Wednesday, July 28, 2021
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अयोध्या में राम मंदिर: ‘शरीयत के ख़िलाफ़ है सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला, मुस्लिम समर्थन भी करें तो फर्क़ नहीं पड़ता’

मामले के अन्य मुस्लिम पक्षों के बारे में बात करते हुए जिलानी ने कहा कि उन्हें सभी के विचारों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए कहीं अन्यत्र 5 एकड़ की ज़मीन देना शरीयत क़ानून के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक शरिया इस बात की अनुमति नहीं देता।

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड का पक्ष रखने वाले ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा है कि राम मंदिर मामले में शीर्ष अदालत का फ़ैसला शरीयत के ख़िलाफ़ है। जिलानी ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने जो फ़ैसला दिया, वो अंतिम नहीं है। जिलानी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट अब तक एक दर्जनों ऐसे फ़ैसलों को पलट चुका है, जो 5 सदस्यीय पीठ ने दिया हो। उन्होंने दावा किया कि क़ानून के जानकर इस बात को जानते हैं कि 5 सदस्यीय पीठ द्वारा दिया गया फ़ैसला अंतिम नहीं है।

बकौल ज़फ़रयाब जिलानी, सुप्रीम कोर्ट ने कभी नहीं कहा है कि 5 सदस्यीय पीठ का फ़ैसला अंतिम है और उसे स्वीकार करना ही करना है। बता दें कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड बार-बार कहता रहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फ़ैसले को स्वीकार करेगा। जब इस सम्बन्ध में जिलानी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कहा कि ये फ़ैसला अंतिम है ही नहीं। उन्होंने अनुच्छेद 137 का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें समीक्षा याचिका दायर करने का पूरा अधिकार है। जिलानी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव भी हैं। बोर्ड ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही थी।

मामले के अन्य मुस्लिम पक्षों के बारे में बात करते हुए जिलानी ने कहा कि उन्हें सभी के विचारों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मस्जिद के लिए कहीं अन्यत्र 5 एकड़ की ज़मीन देना शरीयत क़ानून के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक शरिया इस बात की अनुमति नहीं देता। ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि मुस्लिम पक्ष इस फ़ैसले को स्वीकार नहीं कर सकता। ज़फ़रयाब जिलानी को पत्रकारों ने याद दिलाया कि सोशल मीडिया पर अधिकतर मुस्लिमों ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को स्वागत किया है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जिलानी ने कहा कि देश में 20 करोड़ मुस्लिम हैं, अगर 2 लाख भी इस फ़ैसले का समर्थन करते हैं तो फ़र्क़ नहीं पड़ता।

सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड समीक्षा याचिका दायर करने के पक्ष में नहीं हैं। इस पर जिलानी ने कहा कि लोकतंत्र में सबके अलग-अलग विचार हो सकते हैं। कुछ मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने कहा था कि अगर मुस्लिम पक्ष चाहता तो काफ़ी पहले ही इस मामले को सुलझाया जा सकता है। मुस्लिम बुद्धिजीवियों के बयानों का जवाब देते हुए ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि ऐसे लोग अपने ड्राइंग रूम में बैठ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। उन्होंने दावा किया कि वो इस लड़ाई को 1986 से ही लड़ रहे हैं और वो भी पूरे ईमानदारी से।

ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी के अब्बा ने बाबरी मस्जिद का समर्थन किया था। उन्होंने बताया कि 9 दिसंबर से पहले समीक्षा याचिका दाखिल की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी वैधानिक विकल्प हैं, उन्हें आजमाया जाएगा। बता दें कि राम मंदिर मामले में में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फ़ैसला सुनाया और मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए कहीं और 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश केंद्र सरकार को दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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