Wednesday, September 23, 2020
Home बड़ी ख़बर 'मर्यादा' का भार सिर्फ मोदी पर ही क्यों... विपक्ष 'शब्दों की गरिमा' का अर्थ...

‘मर्यादा’ का भार सिर्फ मोदी पर ही क्यों… विपक्ष ‘शब्दों की गरिमा’ का अर्थ भूल गया है क्या?

विपक्ष का इतना ओछा रूप कभी भी नहीं देखने को मिलता था। आज भावों को प्रकट करने के लिए शब्द की हर गरिमा को तार-तार कर दिया गया है। मोदी से घृणा करते हुए विपक्ष अब इतना आगे निकल चुका है कि सेना के पराक्रम पर सवाल भी उठाता है और माँ की ममता को भी राजनीति करार देता है।

आज (अप्रैल 11, 2019) सुबह AIUDF के प्रमुख बदरूद्दिन अजमल से जुड़ी एक खबर आई है। जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की। अजमल ने ढुभरी में रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अगर एक बार वो चुनाव जीत जाते हैं तो वो प्रधानमंत्री मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और असम के मंत्री हिमंत बिस्वा को बांग्लादेश भेज देंगे।

यह पहली बार नहीं था कि विपक्ष के किसी नेता ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर ऐसा ज़हर उगला हो। इससे पहले भी लोकतांत्रिक देश के कई तथाकथित राजनेताओं ने देश के पीएम के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जिसे शायद 2014 से पहले केवल गलियों में घूमते लोफरों के मुँह से ही सुना जाता रहा।

वैसे तो मोदी को लेकर घटिया बयानबाजियों का दौर उनके प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के साथ ही शुरू हो गया था लेकिन 2019 के चुनाव करीब आते-आते तो मानो इस तरह के बयानों की झड़ी लग गई। इस दौर की शुरुआत इमरान मसूद के बोटी-बोटी वाले बयान से हुई थी, और आज ये कहानी पीएम को अनपढ़, जाहिल, धोबी का कुत्ता, नामर्द कहने तक पहुँच चुकी है।

मोदी सरकार के प्रति विपक्ष में इतनी नफरत और घृणा है कि शायद वो भूल चुके हैं कि पीएम पद की गरिमा को बनाए रखना सिर्फ़ मोदी का ही काम नहीं हैं। राजनीति में शब्दों के बाण शुरूआती समय से ही चलते आए हैं। लेकिन जिस नीचता पर आज राजनेता उतर आए हैं, वैसा इतिहास में कभी भी देखने को नहीं मिला था।

- विज्ञापन -

इसे मोदी का प्रभाव कहा जाए या मोदी के लिए नफरत, लेकिन जो राजनेता कुछ समय पहले तक समाज को नैतिकता का पाठ पढ़ाते घूमते थे, वो अब खुद ही नैतिकता के सिद्धांत भूलकर, मोदी को गाली देने के लिए हर जनसभा, रैली में व्याकुल नज़र आते हैं।

बीते कुछ समय में अगर गौर किया जाए तो फारूक़ अब्दुल्ला, चंद्रबाबू नायडू, दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज़ नामों ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधने के क्रम में मर्यादा की सभी सीमाएँ लाँघते नज़र आ रहे हैं। नीचता की हद को पार करने वाले इन राजनेताओं के कुछ बेलगाम-बेतुके बयानों के उदाहरण नीचे दिए गए हैं, देखिए ये सभी राजनेता राजनीतिक बयानबाजी के स्तर को किस रसातल में जाकर छोड़े हैं, इसे सिर्फ इनके बिगड़े बोल कहने से काम नहीं चलेगा।

चंद्रबाबू नायडू: पिछले महीने टीडीपी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली को संबोधित करते हुए PM को खूँखार उग्रवादी और देश में रहने लायक तक नहीं बताया था। इसके अलावा एक बार आँध्र के सीएम, मोदी की माँ पर सवाल उठाने के कारण भी आलोचनाओं का शिकार हुए थे, जिसमें उन्होंने पीएम से सवाल किया था कि “मुझे लोकेश के पिता, देवांश के दादा और भुवनेश्वरी के पति होने पर गर्व है, मैं आपसे (नरेंद्र मोदी से) पूछ रहा हूँ- आप कौन हैं?”

PM मोदी एक खूँखार उग्रवादी, देश में रहने लायक नहीं: ‘अल्पसंख्यक’ भाइयों से नायडू की गुहार

फारूक़ अब्दुल्ला: बालाकोट हमले के बाद देश में बहुत से राजनेताओं ने एयर स्ट्राइक के सबूत माँगकर IAF की बहादुरी पर सवाल उठाए, लेकिन इस बीच फारूक़ अब्दुल्ला एक ऐसी आवाज़ थे जिन्होंने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ बयानबाजी करते हुए यह तक बोल डाला कि उन्हें शक हैं पुलवामा हमले पर…

मगर वो 40 लोग CRPF के शहीद हो गए… उसपर भी मुझे शक है – फारूक अब्दुल्ला का शर्मनाक बयान

मजीद मेमन: याकूब मेमन के वकील मजीद मेमन ने हाल ही में प्रधानमंत्री को लेकर कहा था कि वे एक अनपढ़, जाहिल और रास्ते पर चलने वाले व्यक्ति की तरह बात करते हैं। यहाँ मजीद का कहना था कि पीएम इतने बड़े पद पर बैठे हैं, उनका पद एक संवैधानिक पद है। उस संवैधानिक पद के लिए प्रधानमंत्री रास्ते में नहीं चुना जाता।

‘प्रधानमंत्री एक अनपढ़, जाहिल या रास्ते पर चलने वाले आदमी की तरह बात करते हैं’

बी नारायण राव: एक तरफ़ जहाँ लोकतांत्रिक देश की सबसे सेकुलर पार्टी के प्रमुख लोग नागरिकों के बीच जाकर उन्हें उनके अधिकारों से परिचित करवा रहे हैं, वहीं उसी पार्टी के कुछ नेता देश के प्रधाममंत्री पर निजी टिप्पणी करने से भी नहीं चूँक रहे। हाल ही में कॉन्ग्रेस के विधायक बी नारायण राव ने मोदी पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि जो लोग शादी कर सकते हैं लेकिन बच्चे नहीं पैदा कर सकते, वे नामर्द हैं।

तनवीर हसन: प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में वंशवाद की आलोचना करते हुए एक ब्लॉग लिखा था जिस पर बार सांसद रह चुके तनवीर हसन ने कहा था कि चूँकि मोदीजी को आगे भी अपना वंश बढ़ाना नहीं है, इसीलिए वंशवाद की आलोचना करते हैं।

ओवैसी: AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के मोदी से मतभेद हमेशा उनके बयानों में झलकते रहे हैं। कुछ दिन पहले ओवैसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी और वर्तमान सांसद ओवैसी ने पूछा, “जब पुलवामा का हमला हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या बीफ बिरयानी खा कर सो रहे थे।” 

मोदी बीफ बिरयानी खा कर सो गए थे क्या : ओवैसी

पवन खेड़ा (कॉन्ग्रेस प्रवक्ता): कुछ समय पहले इंडिया टीवी पर एक डिबेट के दौरान कॉन्ग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आवेश में आकर मोदी के अंग्रेजी शब्द का विच्छेद करते हुए उन्हें मसूद अज़हर, ओसामा बिन लादेन, दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई बताया। इसके बाद जनता ‘शेम-शेम’ बोलती हुई खड़ी हो गई और कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को दुत्कारा।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने PM मोदी को बताया मसूद, ओसामा, दाऊद और ISI; जनता ने दुत्कारा

ये सिर्फ़ कुछ एक नेताओं की टिप्पणियाँ हैं। ऐसी अनेकों टिप्पणियाँ चुनाव के नज़दीक होने के कारण आए दिन दोहराई जा रही है। इन टिप्पणियों में धड़ल्ले से दलाल, हरामज़ादा, पूतना, दरिंदा, चोर, भड़वा, खूँखार उग्रवादी जैसे शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। कभी मोदी से उनकी मर्दानगी का सबूत माँगा जाता है, तो कभी उनकी बूढ़ी माँ को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ की जाती हैं। उनसे राफेल जैसे मुद्दों पर सवाल किया जाता है जिसकी क्लिन चिट खुद सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार को दे चुका है।

दलाल, हरामज़ादा, पूतना, दरिंदा, चोर, भड़वा आदि आराम से क्यों बोलने लगे हैं हमारे नेता?

यहाँ मोदी पर हुई इन विवादित टिप्पणियों को हाईलाइट करने का मतलब ये बिलकुल भी नहीं हैं कि उन्होंने कभी किसी के लिए जनसभाओं में रैलियों में उपनाम (युवराज, नामदार, कामदार) नहीं बोले। लेकिन पीएम द्वारा चुने गए शब्दों में और उनके ख़िलाफ़ विपक्ष की टिप्पणियों में इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों में जमीन और आसमान का फर्क़ है।

संसद में सवाल पहले भी उठाए जाते थे, विपक्ष पहले भी मौजूद होता था, रैलियाँ-जनसभाएँ-चुनाव प्रचार पहले भी आयोजित होती थीं, लेकिन विपक्ष का इतना ओछा रूप कभी भी नहीं देखने को मिलता था। आज भावों को प्रकट करने के लिए शब्द की हर गरिमा को तार-तार कर दिया गया है। मोदी से घृणा करते हुए विपक्ष अब इतना आगे निकल चुका है कि सेना के पराक्रम पर सवाल भी उठाता है और माँ की ममता को भी राजनीति करार देता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हथियारों से लैस होना जरूरी, वरना भेड़िये तो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं: दिनकर ने क्यों कहा था ऐसा?

फ़रवरी 21, 1963 को राज्यसभा में दिए अपने भाषण में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने समझाया था कि अहिंसा का अर्थ क्या होता है।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

निलंबित AAP सांसद संजय सिंह ने टीवी पर स्वीकारा कि उन्होंने उपाध्यक्ष का माइक तोड़ा, कहा- लोकतंत्र की रक्षा कर रहे थे

AAP नेता संजय सिंह ने खुद और अन्य विधायकों का बचाव करते हुए कहा कि वे 'लोकतंत्र को बचाने' की कोशिश कर रहे थे।

नोटबंदी और कृषि बिल के लिए एक ही शख्स के इंटरव्यू के वायरल दावे को ANI एडिटर ने नकारा, कॉन्ग्रेस ने फैलाया ‘झूठ’

इन दिनों सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि समाचार एजेंसी ANI ने हाल ही में पारित किए गए किसान बिल और 2016 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नोटबंदी के लिए एक ही व्यक्ति का इंटरव्यू लिया।

व्यंग्य: रवीश जी दुबरा गए हैं, एतना चिंता हो रहा है देस का कि का कहें महाराज!

एक समाज के तौर पर हम कहाँ जा रहे हैं? धरती घूम रही है और हम भी घूम रहे हैं। इसी धरती पर मोदी हमें घुमा रहा है। जबकि लेहरू जी द्वारा भारत को दिए गए विज्ञान की सौगात यही कहती है किसान को किसान ही रहने दो, उसको व्यापारी मत बनाओ।

संजय सिंह और डेरेक ओ ब्रायन ने ईशान करण की चिट्ठी नहीं पढ़ी… वरना पत्रकार हरिवंश से पंगा न लेते

दूर बैठकर भी कर्मचारियों के मन को बखूबी पढ़ लेने वाले हरिवंश जी, अब आसन पर बैठ संजय सिंह, डेरके ओ ब्रायन की 'राजनीति' को पढ़ हँसते होंगे।

प्रचलित ख़बरें

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का ताजा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है।

व्हिस्की पिलाते हुए… 7 बार न्यूड सीन: अनुराग कश्यप ने कुबरा सैत को सेक्रेड गेम्स में ऐसे किया यूज

पक्के 'फेमिनिस्ट' अनुराग पर 2018 में भी यौन उत्पीड़न तो नहीं लेकिन बार-बार एक ही तरह का सीन (न्यूड सीन करवाने) करवाने का आरोप लग चुका है।

‘क्या तुम्हारे पास माल है’: सामने आई बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस के बीच हुई ड्रग चैट

कुछ बड़े बॉलीवुड सितारों के बीच की ड्रग चैट सामने आई है। इसमें वे खुलकर ड्रग्स के बारे में बात कर रहे हैं।

जेल में मुझे ‘शिक्षित आतंकी’ कहते हैं, पुलिस देती है मानसिक प्रताड़ना: दिल्ली दंगा आरोपित MBA वाली गुलफिशा फातिमा

दिल्ली दंगे की आरोपित गुलफिशा फातिमा ने दावा किया कि उसे जब से जेल में लाया गया है, तभी से वो वहाँ भेदभाव का सामना कर रही है।

हथियारों से लैस होना जरूरी, वरना भेड़िये तो राह चलते साधुओं पर भी अकारण झपट्टा मारते हैं: दिनकर ने क्यों कहा था ऐसा?

फ़रवरी 21, 1963 को राज्यसभा में दिए अपने भाषण में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने समझाया था कि अहिंसा का अर्थ क्या होता है।

‘क्या आपके स्तन असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?’: शर्लिन चोपड़ा ने KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक पर लगाया यौन दुर्व्यवहार का आरोप

"मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।"

सुप्रीम कोर्ट में ‘हिन्दू आतंक’ का हवाला दिए जाने से बौखलाए NDTV के पत्रकार ने केंद्र पर लगाया ‘अपने लोगों’ को बचाने का आरोप

आतंकवादी हमले को ‘छोटा-मोटा’ हमला करार देने वाले NDTV के पत्रकार जैन ने केंद्र पर किसी भी कीमत पर ‘अपने लोगों’ को बचाने का आरोप लगाया।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

निलंबित AAP सांसद संजय सिंह ने टीवी पर स्वीकारा कि उन्होंने उपाध्यक्ष का माइक तोड़ा, कहा- लोकतंत्र की रक्षा कर रहे थे

AAP नेता संजय सिंह ने खुद और अन्य विधायकों का बचाव करते हुए कहा कि वे 'लोकतंत्र को बचाने' की कोशिश कर रहे थे।

भारत के आगे एक बार फिर नतमस्तक हुआ नेपाल: विवादित नक्‍शे वाली किताब पर PM ओली ने लगाई रोक

नेपाल की केपी ओली सरकार ने देश के विवादित नक्‍शे वाली किताब के वितरण पर रोक लगा दिया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय और भू प्रबंधन मंत्रालय ने श‍िक्षा मंत्रालय की ओर से जारी इस किताब के विषयवस्‍तु पर गंभीर आपत्ति जताई थी।

नोटबंदी और कृषि बिल के लिए एक ही शख्स के इंटरव्यू के वायरल दावे को ANI एडिटर ने नकारा, कॉन्ग्रेस ने फैलाया ‘झूठ’

इन दिनों सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि समाचार एजेंसी ANI ने हाल ही में पारित किए गए किसान बिल और 2016 में मोदी सरकार द्वारा लाए गए नोटबंदी के लिए एक ही व्यक्ति का इंटरव्यू लिया।

ड्रग तस्कर केशवानी ने पूछताछ में लिया दीया मिर्जा का नाम: NCB बाकी सितारों के साथ उन्हें भी जल्द भेजेगी समन

दीया का नाम पूछताछ के दौरान अनुज केशवानी ने लिया है। केशवानी ने बताया कि दीया की मैनेजर ड्रग्स खरीदती थी। उन्होंने इसके सबूत भी दिए हैं।

व्यंग्य: रवीश जी दुबरा गए हैं, एतना चिंता हो रहा है देस का कि का कहें महाराज!

एक समाज के तौर पर हम कहाँ जा रहे हैं? धरती घूम रही है और हम भी घूम रहे हैं। इसी धरती पर मोदी हमें घुमा रहा है। जबकि लेहरू जी द्वारा भारत को दिए गए विज्ञान की सौगात यही कहती है किसान को किसान ही रहने दो, उसको व्यापारी मत बनाओ।

आयकर विभाग ने उद्धव ठाकरे और उनके बेटे के साथ ही शरद पवार और उनकी बेटी को भेजा नोटिस, गलत जानकारी साझा करने के...

“मुझे अपने चुनावी हलफनामे के बारे में आयकर विभाग से नोटिस मिला। चुनाव आयोग के निर्देश पर, आयकर ने 2009, 2014 और 2020 के लिए चुनावी हलफनामों पर एक नोटिस भेजा है।"

हमसे जुड़ें

263,159FansLike
77,959FollowersFollow
323,000SubscribersSubscribe
Advertisements