Sunday, September 27, 2020
Home विविध विषय अन्य समाप्त हो चुका है अनुच्छेद 370 का औचित्य, अब इसे जाना चाहिए: जानिए क्यों...

समाप्त हो चुका है अनुच्छेद 370 का औचित्य, अब इसे जाना चाहिए: जानिए क्यों और कैसे

भारतीय संविधान के भाग-21 में ‘Temporary, Transitional and Special Provisions’ के अंतर्गत अनुच्छेद 370 एक ‘अस्थाई’ (temporary) प्रावधान है। अपने मौलिक स्वरूप में यह अनुच्छेद संख्या ‘306-ए’ था जब इसे संविधान सभा में लाया गया था।

पुलवामा में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारत की दंडात्मक कार्यवाही के बाद अनुच्छेद 35-A और 370 को हटाने को लेकर बहुत सी बातें कही जा रही हैं। इन दोनों विवादास्पद अनुच्छेदों को हटाने के पक्ष, विपक्ष और कठिनाईयों के बारे में लेख पर लेख प्रकाशित किए जा रहे हैं।

बहुत से विचार पढ़ने के बाद यही समझ में आता है कि अधिकांश जानकारों और लेखकों ने अपने हिसाब से अनुच्छेद 35-A की व्याख्या की और अपनी धारणा को स्थापित करने के लिए तर्क प्रस्तुत किए लेकिन तथ्यों को सही प्रकार सामने नहीं रखा। अनुच्छेद 35-A को हटाना कितना आवश्यक है यह समझने के लिए इसके औचित्य और उत्पत्ति को समझना होगा। अनुच्छेद 35-A की उत्पत्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 में निहित शक्तियों में है।   

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 से अधिक विवादित कोई अन्य अनुच्छेद कभी नहीं रहा। अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर जितना विवाद है उससे अधिक इसकी गलत व्याख्या की जाती रही है। इस अनुच्छेद की व्याख्या में अनर्गल तर्क देने वाले बुद्धिजीवी यहाँ तक कहते रहे हैं कि 370 ‘कश्मीर को असाधारण स्वायत्तता’ प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा जाता है कि 370 ‘कश्मीर को विशेष राज्य’ का दर्ज़ा देता है।

इस प्रकार के तर्क अपने आप में कितने हास्यास्पद हैं इसकी पड़ताल करने के लिए संविधान को पढ़ना आवश्यक है। भारतीय संविधान के भाग-21 में ‘Temporary, Transitional and Special Provisions’ के अंतर्गत अनुच्छेद 370 एक ‘अस्थाई’ (temporary) प्रावधान है। अपने मौलिक स्वरूप में यह अनुच्छेद संख्या ‘306-ए’ था जब इसे संविधान सभा में लाया गया था। वह 17 अक्टूबर 1949 का दिन था जब अनुच्छेद 306-ए को गोपालस्वामी आयंगर चर्चा के लिए संविधान सभा में लेकर आए थे।

- विज्ञापन -

गोपालस्वामी आयंगर इस अनुच्छेद को क्यों लेकर आए थे इसपर हम लेख में आगे बात करेंगे। फ़िलहाल यह समझें कि जब संविधान बनकर तैयार हो गया था तब भाग-21 में ‘Temporary’ और ‘Transitional’ शब्द ही थे। ‘स्पेशल’ शब्द तेरहवें संशोधन से 1962 में जोड़ा गया था। इस दृष्टि से किसी राज्य के लिए जिन्हें विशेष (special) प्रावधान कहा जाना चाहिए वह तो अनुच्छेद 371 (A से लेकर I तक) है जिसमें महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर पूर्वी राज्य, गोवा और आंध्र प्रदेश के विकास के लिए तमाम प्रावधान किए गए हैं। यदि जम्मू कश्मीर एक अस्थाई अनुच्छेद 370 को लेकर किसी ‘विशेष’ दर्ज़े का दावा कर सकता है तो अनुच्छेद 371 A-I तक में विशेष राज्य का दर्ज़ा पाने वाले राज्यों को तो भारत से अलग ही हो जाना चाहिए।  

स्वायत्तता की बात करें तो जम्मू कश्मीर राज्य को लेकर विगत 70 वर्षों में शब्दों की गजब बाजीगरी की गई है। हमेशा ‘कश्मीर’ की स्वायत्तता की बात की जाती है जबकि राज्य का नाम ‘जम्मू और कश्मीर’ है। पूरे जम्मू कश्मीर राज्य में जम्मू, कश्मीर घाटी, मीरपुर, मुज़फ्फ़राबाद, गिलगित, बल्तिस्तान, सियाचिन, शक्सगाम घाटी, लेह और लदाख का क्षेत्र सम्मिलित है।

यह सच है कि गिलगित-बल्तिस्तान और मीरपुर-मुज़फ्फ़राबाद के क्षेत्र पर पाकिस्तान का अनधिकृत कब्जा है और चीन का भी जम्मू कश्मीर राज्य के एक बड़े भूभाग पर कब्जा है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हम जब भी बात करें तो कश्मीर की बात करें और बाकी क्षेत्रों का नाम भी न लें। कश्मीर घाटी की जनसंख्या भले ही अधिक है लेकिन इसका क्षेत्रफल पूरे जम्मू कश्मीर राज्य की तुलना में बहुत कम है। फिर भी 70 वर्षों तक इस क्षेत्र ने समूचे जम्मू कश्मीर राज्य की राजनीति और उससे उपजे अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण को गढ़ा है।

अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को स्वायत्तता प्रदान करता है या नहीं इसे समझने के लिए भारत स्वाधीनता अधिनियम (India Independence Act 1947) और उस अधिमिलन पत्र (Instrument of Accession) को देखना होगा जिस पर महाराजा हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1947 को हस्ताक्षर किए थे। भारत स्वाधीनता अधिनियम के अनुसार दो डोमिनियन बनने थे- इंडिया और पाकिस्तान। लगभग साढ़े पाँच सौ रियासतों में से कुछ सबसे बड़ी रियासतों को अधिमिलन पत्र के द्वारा इंडिया और पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने का अधिकार दिया गया था।

आज ऐसा भ्रम फैलाया जाता है कि रियासतों को तीन विकल्प दिए गए थे जिनमें स्वतंत्र रहने का विकल्प भी था लेकिन यह सत्य नहीं है। रियासतों को भारत और पाकिस्तान इन्हीं दो डोमिनियन में से एक को चुनना था वह भी इस शर्त पर कि रियासत जिस डोमिनियन में जा रही है उसकी सीमा उस डोमिनियन से लगनी चाहिए। इसी शर्त के चलते हैदराबाद पाकिस्तान का भाग नहीं बन पाया और बलूचिस्तान भारत में सम्मिलित नहीं हो पाया।

जम्मू कश्मीर की स्वायत्तता को लेकर एक भ्रम यह भी फैलाया जाता है कि भारत में जम्मू कश्मीर राज्य का विलय पूर्ण रूप से नहीं हुआ था। इसके पीछे तर्क दिए जाते हैं कि राजा द्वारा अधिमिलन पत्र में तीन विषय ही सरेंडर किए गए थे- रक्षा, विदेश मामले और संचार। यह तर्क पूरी तरह से गलत है क्योंकि महाराजा हरि सिंह ने केवल अधिमिलन पत्र पर ही हस्ताक्षर नहीं किए थे बल्कि उन्होंने स्टैन्ड्स्टिल एग्रीमेंट (Standstill Agreement) पर भी हस्ताक्षर किए थे जिसमें उन्होंने रक्षा, विदेश मामले और संचार के अतिरिक्त भी बाकी सारे विषय भारत को सरेंडर कर दिए थे।

इसके साथ ही 25 नवंबर 1949 को महाराजा हरि सिंह के पुत्र और जम्मू कश्मीर राज्य के रीजेंट कर्ण सिंह ने आधिकारिक घोषणा कर भारतीय संविधान को स्वीकार किया था। अर्थात 26 नवंबर को भारत की संविधान सभा द्वारा संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित तथा आत्मार्पित करने से एक दिन पहले जम्मू कश्मीर राज्य ने भारतीय संविधान को अपनाया था।

इन तथ्यों से मुँह फेरकर यह कहना कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज़ा देता है और यह कश्मीरियों का अधिकार है और इसके आधार पर जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष और स्वायत्त राज्य बताना वामपंथी गिरोह की चालबाज़ी है और कुछ नहीं। अब सवाल यह उठता है कि यदि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को भारत से अलग नहीं करता तो इसे लेकर इतना विवाद क्यों है? इसकी पड़ताल के लिए हमें पुनः 17 अक्टूबर 1949 के दिन संविधान सभा में गोपालस्वामी आयंगर द्वारा दी गई दलीलों को देखना होगा।

उस दिन संविधान सभा में गोपालस्वामी आयंगर ने जब अनुच्छेद 306-A (जो बाद में 370 कहलाया) प्रस्तुत किया तब उनसे इसके औचित्य पर सवाल किए गए। इस पर आयंगर ने जो उत्तर दिया वह ग़ौर करने लायक है। आयंगर ने कहा कि चूँकि जम्मू कश्मीर राज्य में युद्ध की स्थिति है और राज्य के एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया है इसलिए भारत का संविधान जस का तस पूरा वहाँ लागू नहीं किया जा सकता इसलिए जैसे-जैसे राज्य की स्थिति सामान्य होती जाए वैसे-वैसे संविधान के प्रावधान एक-एक कर के वहाँ लागू किए जाने चाहिए।

इस प्रकार अनुच्छेद 370 में यह लिखा गया कि जम्मू कश्मीर राज्य में भारतीय संविधान का केवल अनुच्छेद 1 लागू होगा और बाकी प्रावधान समय-समय पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा कुछ परिवर्तन और अपवादों सहित लागू किए जाएँगे। इस प्रकार भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के 200 से अधिक अनुच्छेद और अन्य प्रावधानों को संवैधानिक आदेश (Constitution Order) द्वारा जम्मू कश्मीर राज्य में लागू किया है।

लेकिन आज भी भारत के बहुत से ऐसे कानून हैं जो जम्मू कश्मीर में लागू नहीं हुए हैं जिसके लिए केंद्र की पूर्ववर्ती सरकारें ज़िम्मेदार हैं। उदाहरण के लिए भारतीय दण्ड संहिता (IPC) जम्मू कश्मीर में लागू नहीं है, इसके स्थान पर राजाओं के जमाने का रणबीर पीनल कोड लागू है। अनुच्छेद 370 की आड़ में कुछ ऐसे भी संवैधानिक आदेश लागू किए गए जिनके कारण अनुच्छेद 35-A जैसे असंवैधानिक प्रावधान जोड़े गए। नेहरू और इंदिरा ने 370 की आड़ में शेख अब्दुल्ला से विभिन्न करार किए जिनकी न कोई वैधानिकता थी न ज़रूरत। उन्हीं करारों के चलते जम्मू कश्मीर राज्य को अलग झंडा और न जाने क्या-क्या दे दिया गया जिसके कारण बाद के सालों में अलगाववाद को हवा मिली। भारत के विभाजन के समय जनता की राय लेने जैसी कोई शर्त नहीं रखी गई थी। केवल राजा को ही यह तय करना था कि वह अपने राज्य सहित किस डोमिनियन में जाएगा। फिर भी आज तक कश्मीरी जनता के जनमत संग्रह की बात की जाती है।

इन सब विसंगतियों के लिए तत्कालीन सरकारें ज़िम्मेदार हैं। ऐसा भी नहीं है कि अनुच्छेद 370 को हटाया नहीं जा सकता। यह भारतीय संविधान का एकमात्र अनुच्छेद है जिसमें इसके हटाने के प्रावधान भी लिखे हैं। अनुच्छेद 370 के क्लॉज़ 3 में लिखा है कि राष्ट्रपति इसे जम्मू कश्मीर की संविधान सभा से सलाह लेकर कभी भी हटा सकता है।

जम्मू कश्मीर की संविधान सभा तो अब रही नहीं इसलिए भारत की संसद इसे हटा सकती है क्योंकि 370 संविधान का एक अनुच्छेद है और संसद द्वारा संविधान के किसी भी भाग को संशोधित करने की शक्ति संविधान के अनुच्छेद 368 में उल्लिखित है। उच्चतम न्यायालय ने केशवानंद भारती के केस में यह निर्णय दिया था कि संविधान के मौलिक ढाँचे के अलावा संसद संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है।

उच्चतम न्यायालय ने 2016 के अपने निर्णय में भी यह कहा है कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर राज्य को भारतीय संविधान से बाहर किसी भी प्रकार की स्वायत्तता प्रदान नहीं करता। सन 1964 में संसद में 370 के दुष्परिणामों को लेकर दस घंटे बहस हुई थी जिसमें इस अनुच्छेद को हटाने को लेकर पूरी संसद एकमत थी लेकिन तत्कालीन राजनैतिक नेतृत्व में इतना हौसला नहीं था कि इसे हटा सके। इस अनुच्छेद को लेकर न्यायालय में कई मामले लंबित हैं जिनपर पड़ने वाली तारीखों में क़ानूनी दाँवपेंच खेले जाते हैं और जानबूझकर 370 को बरकरार रखने के प्रयास किए जाते हैं जबकि इस अनुच्छेद की आयु और औचित्य दोनों पूरे हो चुके हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

‘तुम्हारी मौत का समय आ गया है’: नुसरत जहां की देवी दुर्गा वाली तस्वीर देख भड़के कट्टरपंथी

देवी दुर्गा के रूप में टीएमसी सांसद अभिनेत्री नुसरत जहां की तस्वीर देख कट्टरपंथी भड़क उठे और उन्हें मौत की धमकी दी।

असली है करण जौहर की पार्टी का वायरल वीडियो, NCB को मिली फोरेंसिक रिपोर्ट में कई खुलासे

आरोप है कि इस पार्टी में शामिल सितारे ड्रग्स के नशे में थे। एनसीबी ने शनिवार को करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन से जुड़े क्षितिज रवि को भी गिरफ्तार किया था।

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

‘गाँधी-नेहरू मातम मनाओ, हिंदू की मैया मर गई’: निम्रा अली ने लाइव टीवी पर उगला जहर

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए निम्रा ने उन्हें ‘बकरी’ कह कर संबोधित किया और विभाजन के दौरान हुई हिंदुओं की मौत का मज़ाक भी बनाया।

युद्ध के हालात लेकिन चीन का प्रचार, आँकड़ों से खेल और फेक न्यूज… आखिर PTI पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा प्रसार भारती

ऐसा मुद्दा जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, उस पर निर्णय लेने में देरी करना तर्क पूर्ण नहीं कहा जा सकता। जिस तरह के हालात बने, ऐसे में...

प्रचलित ख़बरें

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

अनुराग कश्यप ने कब, क्या और कैसे किया, यह सब कुछ पायल घोष ने पुलिस को दी शिकायत में विस्तार से बताया है।

‘दीपिका के भीतर घुसे रणवीर’: गालियों पर हँसने वाले, यौन अपराध का मजाक बनाने वाले आज ऑफेंड क्यों हो रहे?

दीपिका पादुकोण महिलाओं को पड़ रही गालियों पर ठहाके लगा रही थीं। अनुष्का शर्मा के लिए यह 'गुड ह्यूमर' था। करण जौहर खुलेआम गालियाँ बक रहे थे। तब ऑफेंड नहीं हुए, तो अब क्यों?

पूना पैक्ट: समझौते के बावजूद अंबेडकर ने गाँधी जी के लिए कहा था- मैं उन्हें महात्मा कहने से इंकार करता हूँ

अंबेडकर ने गाँधी जी से कहा, “मैं अपने समुदाय के लिए राजनीतिक शक्ति चाहता हूँ। हमारे जीवित रहने के लिए यह बेहद आवश्यक है।"

बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

‘मारो, काटो’: हिंदू परिवार पर हमला, 3 घंटे इस्लामी भीड़ ने चौथी के बच्चे के पोस्ट पर काटा बवाल

कानपुर के मकनपुर गाँव में मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू घर को निशाना बनाया। बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

ड्रग्स स्कैंडल: रकुल प्रीत ने उगले 4 बड़े बॉलीवुड सितारों के नाम, करण जौह​र ने क्षितिज रवि से पल्ला झाड़ा

NCB आज दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से पूछताछ करने वाली है। उससे पहले रकुल प्रीत ने क्षितिज का नाम लिया है, जो करण जौहर के करीबी बताए जाते हैं।

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

अर्जेंटीना: सांसद ने ऑनलाइन सत्र में गर्लफ्रेंड का स्तन चूमा, वीडियो वायरल होने पर दिया इस्तीफा

एक वीडियो वायरल होने के बाद अर्जेंटीना के 47 वर्षीय सांसद जुआन एमिलो एमिरी को संसद के निचले सदन से इस्तीफा देना पड़ा है।

‘तुम्हारी मौत का समय आ गया है’: नुसरत जहां की देवी दुर्गा वाली तस्वीर देख भड़के कट्टरपंथी

देवी दुर्गा के रूप में टीएमसी सांसद अभिनेत्री नुसरत जहां की तस्वीर देख कट्टरपंथी भड़क उठे और उन्हें मौत की धमकी दी।

असली है करण जौहर की पार्टी का वायरल वीडियो, NCB को मिली फोरेंसिक रिपोर्ट में कई खुलासे

आरोप है कि इस पार्टी में शामिल सितारे ड्रग्स के नशे में थे। एनसीबी ने शनिवार को करण जौहर की धर्मा प्रोडक्शन से जुड़े क्षितिज रवि को भी गिरफ्तार किया था।

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

डेढ़ साल में ही दूसरी बीवी नेहा से उब गया आसिफ, खुद मारी गोली और नेहा के भाई पर मढ़ दिया मर्डर का दोष

दिल्ली से बदायूँ लाकर आसिफ ने नेहा को गोली मार दी। फिर पुलिस को बताया कि नेहा को उसके भाई ने ही गोली मारी है, क्योंकि वह शादी से खुश नहीं था।

‘फेमिनिस्ट अंडरवियर नहीं पहनती’: केरल में यूट्यूबर पर महिला ‘एक्टिविस्ट्स’ ने मोटर ऑयल डाला

केरल में यूट्यूबर विजय पी नायर पर महिला 'एक्टिविस्ट्स' ने हमला किया। उनके चेहरे पर मोटर ऑयल डाल दिया और थप्पड़ मारे।

वो घर पर मौज कर रहा है और मुझसे हो रही पूछताछ: अनुराग कश्यप पर FIR कराने वाली पायल ने मुंबई पुलिस पर उठाए...

फिल्मकार अनुराग कश्यप के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाने वाली अभिनेत्री पायल घोष ने मुंबई पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

‘गाँधी-नेहरू मातम मनाओ, हिंदू की मैया मर गई’: निम्रा अली ने लाइव टीवी पर उगला जहर

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए निम्रा ने उन्हें ‘बकरी’ कह कर संबोधित किया और विभाजन के दौरान हुई हिंदुओं की मौत का मज़ाक भी बनाया।

‘मैं राजनीति को नहीं समझता, मैं एक साधारण व्यक्ति हूँ’ – बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे नीतीश की पार्टी में शामिल

“मैं राजनीति को नहीं समझता। मैं एक साधारण व्यक्ति हूँ, जिन्होंने अपना समय समाज के निचले तबके के लिए काम करने में बिताया है।”

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,071FollowersFollow
325,000SubscribersSubscribe
Advertisements