Tuesday, July 23, 2024
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यति नरसिंहानंद की हत्या की साज़िश: हिन्दू बता मंदिर में घुसा काशिफ़, विपुल को बनाया साथी – सायनाइड और हथियार बरामद

दोनों युवक रात के लगभग 9 बजे मंदिर परिसर में घुसे। दोनों ने मंदिर के प्रमुख द्वार के बाहर एंट्री रजिस्टर में अपना नाम डॉक्टर विपुल विजय वर्गीय नागपुर और काशी गुप्ता के रूप में कराई।

पिछले 20 दिनों में दूसरी बार ऐसा हुआ है, जब गाजियाबाद के डासना स्थित शिव-शक्ति पीठ के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या का प्रयास किया गया। बुधवार (जून 2, 2021) को दो संदिग्ध युवक मंदिर परिसर में घुसने में कामयाब हो गए। सेवादारों को जब शक हुआ तो उन्होंने इन दोनों की तलाशी ली। इनके पास से तीन सर्जिकल ब्लेड व कुछ आपत्तिजनक दवाएँ बरामद की गई। महंत के अनुयायियों ने बताया कि ये एक घातक ड्रग ‘सायनाइड’ है।

बता दें कि किसी व्यक्ति को Cyanide दे दिया जाए तो ये ड्रग शरीर को ऑक्सीजन का उपयोग करने से रोक देता है, जिससे दिल और दिमाग काम करना बंद कर देते हैं। इससे व्यक्ति की जान भी जा सकती है। दोनों संदिग्धों को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया गया है। दोनों ने मंदिर के भीतर घुसते समय खुद को हिन्दू बताया था, लेकिन पुलिस ने उनमें से एक की पहचान काशिफ़ के रूप में की है। दोनों से पूछताछ जारी है।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर में पुलिस की तरफ से एक गार्ड की तैनाती रहती है। दोनों युवक रात के लगभग 9 बजे मंदिर परिसर में घुसे। महंत नरसिंहानंद ने आगे बताया कि दोनों ने मंदिर के प्रमुख द्वार के बाहर एंट्री रजिस्टर में अपना नाम डॉक्टर विपुल विजय वर्गीय नागपुर और काशी गुप्ता के रूप में कराई। उस समय महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती मंदिर में मौजूद नहीं थे।

वो एक चैनल के लाइव डिबेट में हिस्सा लेने के लिए गए हुए थे। उनके अनुयायी अनिल यादव ने पुलिस में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है। जिस व्यक्ति ने अपना नाम विपुल विजयवर्गीय बताया है, उसने कहा कि वो डॉक्टर है और ब्लेड का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में करता है। काशिफ़ ने पूछताछ में बताया कि विपुल से उसकी दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी और फिर फोन पर बातचीत होने लगी।

वो इस दोस्ती का मकसद नहीं बता पाया। उसने कहा कि विपुल कुछ दिनों से गाजियाबाद आया हुआ था और उसे डासना के मंदिर का दर्शन करना था, इसीलिए वो उन्हें यहाँ लेकर आया था। काशिफ़ गाजियाबाद के ही संजयनगर का रहने वाला है। महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने आरोप लगाया है कि दोनों आरोपित किसी जिहादी संगठन से सम्बन्ध रखते हैं और उन्हें उनकी हत्या के लिए भेजा गया था।

इससे पहले मई 17, 2021 को जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज के एक होटल से दबोचा था। उसके पास से भगवा कपड़ा व पूजा-पाठ की सामग्रियाँ बरामद हुई थी। जम्मू कश्मीर का ये आतंकी महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की सुपारी लेकर आया था। उसके पास से  एक पिस्टल और 2 मैगजीन के अलावा 15 कारतूस भी मिले थे। जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी आका आबिद ने उसे ट्रेनिंग देकर भेजा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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