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ध्रुव राठी के एआई ऐप ‘AI Fiesta’ पर डेटा चोरी को यूट्यूबर ने किया एक्सपोज तो उन्हें जर्मनी के नंबर से आया कॉल: वीडियो डिलीट करने की दी धमकी, जानिए पूरा मामला

अनुभव गुप्ता ने बताया कि उन्हें यह कॉल तब आई, जब उन्होंने एक वीडियो के जरिए कुछ गंभीर आरोप लगाए थे। अनुभव के मुताबिक, फोन कॉल जर्मनी के कंट्री कोड वाले नंबर से आई थी। उन्होंने उस नंबर को पब्लिक कर दिया और वीडियो हटाने की माँग मानने से साफ इनकार कर दिया।

यूट्यूबर अनुभव गुप्ता ने 7 जनवरी को X (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए खुलासा किया कि उन्हें एक धमकी भरा कॉल आया है, जिसमें उनसे ध्रुव राठी और उनके AI ऐप ‘AI Fiesta’ के खिलाफ बनाया गया ‘एक्स्पोज वीडियो’ हटाने को कहा गया। 22 दिसंबर को पब्लिश किए गए इस वीडियो में गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाए थे कि राठी बड़े पैमाने पर डेटा प्राइवेसी का उल्लंघन कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने इस ऐप से जुड़ी मार्केटिंग और बिजनेस करने के तरीकों को भी भ्रामक और संदिग्ध बताया था।

गुप्ता के अनुसार, उन्हें यह कॉल तब आई जब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। अनुभव गुप्ता ने बताया कि फोन करने वाले ने उनसे वीडियो हटाने की माँग की। गुप्ता ने उस फोन नंबर का भी ज़िक्र किया जिससे उन्हें कॉल आया था, जिसमें जर्मनी का कंट्री कोड (+49) लगा हुआ था। X पर उस नंबर को शेयर करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस कॉल का मकसद उन्हें डरा-धमकाकर वीडियो डिलीट करवाना था, जबकि उनका कहना है कि वीडियो में दी गई जानकारी पूरी तरह से ऐप से जुड़ी पब्लिक पॉलिसी और डॉक्यूमेंट्स पर आधारित है।

अपनी पोस्ट में अनुभव गुप्ता ने लिखा, “मेरा वीडियो हटाने के लिए मुझे एक धमकी भरा कॉल आया है, जिसमें मैंने बताया था कि कैसे ध्रुव राठी आपका डेटा चुरा रहे हैं। मैं इसे नहीं हटाऊँगा ‘जर्मन शेफर्ड’।” उनके इस बयान को उनके फॉलोअर्स ने काफी सपोर्ट किया और सिर्फ X पर ही इसे 450 से ज्यादा बार रीपोस्ट और 2,000 से अधिक लाइक्स मिले।

अनुभव गुप्ता ने AI Fiesta के बारे में क्या बताया?

22 दिसंबर के अपने वीडियो में अनुभव गुप्ता ने बताया कि ‘AI Fiesta’ न केवल यूजर्स के प्रॉम्प्ट्स (सवालों) को स्टोर करता है, बल्कि AI के जरिए दिए गए जवाबों को भी सेव करता है। उनका कहना था कि इस तरीके से यूज़र्स द्वारा डाली गई बेहद निजी, राजनीतिक और संवेदनशील जानकारी कंपनी के पास सुरक्षित रह सकती है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आमतौर पर लोग वेबसाइट्स या ऐप्स का इस्तेमाल करते समय उनकी प्राइवेसी पॉलिसी और टर्म्स एंड कंडीशंस नहीं पढ़ते। यूज़र्स अक्सर बिना सोचे-समझे इन शर्तों पर सहमति दे देते हैं और आगे बढ़ जाते हैं, उन्हें इसके संभावित नतीजों का अंदाजा भी नहीं होता।

अनुभव गुप्ता ने कहा कि डेटा को स्टोर करने की यह बात ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी में साफ तौर पर लिखी गई है, जो यूजर्स की सुरक्षा और उनकी मर्जी (इंफॉर्म्ड कंसेंट) पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इस मामले में ऑपइंडिया ने जब खुद जाँच की, तो उन्होंने पुष्टि की कि AI Fiesta की प्राइवेसी पॉलिसी में बिल्कुल वही बातें लिखी हैं जिनका दावा अनुभव गुप्ता ने अपने वीडियो में किया है।

स्रोत: AI Fiesta

अनुभव गुप्ता ने आगे बताया कि यह ऐप यूजर्स के IP एड्रेस और ‘डिवाइस इंफॉर्मेशन’ जैसी जानकारी इकट्ठा करता है। उनका तर्क है कि ‘डिवाइस इंफॉर्मेशन’ एक बहुत ही धुंधला और गोल-मोल शब्द है, जिसका इस्तेमाल जानबूझकर किया गया है ताकि यूजर्स की हरकतों (बिहेवियरल ट्रैकिंग) और उनकी लोकेशन पर बारीकी से नजर रखी जा सके।

अनुभव गुप्ता ने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर ऐसा डेटा लीक होता है या गलत हाथों में पड़ता है, तो यूजर्स फिशिंग, प्रोफाइलिंग या टारगेटेड मैनिपुलेशन (सोच-समझकर की जाने वाली हेरफेर) का शिकार हो सकते हैं।

गुमराह करने वाले प्रचार और नकली भरोसे के आरोप

अनुभव गुप्ता ने वीडियो में एक और बड़ा आरोप AI Fiesta की मार्केटिंग और इसके झूठे दावों को लेकर लगाया है। उनका कहना है कि ऐप ने ’36 घंटों में 3 मिलियन ARR’ (Annual Recurring Revenue) का आँकड़ा प्रचारित किया ताकि मार्केट में एक आर्टिफीसियल हाइप बनाई जा सके और लोगों को लगे कि यह ऐप बहुत बड़ी कमर्शियल सक्सेस है। अनुभव गुप्ता का तर्क है कि यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है और इसका मकसद सिर्फ उन यूजर्स को अपनी ओर खींचना है जो पैसे देकर सर्विस लें, जबकि मार्केट में पहले से ही कई AI टूल्स बिल्कुल फ्री में उपलब्ध हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि AI Fiesta ने गूगल प्ले स्टोर पर ‘बॉट-जनरेटेड’ या खरीदे गए रिव्यूज का सहारा लिया है। गुप्ता ने सबूत के तौर पर कई 5-स्टार रिव्यूज की ओर इशारा किया, जिनमें एक जैसे शब्द, एक जैसा सेंटेंस स्ट्रक्चर और कॉमन कीवर्ड्स बार-बार दोहराए गए थे, जो यह साफ दिखाते हैं कि ये फीडबैक असली नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे नकली रिव्यूज सिर्फ इसलिए खरीदे जाते हैं ताकि ऐप को इस्तेमाल करने की सोच रहे संभावित ग्राहकों को गुमराह किया जा सके।

स्रोत: गूगल प्ले स्टोर

ऑपइंडिया ने अनुभव गुप्ता द्वारा किए गए इन दावों की क्रॉस-चेकिंग की और उन्हें सही पाया, जैसा कि यहाँ दिए गए स्क्रीनशॉट्स से भी साफ होता है। इन दोनों स्क्रीनशॉट सेट्स में तीन ऐसे 5-स्टार रिव्यूज देखे जा सकते हैं, जिनमें लगभग एक जैसी भाषा और शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।

स्रोत: गूगल प्ले स्टोर

गोपनीयता समर्थक बनाम डेटा संग्रहकर्ता

इस पूरे खुलासे के केंद्र में वह बात थी जिसे गुप्ता ने ध्रुव राठी का ‘दोगुलापन’ (हिपोक्रेसी) बताया। गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि राठी ने अपनी पब्लिक इमेज एक ऐसे इंसान की बनाई है जो लोगों को डेटा के गलत इस्तेमाल, निगरानी (सर्वेलांस) और प्राइवेसी के खतरों के बारे में चेतावनी देता है। लेकिन इसके ठीक उलट, उनके अपने ऐप ‘AI Fiesta’ की नीतियांँ यूजर डेटा स्टोर करने, IP एड्रेस इकट्ठा करने और डिवाइस की तमाम जानकारियाँ लेने की अनुमति देती हैं।

स्रोत: AI Fiesta

अनुभव गुप्ता ने आगे यह भी आरोप लगाया कि ऐप की शर्तों (Terms) में ऐसे डिस्क्लेमर दिए गए हैं जो कहते हैं कि कोई भी सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। गुप्ता का तर्क है कि ऐसा करके कंपनी ने खुद को एक सुरक्षा कवच दे दिया है, ताकि भविष्य में अगर कोई डेटा लीक या ‘डेटा ब्रीच’ होता है, तो वे अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह बच सकें।

जवाबदेही और अधिकार क्षेत्र पर सवाल

अनुभव गुप्ता ने ऐप के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि ‘AI Fiesta’ अमेरिका के डेलावेयर (Delaware) में रजिस्टर्ड है, और उनका तर्क है कि इसे ‘देश का सबसे बड़ा AI प्लेटफॉर्म’ बताकर प्रमोट करना भ्रामक है। गुप्ता का कहना है कि जब इस ऐप का रजिस्ट्रेशन, डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर और लीडरशिप भारत में स्थित ही नहीं है, तो इसे भारतीय पहचान के साथ ब्रांड करना गलत है।

स्रोत: Ai Fiesta

यह पहली बार नहीं है जब ध्रुव राठी पर किसी को डराने-धमकाने का आरोप लगा हो। इससे पहले सितंबर 2023 में, यूट्यूबर कैरोलिना गोस्वामी और उनके पति ने भी आरोप लगाया था कि ध्रुव राठी के ‘सपोर्टर्स‘ ने यूरोप में उन पर हमला किया था, क्योंकि उन्होंने राठी के वीडियो का फैक्ट-चेक किया था।

इस बीच, ऑपइंडिया ने अनुभव गुप्ता से संपर्क कर धमकी वाले कॉल और ध्रुव राठी पर किए गए उनके खुलासे के बारे में और जानकारी माँगी है। अगर उनकी ओर से कोई जवाब आता है, तो इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। इसको पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें)

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Anurag
Anuraghttps://lekhakanurag.com
Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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