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₹1 लाख का लोन, कोरोना के कारण 2 किश्त मिस: दरवाजे तक पहुँचे रिकवरी एजेंट, ‘अपमान’ के बाद लगाई फाँसी

"मैंने उनसे कुछ और दिन की मोहलत देने की भीख माँगी, लेकिन वे नहीं माने। वे यह कहते हुए घर के बाहर बैठ गए कि बकाया राशि लिए बिना नहीं जाएँगे। मेरे पति को इतना अपमान महसूस हुआ कि उन्होंने खुद को मार डाला।"

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बिंदुपारा गाँव में एक प्लंबर ने समय पर ईएमआई ना दे पाने के कारण कलेक्शन एजेंटों द्वारा अपमानित करने के बाद फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। किश्तों की वसूली के लिए निजी फाइनेंस कंपनी के एजेंट गाँव में आकर उसके घर के सामने बैठ गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक साधन (40 वर्ष) ने इसी साल जनवरी में बाइक खरीदने के लिए एक लाख रुपए का लोन लिया था।

टेलीग्राफ की खबर के मुताबिक, कोरोना के कारण मृतक साधन सिन्हा मई और जून महीने के कुल 6,800 रुपए की किश्त नहीं जमा कर पाया था। मृतक के परिवार में पत्नी और दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 18 साल और 15 साल है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साधन सिन्हा ने महीने में 15,000-20,000 रुपए कमाए थे। हालाँकि, कोरोना की लहर को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उनकी कमाई काफी कम हो गई थी। मृतक प्लंबर के परिवार ने बताया कि साधन ने बाइक खरीदने के लिए इसलिए कर्ज लिया था, ताकि उन्हें और अधिक काम मिल सके। लेकिन बीते दो महीने से वो गाड़ी की किश्त नहीं चुका पाए थे।

साधन की पत्नी ममोनी ने कहा कि एक प्राइवेट कंपनी के रिकवरी एजेंट मंगलवार (22 जून 2021) को सुबह करीब 9 बजे उसके घर आ गए और बकाया राशि को तुरंत चुकाने के बात कहते हुए वहीं बैठ गए। ममोनी ने कहा, “मैंने उनसे कुछ और दिन की मोहलत देने की भीख माँगी, लेकिन वे नहीं माने। वे यह कहते हुए घर के बाहर बैठ गए कि वे बकाया राशि लिए बिना नहीं जाएँगे। मेरे पति को इतना अपमान महसूस हुआ कि उन्होंने खुद को मार डाला।”

अपमान नहीं सह पाया

साधन के पड़ोसियों का कहना है कि वह गाँव में काफी पसंद किया जाता था। इसी कारण शायद वह एजेंटों की हरकतों को बर्दाश्त नहीं कर सकता था। ममोनी ने कहा कि एजेंटों के घर के बाहर बैठने के बाद साधन ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। जब वह उन्हें ढूंढने गई तो देखा कि बेडरूम का दरवाजा बंद है। खिड़की से देखा तो वो पंखे से लटके हुए थे। गाँव के लोगों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें निकाला और समसेरगंज अस्पताल ले गए जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि कोरोना संकट को देखते हुए आरबीआई ने पिछले महीने (मई 2021) में नागरिकों, छोटे व्यवसायों, स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और वैक्सीन निर्माताओं को महामारी की दूसरी लहर से निपटने में मदद करने के लिए कई राहत उपायों की घोषणा की थी।

इस के तहत केंद्रीय बैंक ने मार्च 2021 तक अपने कर्ज को जमा करने वालों को राहत देने का आदेश बैंकों और वित्तीय संस्थानों को दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, साधन फिर से कर्ज ले सकने के लिए योग्य था, क्योंकि उसने अप्रैल तक अपनी ईएमआई चुकाई थी। लेकिन शायद वो आरबीआई के नियमों के बारे में नहीं जानता था।

जंगीपुर के एसपी ने वाई रघुवंशी ने बताया है कि साधन सिन्हा के बड़े बेटे राणा ने बुधवार (23 जून 2021) को उनकी मौत के बाद पुलिस में कलेक्शन एजेंटों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया है। आईपीसी 306 के तहत केस दर्ज किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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