Tuesday, January 26, 2021
Home देश-समाज क्या मुस्लिमों के ख़िलाफ़ है NRC? प्रपंचियों के फैलाए अफवाहों से बचने के लिए...

क्या मुस्लिमों के ख़िलाफ़ है NRC? प्रपंचियों के फैलाए अफवाहों से बचने के लिए जानें सच्चाई

यह पहली बार नहीं है कि भारत के किसी राज्य में NRC तैयार हुआ है। दरअसल इससे पहले भी असम में 1951 में NRC तैयार किया जा चुका है जो स्वतंत्रता के बाद पहली बार जनगणना पर आधारित था। उसके बाद वर्ष 1971 में.....

NRC को लेकर कई तरह के कनफ्यूजन हैं मसलन, क्या समुदाय विशेष के प्रति जानबूझकर यह षड्यंत्र रचा जा रहा है? क्या पहले NRC फिर CAB लाकर बीजेपी की सरकार भारत से कथित अल्पसंख्यकों को निकाल देना चाहती है? क्या यहाँ रह रहे सारे मुस्लिमों से उनकी नागरिकता का प्रमाण माँगा जायेगा? क्या पहली बार ऐसा हो रहा है? तो ये लेख NRC से जुड़े ऐसे ही सवालों के बारे में है।

NRC अर्थात National Register of Citizens जिसका हिंदी मतलब होता है- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर, ऐसा रजिस्टर जिसमें राष्ट्र के वैध नागरिकों का ब्यौरा दर्ज होता। अब प्रश्न ये है कि इसकी ज़रूरत क्यों है? आज के समय में विश्व के अधिकांश देश लोक कल्याणकारी देश हैं, जो अपने नागरिकों को कुछ मूलभूत सुविधाएँ देते हैं जिससे उनका जीवन स्तर को बेहतर होता है, उन्हें मानवोचित अधिकार मिलता है, संसाधनों का बँटवारा न्यायोचित ढंग से होता है। अत: एक राष्ट्र के पास उसके नागरिकों का ब्यौरा होना जरूरी है।

इसे यूँ समझिए कि आप एक पार्टी दे रहे हैं, जिसमें आपने 50 लोगों को न्योता दिया है लेकिन खाने के टाइम आस-पास के 50 लोग और आ जाएँ, जो बाखुशी अपने भोजन का इंतजाम कर सकते है तो आप क्या करेंगे? आप या तो अपने पास मौजूद 50 लोगों के राशन में से उन्हें खाना देंगे या आप अपनी लिस्ट से उपस्थित लोगों को मिलाएँगे और नाम मैच न करने पर उनलोगों को सादर विदा करेंगे। बस एक राष्ट्र की भी यही समस्या होती है और इसी समस्या के समाधान के लिए भारत में भी NRC तैयार हो रही है।

यह पहली बार नहीं है कि भारत के किसी राज्य में NRC तैयार हुआ है। दरअसल इससे पहले भी असम में 1951 में NRC तैयार किया जा चुका है जो स्वतंत्रता के बाद पहली बार जनगणना पर आधारित था। उसके बाद वर्ष 1971 में पश्चिमी पाकिस्तान एवं पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के बीच युद्ध होने के कारण हजारों की संख्या में शरणार्थी भारत आने लगे जिस कारण भारत को भी युद्ध में भाग लेना पड़ा और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। बांग्लादेश के स्वतंत्र होने के बाद कुछ शरणार्थी तो वापस गए लेकिन कुछ शरणार्थी यहीं रह गए और तब फिर से एक बार NRC को अपडेट करने की ज़रूरत महसूस हुई। लेकिन, ये काम सरकार को उसी वक्त करना चाहिए था जो तब की इंदिरा गाँधी और उनके बाद राजीव गाँधी की सरकार ने नहीं किया।

परेशानी तब और अधिक बढ़ने लगी जब नवनिर्मित बांग्लादेश से शरणार्थियों के रूप में अवैध प्रवासियों की संख्या में वृद्धि आने लगी जिसे लेकर ‘ऑल असम स्टूडेंट यूनियन’ और ‘ऑल असम गण संग्राम परिषद्’ के नेतृत्व में असमिया संस्कृति और पहचान की रक्षा के लिए जनांदोलन शुरू हुआ जिसे ‘असम आंदोलन’ के नाम से जाना गया। लगभग छह वर्ष तक चले इस आंदोलन की परिणिति ‘असम समझोते’ के रूप में सामने आया जो 15 अगस्त,1985 को राजीव गाँधी और असम के नेताओं के बीच हुआ।

इस समझौते में दो जो सबसे जरूरी बात थी, पहली कि 25 मार्च, 1971 को या इसके बाद असम में प्रवेश लेने वाले सभी विदेशियों की पहचान कर उन्हें देश से बहार किया जाएगा और दूसरी यह कि असम की संस्कृति और पहचान को बरकरार रखने के लिए सरकार द्वारा प्रयास किया जायेगा। और आज इस समझौते के 34 साल के बाद इसके प्रमुख शर्त को पूरा करने के लिए NRC को अपडेट किया गया है। अगर इस समझौते की शर्त उस वक़्त पूरी कर दी जाती तो न तो उसमे इतनी परेशानी आती न ही इतना कनफ्यूजन। इस चीज तब क्यों नहीं हो पाई इसका जवाब तब सत्ता में रही पार्टी ही दे सकती है कि वो कौन से कारण रहे जो काम उस वक़्त होना चाहिए था वो अब हो रहा है? आखिर कौन सा लालच था? क्या मंशा थी?

अब अगले सवाल पर आइए कि क्या किसी ख़ास समुदाय के खिलाफ यह षडयंत्र रचा जा रहा है? क्या पहले NRC बीजेपी की सरकार मजहब विशेष को निकाल देना चाहती है? क्या यहाँ रह रहे सारे मुस्लिमों से उनकी नागरिकता का प्रमाण माँगा जाएगा?

तो इसका जवाब है कि NRC का किसी भी जाति-धर्म से कोई सम्बन्ध नहीं है, ना ही इसका संबंध भारत के अन्य भागों में रह रहे मुस्लिमों से है। इनफेक्ट इसका संबंध असम के वैध नागरिक मुस्लिमों से भी नहीं है।

इसे तो 2014 में ‘असम सम्मलित महासंघ एवं अन्य बनाम भारत सरकार एवं अन्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय के बाद राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू हुई। पिछले साल जुलाई में NRC का अंतिम अपडेटेड ड्राफ्ट आया जिसमें 40 लाख लोगों के नाम नहीं पाए गए थे और उन्हें बाद में असम में उनका स्थायी निवास सिद्ध करने के लिए समय दिया गया। नागरिकता सिद्ध करने की प्रक्रिया में इस रजिस्टर में वे सभी लोग (या उनके वंशज) शामिल किये गये हैं जिनके नाम 1951 में जारी किये गए असम NRC या 24 मार्च, 1971 की मध्य रात्रि तक जारी किये गए किसी भी अन्य स्वीकार्य दस्तावेज में शामिल थे।

इन सारे नामों के आँकड़ों को ‘लिगेसी डाटा’ कहा जाता है। सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 31, दिसम्बर 2019 को NRC की अंतिम सूची जारी की गई जिसमें सूची से बाहर रहे लोगों की संख्या 40 लाख से घटकर 19,06,657 हो गयी। अब चूँकि “नागरिकता“ संघ सूचि का विषय है इसलिए NRC के लिए फंडिंग और गाइडलाइंस केंद्र सरकार देती है लेकिन काम राज्य सरकार द्वारा किया जाता है और पूर्वोत्तर में इसे सबसे पहले लागू करने की एक सबसे बड़ी वजह ये है कि सबसे ज्यादा अवैध प्रवासी बांग्लादेश से पूर्वोत्तर के रास्ते ही भारत में घुसते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह कि NRC का अपडेशन नागरिक अधिनियम,1995, 2003 और इसमें 2009, 2010 में हुए संशोधन के अनुसार पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए किया गया है। अब मुझे ये बताया जाए कि इसमें कहाँ मुस्लिमों के लिए दिक्कत आ रही है? कहाँ उन्हें टारगेट किया का रहा है? कहाँ उनके प्रति कोई दुर्भावना है? ये तो सिर्फ अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने कि प्रक्रिया है ताकि देश के वैध नागरिक को देश के संसाधन पर उचित अधिकार मिल सके।

अगले सवाल पर आते हैं कि NRC से बाहर हुए लोगों का क्या होगा? भारत का रिकॉर्ड आज तक बेहतरीन रहा है। ना तो भारत ने कभी किसी पर पहले हमला किया, ना ही भारत ने कभी अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न किया, जिससे यहाँ के अल्पसंख्यकों को किसी और देश में शरण लेने की जरूरत हो और आज भी भारत ऐसा कुछ नहीं करने जा रहा है। हालाँकि, ये 19 लाख लोग दिए गए समय में सबूत नहीं दे पाए कि वो असम के नागरिक हैं फिर भी उन्हें और समय दिया जा रहा है। उनके सामने और भी रास्ते खुले हुए हैं, जैसे- NRC से बाहर हुए लोग पहले विदेशी अधिकरण के सामने अपील करेंगे, बताते चले कि इसके लिए आलरेडी 300 अधिकरण काम कर रहे हैं और जरूरत के अनुसार लगभग 400 अधिकरण के गठन पर बात चल रही है।

वहाँ भी ये लोग अगर अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सके तो फिर इन लोगों के लिए पहले हाईकोर्ट फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खुला हुआ है। जब सारी कानूनी प्रक्रिया से गुज़रने के बाद भी इन 19 लाख लोगों में से जो अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएँगे, उन्हें भारत अपने यहां क्यों रखे? ये सबसे बड़ा सवाल है। क्यों भारत अपने नागरिकों का हक मारकर किसी और देश के नागरिकों को परोस दे? भारत ना तो इतना विकसित हुआ है कि इतने लोगों को बेवजह पालता रहे ना ही भारत नागरिकों का हक मारना उचित है।

ये बता दें कि 19,06,657 लोगों में लगभग 14 लाख लोग हिन्दू धर्म से हैं और करीब 5 लाख लोग मुस्लिम धर्म के, जो कि बांग्लादेश के बहुसंख्यकों का धर्म है। अब बताइए कि इसमें कहाँ क्या गलत हो गया भारत के मुस्लिमों के साथ? छद्म बुद्धिजीवी, धूर्त वामपंथी, कट्टरपंथी, और हिन्दू-मुस्लिम की राजनीति से घर चलाने वाले लोगों ने ये चरस बोया कि “ओ जी ये तो मुस्लिम विरोधी है, संविधान की हत्या है, धार्मिक आधार पर पर है NRC के साथ CAB लाकर ये मुस्लिमों को निकाल देंगे देश से, बीजेपी तो हिन्दुओं कि पार्टी है, ये देश तोड़ रहे हैं ब्ला ब्ला ब्ला…”।

तो अब आते हैं CAB यानी नागरिकता संशोधन विधेयक पर। सबसे पहले NRC और CAB का आपस में कोई संबंध है ही नहीं। NRC पहले से चलता आ रहा है जिसका जिक्र ऊपर किया जा चुका है और इसमें नागरिकता संशोधन विधेयक का जिक्र तक कहीं नहीं है।

मुझे वाकई नहीं समझ आ रहा कि NRC का विरोध क्यों किया का रहा है? मुझे ये दिख रहा है कि जिस काम को असम समझौते के तहत 1985 के बाद जितनी जल्दी संभव हो इतनी जल्दी होना चाहिए था उस काम को होने में 34 वर्ष लग गए। मुझे ये दिख रहा है कि त्रिपुरा में बांग्लादेशी घुसपैठिए इतनी संख्या में आए कि वहाँ के मूल आदिवासी वहाँ अल्पसंख्यक हो गए और बांग्लादेशी घुसपैठिए उनके हिस्से के संसाधन, उनके हिस्से की सरकार पर कुंडली मारे बैठे हैं।

ये दिख रहा है कि कुछ लोग कैसे अपनी राजनीति की रोटी सेंकने के लिए इस मुद्दे को जबरदस्ती हवा में उछाल रहे हैं और लोगों को भड़काने कि कोशिश में लगे हुए हैं। हर जगह हिंसा को उकसा रहे हैं और सक्रिय रूप से हिंसा में शामिल भी हो रहे हैं। क्या हिंसा का सहारा लेकर, तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश करना संवैधानिक है? क्या संविधान और नियमों के अनुसार करीब चार दशक पुरानी समस्याओं को ठीक करना असंवैधानिक है? इसका फैसला इस लेख को पढ़ने वाले करें।

नोट- यह लेख नेहा चौधरी ने लिखा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsNRC

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

DTC बस को तोड़ा, तलवारबाजी करते बढ़ रहे… पुलिस को धकियाते-रगेदते संसद और लाल किला की ओर ‘किसान’

घटना की वीडियो भी है। वीडियो में देख सकते हैं कि डीटीसी बस पर भारी भीड़ ने हमला किया है। उसे गिराकर तोड़ने का प्रयास हो रहा है।

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

गणतंत्र दिवस 2021: सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति के साथ खास पगड़ी में PM… और महिला कमांडर प्रीति – परेड की तस्वीरें

गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामनगर से एक विशेष पगड़ी पहनी। बलिदानी सैनिकों को दी श्रद्धांजलि।

3 बॉर्डर पर बैरीकेडिंग तोड़ ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों की भीड़ दिल्ली में घुसी, मुकरबा चौक पर तनावपूर्ण माहौल

वीडियो में देख सकते हैं कि भारी तादाद में 'किसान' बैरीकेडिंग के पार खड़े होते हैं, फिर धीरे-धीरे उस पर चढ़ना शुरू कर देते हैं और...

झील जम गई… लेकिन तिरंगे के साथ कदम मिलते रहे: देखिए गणतंत्र दिवस 2021 की मजेदार तस्वीरें

यहाँ हम आपको गणतंत्र दिवस 2021 की देश भर की तस्वीरें दिखा रहे हैं, अलग-अलग कोने से। देश भर में कई जगहों पर तिरंगा फहराया गया।

जिन्होंने बाबरी मस्जिद के नीचे खोजा राम मंदिर, वैज्ञानिक तरीके से ढूँढा पांडवों का इंद्रप्रस्थ… मिला पद्म विभूषण सम्मान

जिन 7 लोगों को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए चुना गया है, उनमें प्रोफेसर ब्रज बासी लाल (BB Lal) का नाम भी शामिल है।

प्रचलित ख़बरें

12 साल की लड़की का स्तन दबाया, महिला जज ने कहा – ‘नहीं है यौन शोषण’: बॉम्बे HC का मामला

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने शारीरिक संपर्क या ‘यौन शोषण के इरादे से किया गया शरीर से शरीर का स्पर्श’ (स्किन टू स्किन) के आधार पर...

राहुल गाँधी बोले- किसान मजबूत होते तो सेना की जरूरत नहीं होती… अनुवादक मोहम्मद इमरान बेहोश हो गए

इरोड में राहुल गाँधी के अंग्रेजी भाषण का तमिल में अनुवाद करने वाले प्रोफेसर मोहम्मद इमरान मंच पर ही बेहोश होकर गिर पड़े।

छठी बीवी ने सेक्स से किया इनकार तो 7वीं की खोज में निकला 63 साल का अयूब: कई बीमारियों से है पीड़ित, FIR दर्ज

गुजरात में अयूब देगिया की छठी बीवी ने उसके साथ सेक्स करने से इनकार कर दिया, जब उसे पता चला कि उसके शौहर की पहले से ही 5 बीवियाँ हैं।

15 साल छोटी हिन्दू से निकाह कर परवीन बनाया, अब ‘लव जिहाद’ विरोधी कानून को ‘तमाशा’ बता रहे नसीरुद्दीन शाह

नसरुद्दीन शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 'लव जिहाद' को लेकर तमाशा चल रहा है। कहा कि लोगों को 'जिहाद' का सही अर्थ ही नहीं पता है।

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

RSS को ‘निकरवाला’ बोला राहुल गाँधी ने, ‘लिकरवाला’ सुन जनता हुई ‘मस्त’: इस लेटेस्ट Video में है बहुत मजा

राहुल गाँधी जब बोलते हैं, बहुत मजा देते हैं। उनके मजे देने वाले वीडियो आप खोजेंगे 1 मिलेंगे 11... अब एक और वीडियो जुड़ गया है, एकदम लेटेस्ट।
- विज्ञापन -

 

DTC बस को तोड़ा, तलवारबाजी करते बढ़ रहे… पुलिस को धकियाते-रगेदते संसद और लाल किला की ओर ‘किसान’

घटना की वीडियो भी है। वीडियो में देख सकते हैं कि डीटीसी बस पर भारी भीड़ ने हमला किया है। उसे गिराकर तोड़ने का प्रयास हो रहा है।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

क्रीम-पाउडर बेचने वाली प्रियंका चोपड़ा को अब पछतावा, हॉलीवुड में पहचान बनाए रखने की मजबूरी या ‘दिवाली-सिगरेट’?

प्रियंका चोपड़ा एक बार फिर चर्चा में आई हैं। इस बार मुद्दा फेयरनेस क्रीम है। प्रियंका को पछतावा है कि उन्होंने भारत में फेयरनेस क्रीम के ऐड किए।

गणतंत्र दिवस 2021: सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति के साथ खास पगड़ी में PM… और महिला कमांडर प्रीति – परेड की तस्वीरें

गणतंत्र दिवस के मौके पर राजपथ पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामनगर से एक विशेष पगड़ी पहनी। बलिदानी सैनिकों को दी श्रद्धांजलि।

3 बॉर्डर पर बैरीकेडिंग तोड़ ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों की भीड़ दिल्ली में घुसी, मुकरबा चौक पर तनावपूर्ण माहौल

वीडियो में देख सकते हैं कि भारी तादाद में 'किसान' बैरीकेडिंग के पार खड़े होते हैं, फिर धीरे-धीरे उस पर चढ़ना शुरू कर देते हैं और...

झील जम गई… लेकिन तिरंगे के साथ कदम मिलते रहे: देखिए गणतंत्र दिवस 2021 की मजेदार तस्वीरें

यहाँ हम आपको गणतंत्र दिवस 2021 की देश भर की तस्वीरें दिखा रहे हैं, अलग-अलग कोने से। देश भर में कई जगहों पर तिरंगा फहराया गया।

जिन्होंने बाबरी मस्जिद के नीचे खोजा राम मंदिर, वैज्ञानिक तरीके से ढूँढा पांडवों का इंद्रप्रस्थ… मिला पद्म विभूषण सम्मान

जिन 7 लोगों को देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण के लिए चुना गया है, उनमें प्रोफेसर ब्रज बासी लाल (BB Lal) का नाम भी शामिल है।

आधी मूँछ में खेलने उतरेंगे अश्विन, पुजारा ने जो ऑस्ट्रेलिया में नहीं किया… अगर इंग्लैंड के खिलाफ कर देंगे तो!

पुजारा को अश्विन ने इंग्लैंड के खिलाफ किसी भी स्पिनर पर क्रिज से निकल आगे बढ़ कर उड़ा कर शॉट खेलने का चैलेंज दिया है। चैलेंज खुद भी लिया है।

TikTok और UC Browser समेत 59 चाइनीज एप्स पर परमानेंट बैन, सरकार के सवालों का नहीं दे पाए जवाब!

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (MeitY) मंत्रालय ने TikTok व 58 अन्य चीनी एप्स को हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe