Wednesday, May 22, 2024
Homeदेश-समाजनिकाय चुनाव में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के उद्धव सरकार के फैसले पर...

निकाय चुनाव में ओबीसी को 27% आरक्षण देने के उद्धव सरकार के फैसले पर सुप्रीम रोक, कोर्ट बताया- नियमों के खिलाफ

महाराष्ट्र सरकार ने अध्यादेश लाकर निकाय चुनावों में ओबीसी कोटे को 27 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था। लेकिन राज्य सरकार के इस फैसले को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अधिसूचना को चुनौती दी थी।

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था। लेकिन राज्य सरकार के मंसूबों पर पानी फेरते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इस फैसले पर अपने अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि ओबीसी कोटे के लिए आयोग का गठन और अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का डाटा कलेक्ट किए बिना आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की सुनवाई जस्टिस एएम खानविलकर की अगुवाई वाली बेंच ने किया। इस बेंच में जस्टिस सीटी रविकुमार भी शामिल रहे। बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य चुनाव आयोग को ओबीसी रिजर्वेशन के मामले में पहले से अधिसूचित चुनाव कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ने की इजाजत नहीं मिल सकती। कोर्ट के मुताबिक, जब तक राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट नहीं करती है, अध्यादेश लाने के फैसले को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने अध्यादेश लाकर निकाय चुनावों में ओबीसी कोटे को 27 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया था। लेकिन राज्य सरकार के इस फैसले को याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अधिसूचना को चुनौती दी थी। जबकि राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट शेखर नफड़े ने दलीलें दी।

क्या है ट्रिपल टेस्ट

  1. राज्य में स्थानीय निकायों के पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थ की सख्त प्रयोगसिद्धि की जाँच के लिए कमीशन का गठन किया जाता है।
  2. आयोग की सिफारिश पर ही निकाय वार आरक्षण के अनुपात निर्दिष्ट किया जाता है। ताकि स्थित साफ हो सके।
  3. इसके अलावा किसी भी सूरत में एससी/ एसटी और ओबीसी को दिया गया आरक्षण 50 फीसदी से अधिक न हो।

क्या है महाराष्ट्र सरकार का मामला

महाराष्ट्र सरकार इसी साल मार्च के महीने में एक अध्यादेश लेकर आई, जिसे नियम विरुद्ध बताकर सर्वोच्च न्यायालय ने उस पर रोक लगी दिया था। इसके बाद उद्धव सरकार ने अपने फैसले को लागू करने के लिए अध्यादेश का सहारा लिया। (अध्यादेश अस्थाई कानून होता है)। हालाँकि कोर्ट ने उस पर भी रोक लगा दिया है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘ध्वस्त कर दिया जाएगा आश्रम, सुरक्षा दीजिए’: ममता बनर्जी के बयान के बाद महंत ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार, TMC के खिलाफ सड़क पर...

आचार्य प्रणवानंद महाराज द्वारा सन् 1917 में स्थापित BSS पिछले 107 वर्षों से जनसेवा में संलग्न है। वो बाबा गंभीरनाथ के शिष्य थे, स्वतंत्रता के आंदोलन में भी सक्रिय रहे।

‘ये दुर्घटना नहीं हत्या है’: अनीस और अश्विनी का शव घर पहुँचते ही मची चीख-पुकार, कोर्ट ने पब संचालकों को पुलिस कस्टडी में भेजा

3 लोगों को 24 मई तक के लिए हिरासत में भेज दिया गया है। इनमें Cosie रेस्टॉरेंट के मालिक प्रह्लाद भुतडा, मैनेजर सचिन काटकर और होटल Blak के मैनेजर संदीप सांगले शामिल।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -