Monday, July 26, 2021
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राम मंदिर की तुलना में दूसरे पक्ष को आवंटित 5 एकड़ भूमि पर कोई उत्साह नहीं, अभी तक नहीं हुआ बोर्ड के सदस्यों का भी गठन

फारुकी ने बताया कि बोर्ड को मिली जमीन पर मस्जिद, इंडो-इस्लामिक रिसर्च सेंटर, अस्पताल तथा लाइब्रेरी के निर्माण के सिलसिले में गठित होने वाला ट्रस्ट अभी बन नहीं पाया है। इसमें 15 सदस्य होंगे, जिनमें से अभी तक मुश्किल से 8 सदस्यों के नाम ही तय हो पाए हैं।

अयोध्या में 5 अगस्त को श्रीराम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन को लेकर पूरे देशभर के हिन्दुओं में उत्साह देखा जा रहा है वहीं, भगवान राम की नगरी अयोध्या में मस्जिद के निर्माण को लेकर किसी प्रकार की चहल-पहल नजर नहीं आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक जहाँ दूसरे पक्ष वालों द्वारा बेहद तत्परता से बाबरी के विषय को रखा गया था, वह उत्साह अब कहीं नजर नहीं आ रहा है।

हालाँकि, कई वर्षों से लंबित पड़े श्रीराम जन्मभूमि पर मालिकाना हक से जुड़े मुकदमे में दूसरे मजहब के प्रमुख पक्षकार रहे उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सरकार द्वारा पाँच एकड़ जमीन जरूर आवंटित कर दी गई है, फिर भी इससे जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा होने में समय लग रहा है।

इसके अलावा आवंटित जमीन पर मस्जिद, रिसर्च सेंटर एवं अन्य निर्माण से संबंधित फैसले लेने के लिए गठित होने वाला ट्रस्ट भी अभी तक नहीं बन पाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विषय में सुन्नी सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर अहमद फारुकी ने कहा कि सरकार ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर अयोध्या जिले में सोहावल तहसील के धुन्नीपुर गाँव में पाँच एकड़ जमीन आवंटित तो कर दी है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से औपचारिकताएँ पूरी होने में कुछ कसर बाकी रह गई है।

फारुकी ने बताया कि बोर्ड को मिली जमीन पर मस्जिद, इंडो-इस्लामिक रिसर्च सेंटर, अस्पताल तथा लाइब्रेरी के निर्माण के सिलसिले में गठित होने वाला ट्रस्ट अभी बन नहीं पाया है। इसमें 15 सदस्य होंगे, जिनमें से अभी तक मुश्किल से 8 सदस्यों के नाम ही तय हो पाए हैं।

फारुकी ने उन आठ सदस्यों के नाम भी बताने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि वो बोर्ड में सिर्फ प्रगतिशील विचारधारा के लोगों को जोड़ना चाहते हैं।

फारुकी ने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता है कि मस्जिद, इस्लामिक रिसर्च सेंटर, अस्पताल और लाइब्रेरी के निर्माण के लिए संसाधन जुटाने के मामले पर उन्हें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड या अन्य किसी प्रमुख मजहबी संगठन का सहयोग मिलेगा। उनका कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जिसमें जमीयत उलेमा ए हिंद तथा अन्य प्रमुख मुस्लिम संगठन भी शामिल हैं, ने पहले ही एलान कर दिया था कि वह बाबरी मस्जिद की कीमत पर किसी और जगह पर जमीन नहीं लेगा, जिस कारण उन्हें उम्मीद नहीं है कि उस पाँच एकड़ जमीन पर होने वाले निर्माण में इन संगठनों से कोई मदद मिल पाएगी।

गौरतलब है कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव एवं वकील जफरयाब जिलानी ने कहा था कि फैसले के कुछ बिंदुओं, खासकर जमीन देने की बात से वो अंसतुष्ट हैं और मस्जिद के लिए पाँच एकड़ की वैकल्पिक जमीन देने को लेकर कहा कि मस्जिद की कोई कीमत नहीं हो सकती।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 9 नवंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अयोध्या के विवादित स्थल पर हिन्दू आस्था के प्रतीक श्रीराम मंदिर का निर्माण करने और दूसरे मजहब को अयोध्या में ही किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद के निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन देने के आदेश दिए थे। इसके अनुपालन में सुन्नी वक्फ बोर्ड को पिछली फरवरी में अयोध्या की सोहावल तहसील स्थित धुन्नीपुर गाँव में जमीन आवंटित की गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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