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पाकिस्तान से आए हिंदुओं को SC से बड़ी राहत, 800+ के विस्थापन पर लगाई रोक: दिल्ली के मजनू का टीला में रहने वाले परिवारों को मिली राहत, HC ने दिया था बेदखली का आदेश

याचिका में कहा गया कि हटाने का आदेश जीने के अधिकार का उल्लंघन करता है। ये शरणार्थी पाकिस्तान में प्रताड़ना से बचकर भारत आए हैं। इनमें से कुछ को नागरिकता मिल चुकी है, बाकी प्रक्रिया में हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को दिल्ली के मजनू का टीला में रह रहे लगभग 800 पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को हटाने के आदेश पर रोक लगा दी है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने हिंदू शरणार्थियों को हटाने का आदेश जारी किया था।

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को नोटिस जारी किया है और दिल्ली हाई कोर्ट के मई 2025 में दिए गए आदेश को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है।

DDA ने मार्च और जुलाई 2024 में शरणार्थी शिविर को खाली करने के नोटिस जारी किए थे, लेकिन उस समय कार्रवाई नहीं की गई। जुलाई 2025 में फिर से नोटिस चिपकाए गए, जिससे यह अंदेशा बना कि किसी भी वक्त उनको यहाँ से हटाया जा सकता है।

यह याचिका धर्मवीर बागड़ी और अन्य लोगों द्वारा एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाई कोर्ट का आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है। यह जीने के अधिकार और सम्मान के साथ जीवन जीने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि बिना छत के इंसान की गरिमा नहीं रह सकती और यह उनके रोजगार के अधिकार को भी प्रभावित करता है।

बता दें कि ये शरणार्थी पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा प्रताड़ना से बचने के लिए भारत आए हैं। शिविर में करीब 250-260 परिवार रह रहे हैं, जिनमें से कुछ को भारतीय नागरिकता मिल चुकी है, जबकि बाकी के आवेदन प्रक्रिया में हैं। इनमें से अधिकतर लोग बहुत गरीब हैं और दिहाड़ी मजदूरी, घरेलू काम आदि करके जीवन यापन करते हैं। अधिकांश लोग अनुसूचित जातियों से आते हैं।

याचिका में कहा गया कि हाई कोर्ट ने 12 दिसंबर 2019 को लागू नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि DDA को इन शरणार्थियों के लिए वैकल्पिक आवास या पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए, क्योंकि इन्हें जबरन हटाना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

url – Supreme Court suspends the order to remove about 800 Pakistani Hindus living in the refugee camp built in Majnu Ka Tila, Delhi

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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