Tuesday, October 19, 2021
Homeदेश-समाजकुछ लोग खुद को RTI एक्टिविस्ट कहते हैं, क्या यह पेशा है: प्रशांत भूषण...

कुछ लोग खुद को RTI एक्टिविस्ट कहते हैं, क्या यह पेशा है: प्रशांत भूषण से CJI

"हर रोज़ कोई जानकारी चाहता है और आप उनके पीछे होते हैं। इस पर किसी तरह की कोई रोक (फ़िल्टर) होनी चाहिए। ऐसे लोग जानकारी मॉंग रहे हैं जिनका उससे कोई लेना-देना नहीं होता है।"

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) एसए बोबडे का ‘पीआईएल (पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन, जनहित याचिका) कार्यकर्ताओं’ के प्रति धैर्य चुकता प्रतीत हो रहा है। पहले उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ यूनिवर्सिटी के ‘बेचारे’ छात्रों के मानवाधिकार की दुहाई देने और उन पर पुलिस की कार्रवाई की जाँच की माँग लेकर आए याचिकाकर्ताओं से कहा कि केवल छात्र होने भर से किसी को देश का कानून अपने हाथ में लेने का हक़ नहीं मिल जाता। इसके बाद उन्होंने प्रशांत भूषण को उनकी एक याचिका के लिए फटकार लगाई है

यह याचिका प्रशांत भूषण की ही एक पुरानी याचिका के बारे में थी। उस पुरानी याचिका को दायर कर प्रशांत भूषण ने आरटीआई एक्ट (सूचना के अधिकार कानून) के संबंध में राज्यों के सूचना आयुक्तों (इन्फॉर्मेशन कमिश्नरों) की नियुक्ति के बारे में सवाल उठाए थे। साथ ही उनका आरोप था कि आरटीआई एक्ट को बेवजह कमज़ोर किया जा रहा है।

इसके जवाब में एक ओर जहाँ सीजेआई ने माना कि आरटीआई को लेकर कुछ गंभीर चिंताएँ अवश्य जायज़ हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे लोग सूचनाएँ माँग रहे हैं, जिनका मामले से कोई लेना-देना ही नहीं है। भूषण के प्रति नाराज़गी का प्रदर्शन करते हुए कहा, “कुछ लोग खुद को ‘आरटीआई एक्टिविस्ट’ कहते हैं। मुझे बताइए, ये कोई व्यवसाय है क्या?”

मुख्य न्यायाधीश ने इस बात पर ज़ोर दिया कि वे सूचना के सार्वजानिक होने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इसको लेकर चिंतित हैं कि जिनका विषय से कोई लेना-देना नहीं है, वे किसी मुद्दे पर जानकारी चाहते हैं। भूषण को एक बार और सुनाते हुए उन्होंने कहा, “हर रोज़ कोई जानकारी चाहता है और आप उनके पीछे होते हैं। इस पर किसी तरह की कोई रोक (फ़िल्टर) होनी चाहिए।”

जस्टिस बोबडे ने चिंता इस बात पर भी जताई कि इस जानकारी का इस्तेमाल लोगों को ब्लैकमेल करने में हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून का कोई दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जवाब में प्रशांत भूषण ने कहा कि वे अपना दिमाग लगाएँगे इसके हल के लिए।

RTI से ऊपर नहीं CJI, पब्लिक अथॉरिटी बनना है तो पारदर्शिता ज़रूरी: रंजन गोगोई की पीठ का फैसला

RTI आवेदनों में कमी बताता है सरकार संतोषजनक काम कर रही है: गृहमंत्री अमित शाह

ट्विटर से निजी अदालत चलाने वाले प्रशांत भूषण ने स्वीकारी गलती, पर SC ने नहीं दी राहत

Bar Council के नियमों का उल्लंघन करते पकड़े गए प्रशांत भूषण, NGOs से दिया इस्तीफा

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बांग्लादेश के हमलावर मुस्लिम हुए ‘अराजक तत्व’, हिंदुओं का प्रदर्शन ‘मुस्लिम रक्षा कवच’: कट्टरपंथियों के बचाव में प्रशांत भूषण

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के नरसंहार पर चुप्पी साधे रखने के कुछ दिनों बाद, अब प्रशांत भूषण ने हमलों को अंजाम देने वाले मुस्लिमों की भूमिका को नजरअंदाज करते हुए पूरे मामले में ही लीपापोती करने उतर आए हैं।

‘हिंदी राष्ट्रभाषा है, थोड़ी-बहुत सबको आनी चाहिए’: ये कहने पर Zomato ने कर्मचारी को कंपनी से निकाला, तमिल ग्राहक ने की थी शिकायत

फ़ूड डिलीवरी कंपनी Zomato ने अपने एक कस्टमर केयर कर्मचारी को फायर कर दिया, क्योंकि उसने कहा था कि थोड़ी-बहुत हिंदी सबको आनी चाहिए।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
129,963FollowersFollow
411,000SubscribersSubscribe