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UP में गौशाला के नाम पर निर्मोही अखाड़े के संत से ₹28.50 लाख की ठगी, पीड़ित संत ने हासिम को 8 साल पाला था: पढ़ें- कैसे पूरी प्लानिंग के साथ गैंग ने लगाया चूना

मुजफ्फरनगर में संत विष्णुदास से गौशाला बनाने के बहाने ₹28.50 लाख ठग लिए गए। मुख्य आरोपित हासिम ने 8 साल तक आश्रम में रहकर संत का भरोसा जीता और फिर अपने गिरोह के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कर साजिश रची।

मुजफ्फरनगर में गंगा किनारे बसा पवित्र तीर्थ स्थल शुकतीर्थ। यहाँ निर्मोही अखाड़ा के आश्रम में रहने वाले संत विष्णुदास (उर्फ बच्चू सिंह) पिछले कई दशकों से गोवंश की सेवा कर रहे थे। उनके चेहरे पर अब उदासी छाई है। आश्रम के पीछे गौशाला में मवेशी चरते हैं, लेकिन संत जी का सपना था एक बड़ी गौशाला बनाने का, जो अब चूर-चूर हो गया है।

संत विष्णुदास ने हाथरस जिले की ग्राम बघना में अपनी पैतृक जमीन बेचकर अच्छी रकम जुटाई थी। उसी रकम से गौशाला का विस्तार करना चाहते थे। लेकिन 8 साल से आश्रम में रहकर गोवंश सेवा करने वाले हासिम ने उनके भरोसे का फायदा उठाकर एक अंतरराज्यीय गिरोह के साथ मिलकर 28 लाख 50 हजार रुपए की ठगी कर ली। इस मामले की FIR कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

कैसे की गई संत विष्णुदास के साथ ठगी, पढ़ें हर एक जानकारी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ठगी की कोई साधारण घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय तक की गई तैयारी का नतीजा है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि हासिम पिछले 8 साल से आश्रम में रह रहा था। संत विष्णुदास ने हाथरस में जमीन बेचने के बाद गौशाला बनाने की बात की, तो हासिम ने तुरंत योजना बनाई। हासिम ही इस गिरोह का सरगना है। उसने भोकरहेडी के अपने दोस्तों को शामिल किया।

इसके बाद इस गिरोह ने सबसे पहले फर्जी मालिक खड़ा किया- नजीर पुत्र मिर्जामान खान, निवासी ग्राम सीकरी, तहसील जानसठ। लेकिन असल में नजीर नाम का कोई व्यक्ति सीकरी में नहीं था। उसका फर्जी आधार कार्ड हरिद्वार के अब्दुल कादिर पुत्र महबूब हसन (किशनपुर जमालपुर, थाना भगवानपुर, हरिद्वार) ने बनाया। आधार पर सुखविंदर (पुत्र सोहनवीर, गाँव गादला, थाना भोपा) का फोटो चिपका दिया गया। सुखविंदर ही नजीर बनकर संत से मिला।

दिलशाद पुत्र भोंदा और फैजाब पुत्र मुन्ना (दोनों भोकरहेडी) ने संत को मुजफ्फरनगर के ग्राम सीकरी में 40 बीघा जमीन गौशाला के लिए दिखाई। फैजाब ने ही यूकेलिप्टस वाले खेत दिखाकर कहा, “यह जमीन आपके नाम हो जाएगी।” इसके बाद 17 फरवरी 2026 को ₹25 लाख और 27 फरवरी को ₹3.50 लाख आश्रम में ही हासिम और उसके साथियों ने ले लिए। बदले में 18 फरवरी 2026 को एक फर्जी ठेकानामा नोटरी से बनवाकर दे दिया गया। इस दौरान फर्जी पटवारी रितेश ने 26 हजार रुपये लेकर ठेकानामा तैयार किया और फिर उनके सामने ही जमीन की नाप-जोख भी की, ताकि उन्हें पूरा भरोसा हो जाए।

सीकरी गाँव पहुँचने पर हुआ ठगी का खुलासा

जब संत विष्णुदास 40 बीघा जमीन की देखभाल के लिए सीकरी पहुँचे तो वहाँ मौराद नाम का व्यक्ति पानी चला रहा था। उसने बताया, “हमने यह जमीन 15 दिन पहले खरीदकर बैनामा करवा लिया है। यहाँ नजीर नाम का कोई नहीं रहता।” जिसके बाद संत विष्णुदास के पैरों तले जमीन खिसक गई और फिर उन्हें अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ।

FIR की कॉपी

पुलिस ने सिर्फ 24 घंटे में कर दिया गिरोह का भंडाफोड़

संत विष्णुदास ने बुधवार (18 मार्च 2026) को भोपा थाने पहुँचकर अपनी तहरीर दर्ज कराई। थाना प्रभारी जसवीर सिंह ने मामले की गंभीरता समझते हुए तुरंत एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित कर दी। इस टीम ने सबसे पहले एफआईआर में दिए गए तीन अहम मोबाइल नंबर्स, जिसमें हासिम का 86792XXXXX, फर्जी नजीर का 74090XXXXX और फर्जी पटवारी रितेश का 70553XXXXX की सीडीआर और टावर लोकेशन निकाली। तकनीकी विश्लेषण में पता चला कि सभी आरोपी पिछले 48 घंटे से लगातार एक-दूसरे से संपर्क में थे और उनकी लोकेशन तुगलकपुर रोड के एक सुनसान मुर्गा फार्म की ओर इशारा कर रही थी। टीम ने बिना देरी किए रात में ही सर्विलांस शुरू कर दिया।

गुरुवार (19 मार्च 2026) की सुबह ठीक 5 बजे पुलिस की टीम ने मुर्गा फार्म को चारों तरफ से घेर लिया। अचानक छापेमारी शुरू हो गई, जिसकी वजह से सभी आरोपित सोते ही रह गए और उन्हें भागने का कोई मौका नहीं मिला। इस छापेमारी में पुलिस ने मास्टरमाइंड हासिम के साथ ही प्रवीन, दिलशाद, सुखविंदर, फैजाब, रवीश और अब्दुल कादिर को गिरफ्तार कर लिया।

छापे के दौरान पुलिस को 22 लाख रुपये नकद, दो फर्जी आधार कार्ड (नजीर और रितेश के नाम), कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, नोटरी के कागजात, फर्जी दस्तावेजों के प्रिंटआउट और ठगी में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड बरामद हुए। इस मामले में एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर इसका खुलासा किया।

थाना प्रभारी जसवीर सिंह ने बताया कि पूछताछ जारी है और शेष रकम की बरामदगी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। मात्र 24 घंटे में इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश न सिर्फ संत विष्णुदास के लिए न्याय है, बल्कि ऐसी ठगी की भविष्य में रोकथाम का भी संदेश है।

पूरे गिरोह के बारे में जान लीजिए, जो हुए हैं गिरफ्तार

हासिम पुत्र माँगा (नई बस्ती भोकरहेडी): सरगना, 8 साल आश्रम में घुसा।
प्रवीन पुत्र भंवर सिंह (कलालान भोकरहेडी): एमए डबल, सिविल सर्विस तैयारी, प्लानिंग।
दिलशाद पुत्र भोंदा (भोकरहेडी): जमीन दिखाने वाला।
सुखविंदर पुत्र सोहनवीर (गादला): फर्जी नजीर, अपना फोटो आधार पर।
फैजाब पुत्र इस्माइल उर्फ मुन्ना(भोकरहेडी): जमीन दिखाने और साथी।
रवीश पुत्र सुभाष (भोकरहेडी): फर्जी पटवारी रितेश (सारसवा), नपाई की।
अब्दुल कादिर पुत्र महबूब हसन (किशनपुर जमालपुर, हरिद्वार): फर्जी आधार बनाने वाला।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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