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जया बच्चन की सांसद निधि से चल रहे काम में घोटाला, रद्द किया गया सवा करोड़ रुपए का टेंडर: गड़बड़ी की शिकायत करने वालों में सपा MLA भी, CMO ने माँगा जवाब

सीडीओ यशवंत कुमार सिंह ने जाँच के लिए तीन अधिकारियों की टीम गठित कर दी। इस टीम की जाँच में ये मिला है कि टेंडर जारी करते समय मानकों का उल्लंघन किया गया।

समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन की सांसद निधि से होने वाले कामों में गड़बड़ी मिली है। इन कार्यों के लिए जो टेंडर जारी किया गया था, वो नियमों के हिसाब से गलत था। इसमें धाँधली की शिकायत स्थानीय सांसद रमेश चंद्र बिंद, भदोही के सपा विधायक जाहिद बेग और भाजपा जिलाध्यक्ष ने 27 नवंबर को डीएम, सीडीओ और मुख्यमंत्री कार्यालय से की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जया बच्चन की सांसद निधि से हो रहे कामों के लिए जारी किए गए टेंडन पर जब ऊपर तक शिकायत पहुँच गई, तब सीडीओ यशवंत कुमार सिंह ने जाँच के लिए तीन अधिकारियों की टीम गठित कर दी। इस टीम की जाँच में ये मिला है कि टेंडर जारी करते समय मानकों का उल्लंघन किया गया। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने टेंडर को रद्द करते समय बताया कि इसमें कई गड़बड़ियाँ थीं, जिसमें पहली ये है कि टेंडर की शर्तें स्पष्ट नहीं थीं। दूसरी गड़बड़ी ये है कि टेंडर में केवल एक ही कंपनी ने हिस्सा लिया था। तीसरी, टेंडर में शामिल कंपनी का अनुभव और योग्यता पर्याप्त नहीं थी।

अब इस मामले में मुख्यमंत्री के उप सचिव अरविंद मोहन ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर जवाब माँगा है। उन्होंने डीएम से कुछ सवाल पूछे हैं, जैसे – निविदा को रद्द करने के क्या कारण थे? क्या विभाग ने निविदा में धाँधली के आरोपों की जाँच की है? अगर हाँ, तो जाँच में क्या पता चला? इस खबर से यह बात सामने आई है कि सांसद निधियों के उपयोग में पारदर्शिता की कमी है। ऐसे मामलों में धाँधली के आरोप लगाए जाते हैं। माँग है कि सरकार को इस मामले में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए।

बता दें कि राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने एक दशक पहले भदोही को अपना नोडल जिला बनाया था। राज्यसभा सांसदों को अपने कार्यक्षेत्र को चुनने का अधिकार रहता है। इसी के तहत उन्होंने भदोही को चुना था। उन्होंने स्थानीय प्रशासन द्वारा भेजे गए सड़कों, इंटरलॉकिंग जैसे कामों को करने के लिए स्वीकृति दी थी। इसी में से इंटरलॉकिंग के लिए सवा करोड़ का टेंडर निकाला गया था। आरोप लगा कि तकनीकी कमेटी ने अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए अनियमिताताओं को अंजाम दिया। हालाँकि, अब ये टेंडर ही रद्द किया जा चुका है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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