा रसूख था। रमन श्रीवास्तव (आईजी) जैसे अफ़सर उनके क़रीबी हुआ करते थे। पर अफ़सोस, अच्छे से अच्छे लोगों के भी विरोधी तो होते ही हैं और उस समय के एक डीआईजी सीबी मैथ्यूज (जो ओमन चंडी के करीबी थे) की रमन श्रीवास्तव से पटती नहीं थी।

मैथ्यूज को पता था कि रमन श्रीवास्तव के रहते वो डीजीपी नहीं बन सकते। तो करुणाकरण को सिंहासन से उखाड़ फेंकने की योजना बनी। इसी दौर में वहाँ आईबी के एडिशनल डायरेक्टर रतन सहगल थे जिन्हें बाद में सीआईए का एजेंट पाए जाने पर और इसरो के क्रायोजेनिक इंजन प्रोग्राम को बर्बाद करने कि उनकी साज़िशों का भंडाफोड़ होने पर उन्हें आईबी से निकाल बाहर किया गया था। रतन सहगल के सहयोगी थे आर बी श्रीकुमार, जो पहले से एंटनी गुट के क़रीबी थे और करुणाकरण सरकार को गिराने की साज़िश में शामिल भी थे।

मालदीव की मरियम रशीदा इसी वक़्त अपना वीज़ा बढ़वाने सीनियर इंस्पेक्टर विजयन के पास पहुँची। मौक़े का फ़ायदा उठाकर विजयन ने बदले में उनके सामने कुछ अनुचित ‘माँगें’ रखी। फ़लस्वरूप, रशीदा ने विजयन को झिड़का ही नहीं बल्कि आईजी से उनकी शिक़ायत करने की बात भी कह दी।

इतने ढेर सारे नाम सुनने पर शायद आपको आर बी श्रीकुमार का नाम जाना पहचाना-सा लगा होगा? ये वही हैं जिन्होंने बाद में मोदी पर 2002 के दंगों का फ़र्ज़ी आरोप लगाया था। आजकल ये आपको आम आदमी पार्टी की टोपी लगाए दिख जाएँगे। इतने लोगों के साथ आ जाने पर ये तय हो गया था कि मालदीव की कुछ औरतों, एक आईपीएस अफ़सर और कुछ इसरो के वैज्ञानिकों की कीमत पर जाल बुना जा सकता है।

अमेरिका भारत को क्रायोजेनिक तकनीक देने से मना कर चुका था और रूस से भी अब कोई उम्मीद नहीं थी। फिर भी, नाम्बी नारायणन और शशि कुमार इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। जालसाज़ों को इतना पता था कि इनके ना होने से ये क्रायोजेनिक इंजन का प्रोग्राम डूबेगा और भारत का अन्तरिक्ष और मिसाइल कार्यक्रम कई साल पीछे चला जाएगा।

एक दिन सुबह अचानक ख़बर आनी शुरू हुई कि मालदीव की दो सुंदरियों मरियम रशीदा और फव्जिया हसन ने भारत के दो वैज्ञानिकों को हनी ट्रैप में फँसा लिया है। ज़िस्म और कुछ लाख डॉलर के बदले में इन वैज्ञानिकों ने भारत के क्रायोजेनिक इंजन का प्रोग्राम बेच डाला था!

मलयालम मीडिया से शुरू हुई इस ख़बर को राष्ट्रीय मीडिया में भी जगह मिली। फिर बी ग्रेड की फिल्मों जैसा कथानक लिखने वालों की ख़ोज हुई और मालदीव की औरतों, वैज्ञानिकों और मुख्यमंत्री के क़रीबी कहे जाने वाले बड़े पुलिस अधिकारियों की मसालेदार कहानियाँ गढ़ी गयीं। थोड़े ही दिन में लोगों को भी लगने लगा कि इसरो के इस जासूसी काण्ड में मुख्यमंत्री की भी मिली भगत है। आईजी रमन श्रीवास्तव और करुणाकरण पर शिकंजा कसने लगा।

लगातार अख़बारों में आती ख़बरों के मद्देनजर हाई कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और ओमन चंडी ने इसी वक़्त इस्तीफ़ा दे दिया। आख़िरकार करुणाकरण को भी इस्तीफ़ा देना पड़ा और एंटनी मुख्यमंत्री बने। उन्हें पता था कि मामला तो कुछ है ही नहीं इसलिए केस सीबीआई को सौंप दिया गया।

नारायणन और शशि कुमार की घनघोर भर्त्सना हुई। ऑटो रिक्शा वाले तक नारायणन की पत्नी को पहचानकर बिठाने से इनकार करने लगे। यहाँ तक कि उनके बच्चों को भी जासूस-गद्दार का बच्चा बताया गया। सीबीआई ने जाँच शुरू की तो पहले ही हफ़्ते में पता चल गया कि शुरूआती सबूत ही फ़र्ज़ी हैं और इसमें कोई मुक़दमा नहीं बनता। फिर भी, मीडिया में वैज्ञानिकों के घर से काफ़ी नगद मिलने की ख़बरें उड़ाई गयी जो कि सीबीआई को कभी मिली ही नहीं थी।

सीबीआई ने अदालत में कहा कि ये केरल पुलिस की काफ़ी सोची समझी साज़िश थी। केरल पुलिस के सीबी मैथ्यूज, विजयन और के के जोशुआ के अलावा आईबी के आर बी श्रीकुमार पर मुक़दमा चलाने की सिफ़ारिश सीबीआई ने कर दी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी अभियुक्तों को रिहा किया और केरल सरकार को पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने कहा।

सीबी मैथ्यूज को ओमन चंडी ने मुख्यमंत्री बनने पर चीफ़ इनफार्मेशन कमिश्नर बनाया। रतन सहगल भारत के परमाणु कार्यक्रम सम्बन्धी राज सीआईए को बेचते पकड़े गए और वो यूएसए भाग गए। आपको आर बी श्रीकुमार तीस्ता शीतलवाड के बगल में बैठे नजर आ जाएँगे। एंथनी तो भारत के रक्षा मंत्री ही हो गए और उनके बाद इस सरकार की शुरुआत में सेना के पास बीस दिन का गोला-बारूद था। हाँ, दोनों वैज्ञानिक फिर से शोध में नहीं गए और उन्हें क्लर्क वाला काम थमा दिया गया।

आप समझ सकते हैं कि इससे भारत के अन्तरिक्ष और मिसाइल कार्यक्रम का क्या हुआ होगा? शायद वो अंदाज़ा लगाना अब मुश्किल नहीं है।

हाल ही में,  2017 में जब कॉन्ग्रेस अन्तरिक्ष में जाने वाले क्रायोजेनिक इंजन का श्रेय लूट रही थी तो उन्होंने भारत को ये नहीं बताया था कि एक मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए उन्होंने भारत के इस सपने का क्या किया था?

भारत सरकार ने नारायणन को उनके वैज्ञानिक शोध के लिए पद्म सम्मान देने का फ़ैसला किया है। उनके शोध को छोड़ भी दें, तो राजनैतिक षड्यंत्रों से इतनी लम्बी लड़ाई लड़कर जीतने वाले के सम्मान में तालियाँ तो बनती ही हैं!

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Anand Kumarhttp://www.baklol.co
Tread cautiously, here sentiments may get hurt!

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe