विदेश से आए 18 मुसलमान बिजनौर में भड़का रहे थे युवाओं को, यूपी पुलिस ने भगाया अपने देश

जिन 18 विदेशी मुस्लिमों को अपने देश भेजा गया है, उनमें 6 मलेशिया के थे, 7 म्यांमार के थे और 5 इंडोनेशिया के थे। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर लेकर भारत आ गए थे और यहाँ मजहबी कट्टरता फैला रहे थे।

कमलेश तिवारी हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश के बिजनौर से 2 मौलानाओं को गिरफ़्तार किया गया है। जैसा कि ख़बरों में भी आ चुका है, उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाते हुए खुले तौर पर तिवारी की हत्या की धमकी दी थी। अब बिजनौर में इस्लामिक कट्टरवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने कड़ा क़दम उठाया है। बिजनौर की मस्जिदों में कई ऐसे विदेशी मुस्लिम आकर रह रहे थे, जो इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में लगे हुए थे। प्रशासन ने इन सबको वापस इनके देश भगा दिया है। यूपी सरकार के आदेश पर ये कार्रवाई की गई है।

केंद्र सरकार भी भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को लेकर सख्त है और उसी दिशा में एनआरसी लाया गया है। हालाँकि, इसे उत्तर-पूर्व के अलावा अभी भारत के अन्य राज्यों में लागू नहीं किया गया है और दिल्ली, यूपी और बंगाल में भी इसे लाने की माँग उठती रही है। जिन 18 विदेशी मुस्लिमों को अपने देश भेजा गया है, उनमें 6 मलेशिया के थे, 7 म्यांमार के थे और 5 इंडोनेशिया के थे। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आ गए थे और यहाँ मजहबी कट्टरता फैला रहे थे। सूचना मिली थी कि किरतपुर के मोहल्ला काजीयान में 11 विदेशी मुस्लिम और नजीबाबाद के पठानपुरा की मरकज़ मस्ज़िद में 7 विदेशी मुस्लिम जमात के नाम पर रुके थे।

कोतवाली शहर के मुस्तफाबाद गाँव में भी इंडोनेशिया से आए कुछ लोग मजहबी प्रचार-प्रसार करते मिले थे। एसपी संजीव त्यागी ने साफ़ कर दिया है कि अगर टूरिस्ट वीजा पर यहाँ आए किसी भी विदेशी द्वारा मजहबी प्रचार-प्रसार करने की सूचना मिली तो उन्हें निकाल बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके ख़िलाफ़ पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। ये सभी विदेशी मुस्लिम स्थानीय युवकों को मजहब के नाम पर भड़काने का काम करते थे।

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इससे पहले थाईलैंड के 13 मुस्लिम बिजनौर के मृदगान मोहल्ला में स्थित जामा मस्जिद में संदिग्ध इस्लामिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे। वो सभी मजहबी बैठकों में भाग ले रहे थे और अपने मजहब का प्रचार-प्रसार में लगे हुए थे। बिजनौर पुलिस ने वीजा नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई भी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा लेकर मजहबी गतिविधियों में भाग नहीं ले सकता। इस सम्बन्ध में मस्जिद प्रशासन से भी रिपोर्ट माँगी गई है।

लोकल इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई और फिर इन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई। इस मामले में केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों को भी रिपोर्ट सौंपी गई है। इससे पहले जो विदेशी इन मजहबी क्रियाकलापों में संलग्न थे, उनसे स्पष्टीकरण भी माँगा गया था।

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