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झारखंड के CM हेमंत सोरेन को राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, खुद को ही खनन पट्टा देने और मनी लॉन्ड्रिंग की हाईकोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई

खनन लीज और शेल कंपनियों में निवेश को लेकर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार (17 जून) को सुनवाई हुई। इस मामले में अब अगली सुनवाई 23 जून को होगी। यह सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी।

घोटालों और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में घिरी झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार (Jharkhand CM Hemant Soren) को सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (17 जून 2022) को झारखंड हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, गबन और खनन पट्टे में अनियमितताओं से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से रोक लगाने से इनकार कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस हिमा कोहली की खंडपीठ झारखंड उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सोरेन के खिलाफ त्वरित सुनवाई करने से रोक लगाने का आग्रह किया गया था।

झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली एकल पीठ को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनरेगा घोटाले से जुड़ा सीलबंद रिपोर्ट पेश किया था। वहीं, हाईकोर्ट ने सीबीआई को एक मामले की जाँच का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय ने शुरू में सीलबंद कवर रिपोर्ट की स्वीकृति के लिए राज्य की आपत्ति को खारिज कर दिया था।

बता देें कि हेमंत सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने राँची के अनगड़ा में खनन पट्टे के लिए आवेदन किया और अपने ही विभाग के द्वारा पर्यावरण संबंधी मंजूरी भी दे दी और अंत में खुद को खनन पट्टा आवंटित भी कर दिया।

इसके अलावा हेमंत सोरेन पर अपने रिश्तेदारों और करीबी लोगों के जरिए शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप है। इस मामले में हेमंत सोरेन के भाई एवं कई अन्य करीबी जाँच के घेरे में हैं। इसके अलावा, मनरेगा घोटाले में भी हेमंत सोरेन का नाम है। ED सोरेन के कई नजदीकी लोगों के यहाँ छापेमारी कर चुकी है।

बता दें कि खनन लीज और शेल कंपनियों में निवेश को लेकर हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में शुक्रवार (17 जून) को सुनवाई हुई। इस मामले में अब अगली सुनवाई 23 जून को होगी। यह सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी।

झारखंड सरकार ने इन दोनों मामलों से संबंधित याचिकाओं को सुनवाई योग्य नहीं माना था और कहा था कि ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं। इसलिए पर हाईकोर्ट की त्वरित सुनवाई से रोक लगाई जाए। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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