Wednesday, September 30, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे 'शिवसेना का जन्म ही कॉन्ग्रेस के आशीर्वाद से हुआ था' - बाल ठाकरे ने...

‘शिवसेना का जन्म ही कॉन्ग्रेस के आशीर्वाद से हुआ था’ – बाल ठाकरे ने इमरजेंसी का किया था समर्थन

"शिवसेना के उद्भव से लेकर उसके पूरे सेटअप के लिए कॉन्ग्रेस ही जिम्मेदार है। जब शिवसेना की स्थापना की घोषणा हुई थी, तब कॉन्ग्रेस नेता रामराव आदिक मंच पर मौजूद थे। आदिक आगे जाकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी बने।"

महाराष्ट्र का राजनीतिक ऊँट किसी भी करवट बैठ सकता है। ऐसा इसीलिए, क्योंकि शरद पवार ने सोनिया गाँधी के साथ बैठक की, जिसमें शिवसेना को समर्थन करने पर ज़रूर चर्चा हुई होगी। हालाँकि, पवार ने इसे सिर्फ़ राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा करार दिया। वैसे देखा जाए तो शिवसेना और कॉन्ग्रेस पहले भी एक-दूसरे का समर्थन कर चुकी है। या कह सकते हैं कि शिवसेना ने कई मौक़ों पर कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था। बाल ठाकरे ने आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी का समर्थन कर सबको चौंका दिया था। यह और बात है कि शिवसेना के संस्थापक अपने हिंदुत्ववादी विचारों के लिए जाने जाते थे।

ये किस्सा 1975 का है, जब इंदिरा गाँधी ने आपातकाल लगा कर कई विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था। तब बालासाहब ठाकरे पर भी गिरफ़्तारी की तलवार लटकी थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि ठाकरे कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े विरोधियों में से एक थे। कार्टूनिस्ट के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले ठाकरे अपने कार्टूनों से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को निशाना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे। वह अपने भाषणों में कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ आग उगलते थे। फायरब्रांड नेता होने के कारण उनके बयान चर्चा में भी रहते थे। ऐसे में ठाकरे द्वारा इंदिरा गाँधी और आपातकाल का समर्थन करना चौंकाने वाला था।

बालासाहब इतने पर ही नहीं रुके थे। उन्होंने 1977 के आम चुनाव और 1978 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था। इसका नतीजा ये हुआ कि पार्टी को न सिर्फ़ मुंबई बीएमसी बल्कि पूरे महाराष्ट्र में जनता का समर्थन नहीं मिला उन चुनावों में शिवसेना को कॉन्ग्रेस का समर्थन करना भरी पड़ा। ये मुद्दा जनवरी 2018 में फिर से तब उछला था, जब महाराष्ट्र सरकार ने इमरजेंसी के दौरान जेल गए लोगों को पेंशन देने की घोषणा की थी। एनसीपी ने शिवसेना से पूछा था कि क्या बाल ठाकरे द्वारा इमरजेंसी का समर्थन करना एक बड़ी भूल थी?

अगर आपको कोई कहे कि शिवसेना का जन्म ही कॉन्ग्रेस के आशीर्वाद से हुआ था, तो आपको शायद आश्चर्य हो। सीपीआई के संथापक और वयोवृद्ध वामपंथी नेता श्रीपद अमृत डांगे की बेटी रोजा देशपांडे का मानना है कि शिवसेना के उद्भव से लेकर उसके पूरे सेटअप के लिए कॉन्ग्रेस ही जिम्मेदार है। वह अपने इस बयान के पीछे तर्क देते हुए याद दिलाती हैं कि जब शिवसेना की स्थापना की घोषणा हुई थी, तब कॉन्ग्रेस नेता रामराव आदिक मंच पर मौजूद थे। शिवसेना की स्थापना 1966 में हुई थी। प्रसिद्ध वकील रामराव आदिक आगे जाकर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी बने।

शिवसेना का उत्तर भारतीयों और दक्षिण भारतीयों, दोनों से ही संघर्ष के इतिहास रहा है। साथ ही पार्टी बौद्ध दलितों का भी विरोध कर चुकी है। यहाँ तक कि शिवसेना ने 1979 में मुस्लिम लीग के साथ भी गठबंधन किया था। आपातकाल के बारे में कई किस्से प्रचलित हैं। उनमें से एक ये भी है कि जब एक के बाद एक विपक्षी नेताओं को जेल भेजा जा रहा था, तब राज्य के मुख्यमंत्री शंकरराव चव्हाण ने ठाकरे के सामने दो विकल्प रखे थे। उन्होंने ठाकरे से या तो आपातकाल का समर्थन करने या फिर जेल जाने का विकल्प दिया था। जेल जाने से बचने के लिए बाल ठाकरे ने आपातकाल और इंदिरा गाँधी का समर्थन किया, ऐसा कहा जाता है।

इसके बाद न सिर्फ़ 1977 लोकसभा और 1978 के बीएमसी चुनाव बल्कि 1980 के लोकसभा चुनाव में भी बाल ठाकरे ने कॉन्ग्रेस का समर्थन किया था। उन्होंने कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ प्रत्याशी ही नहीं उतारे। शिवसेना ने बहाना बनाया कि बाल ठाकरे के साथ तत्कालीन मुख्यमंत्री एआर अंतुले के साथ निजी रिश्ते हैं, इसीलिए शिवसेना कॉन्ग्रेस का समर्थन कर रही है। शिवसेना-भाजपा का गठबंधन 1989 में फाइनल हुआ लेकिन बाल ठाकरे उससे पहले कई ऐसे दलों और लोगों के साथ गठबंधन बना चुके थे या समर्थन कर चुके थे, जिनका विरोध करते वो और उनकी पार्टी थकती नहीं थी। इन विरोधाभासों के कारण कम्युनिष्ट पार्टी कहती है कि कॉन्ग्रेस ने वामपंथियों के मुक़ाबले शिवसेना को खड़ा किया था।

1980 में शिवसेना द्वारा कॉन्ग्रेस का समर्थन करने का पार्टी को इनाम भी मिला था। एआर अंतुले के समर्थन के एवज में 2 शिवसेना नेताओं को विधान परिषद में भेजा गया। 1977 के मेयर चुनाव में शिवसेना ने मुरली देवड़ा का समर्थन किया, जिसके कारण पार्टी के पहले मेयर डॉक्टर हेमचन्द्र गुप्ता ने शिवसेना से इस्तीफा दे दिया था। मुरली के बेटे मिलिंद देवड़ा अभी मुंबई रीजनल कॉन्ग्रेस कमिटी के मुखिया हैं। 1982 में वो मौक़ा भी आया, जब शिवसेना के संस्थापक-अध्यक्ष बाल ठाकरे ने शरद पवार और जॉर्ज फर्नांडिस के साथ मंच साझा किया। उन्होंने गिरनगाँव मिल में मजदूरों के हड़ताल को लेकर दशहरा रैली के दौरान पवार के साथ मंच साझा किया।

यह भी जानने लायक बात है कि ठाकरे ने उसी कॉन्ग्रेस का विरोध करने के लिए पवार के साथ मंच साझा किया, जिसके वो पहले समर्थक रहे थे। बाल ठाकरे के बाद के दिनों में भी हमें ऐसे मौके देखने को मिले जब उन्होंने 2007 में राष्ट्रपति पद के लिए कॉन्ग्रेस समर्थित उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल का समर्थन किया था। उस दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता भैरों सिंह शेखावत स्वतंत्र उम्मीदवार थे और उन्हें राजग का समर्थन प्राप्त था लेकिन शिवसेना ने गठबंधन लाइन से अलग जाकर पाटिल का समर्थन किया। इस बात पर भी गौर कीजिए कि जिस चीज का नाम लेकर ठाकरे ने शेखावत का विरोध किया था, आज उनकी पार्टी वही कर रही है।

बाल ठाकरे ने कहा था कि भैरोंसिंह शेखावत स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में इसीलिए चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि भाजपा की तरफ़ से खड़े होने पर उन्हें कई दलों का समर्थन नहीं मिलता। ठाकरे ने इसे ‘सौदेबाजी’ करार देते हुए कहा था कि वो इसका समर्थन नहीं करते। बाल ठाकरे की पार्टी आज भाजपा के साथ ‘सौदेबाजी’ में लगी है और रोज मोलभाव किए जा रही है। इसी तरह 2012 में शिवसेना ने राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव मुखर्जी का समर्थन किया था। मुखर्जी ने फोन कर के बाल ठाकरे और उद्धव ठाकरे से बात की थी। उस समय संजय राउत ने ही इसकी घोषणा की थी कि शिवसेना मुखर्जी का समर्थन करेगी। प्रणव मुखर्जी ने मातोश्री पहुँच कर बाल ठाकरे से मुलाक़ात भी की थी।

कुल मिला कर देखें तो ‘सौदेबाजी’ और मोलभाव शिवसेना के भीतर तब से है, जब से उसकी स्थापना हुई थी। ‘ठाकरे’ फ़िल्म के डायलॉग ‘लूँगी उठाओ, पूँगी बजाओ’ को लेकर विरोध हुआ था क्योंकि इसमें दिखाया गया था कैसे बाल ठाकरे ने दक्षिण भारतीयों का विरोध किया था। एक समय ऐसा भी आया, जब मुंबई से बिहारियों को भगाया जाने लगा। बौद्ध दलितों से टकराव की बात हम ऊपर कर चुके हैं। बालासाहब ने मनमोहन सिंह को भी ‘काफ़ी बुद्धिमान और सौम्य’ प्रधानमंत्री बताया था। कुल मिला कर देखें तो शिवसेना की राजनीति विरोध और ‘सौदेबाजी’ पर ही टिकी हुई है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हाथरस मामले की जाँच के लिए SIT गठित, 7 दिन में रिपोर्ट: PM मोदी और CM योगी की बातचीत, फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जाँच के लिए 'स्पेशल टास्क फोर्स (SIT)' का गठन किया है।

ईशनिंदा में अखिलेश पांडे को 15 साल की सजा, कुरान की ‘झूठी कसम’ खाकर 2 भारतीय मजदूरों ने फँसाया

UAE के कानून के हिसाब से अगर 3 या 3 से अधिक लोग कुरान की कसम खाकर गवाही देते हैं तो आरोप सिद्ध माना जा सकता है। इसी आधार पर...

पिता-दादाजी ने किया हाथरस मामले की पीड़िता का अंतिम संस्कार, पुलिस भी रही मौजूद

दावा किया जा रहा था कि गाँव में हाथरस के अधिकारियों ने बलपूर्वक परिजनों को पीड़िता का अंतिम संस्कार करने के लिए दबाव बनाया।

जब एक फैसला, फैसला न होकर तुष्टिकरण बन गया: जानिए काशी, मथुरा की लड़ाई क्यों बाकी है…

आज जब अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन के बाद काशी-मथुरा की लड़ाई तेज़ हो गई है, हमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी याद करने की ज़रूरत है।

हाथरस ‘गैंगरेप’ में लिबरल गिरोह ‘जाति’ क्यों ढूँढ रहा है? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras ‘gangrape’ case

इस बीच मौकापरस्त पत्रकार और नेता मामले को स्पिन देते हुए आरोपित की ‘जाति’ निकाल कर सामने ला रहे हैं कि वो उच्च जाति का होने की वजह से पुलिस ने रेप से इनकार किया।

1959 के एकतरफा तरीके से परिभाषित LAC कभी स्वीकार नहीं: भारत ने चीन को दिया दो टूक जवाब

चीन ने एक बार फिर एलएसी के मसले पर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। लेकिन भारत ने पलटवार करते हुए चीन से सख्त अंदाज में कह दिया है कि बार-बार भटकाने की मंशा सफल नहीं होगी।

प्रचलित ख़बरें

बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

शाम तक कोई पोस्ट न आए तो समझना गेम ओवर: सुशांत सिंह पर वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर को मुंबई पुलिस ने ‘उठाया’

"साहिल चौधरी को कहीं और ले जाया गया। वह बांद्रा के कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपने पिता के साथ थे। अभी उनकी लोकेशन किसी परिजन को नहीं मालूम। मदद कीजिए।"

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

‘दीपिका के भीतर घुसे रणवीर’: गालियों पर हँसने वाले, यौन अपराध का मजाक बनाने वाले आज ऑफेंड क्यों हो रहे?

दीपिका पादुकोण महिलाओं को पड़ रही गालियों पर ठहाके लगा रही थीं। अनुष्का शर्मा के लिए यह 'गुड ह्यूमर' था। करण जौहर खुलेआम गालियाँ बक रहे थे। तब ऑफेंड नहीं हुए, तो अब क्यों?

RSS से जुड़े ब्राह्मण ने दिया था अंग्रेजों का साथ, एक मुस्लिम वकील लड़ा था भगत सिंह के पक्ष में – Fact Check

"भगत सिंह को फ़ाँसी दिलाने के लिए अंग्रेजों की ओर से जिस 'ब्राह्मण' वकील ने मुकदमा लड़ा था, वह RSS का भी सदस्य था।" - वायरल हो रहा मैसेज...

हाथरस मामले की जाँच के लिए SIT गठित, 7 दिन में रिपोर्ट: PM मोदी और CM योगी की बातचीत, फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जाँच के लिए 'स्पेशल टास्क फोर्स (SIT)' का गठन किया है।

ईशनिंदा में अखिलेश पांडे को 15 साल की सजा, कुरान की ‘झूठी कसम’ खाकर 2 भारतीय मजदूरों ने फँसाया

UAE के कानून के हिसाब से अगर 3 या 3 से अधिक लोग कुरान की कसम खाकर गवाही देते हैं तो आरोप सिद्ध माना जा सकता है। इसी आधार पर...

पिता-दादाजी ने किया हाथरस मामले की पीड़िता का अंतिम संस्कार, पुलिस भी रही मौजूद

दावा किया जा रहा था कि गाँव में हाथरस के अधिकारियों ने बलपूर्वक परिजनों को पीड़िता का अंतिम संस्कार करने के लिए दबाव बनाया।

जब एक फैसला, फैसला न होकर तुष्टिकरण बन गया: जानिए काशी, मथुरा की लड़ाई क्यों बाकी है…

आज जब अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन के बाद काशी-मथुरा की लड़ाई तेज़ हो गई है, हमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी याद करने की ज़रूरत है।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों को गोद लेने की योजना शुरू: 1 दिन से 1 साल तक कोई भी दे सकता है योगदान

“हाथियों के लिए कायाकल्प शिविर सोमवार को शुरू हुआ, जिससे उन्हें अपने नियमित काम से छुट्टी मिल गई। ये हाथी हमें पूरे साल पेट्रोलिंग, ट्रैकिंग और अन्य नियमित कार्यों में मदद करते हैं।”

डेनमार्क की PM के नाम से The Hindu ने भारत में कोरोना की स्थिति को बताया ‘बहुत गंभीर’, राजदूत ने कहा- फेक न्यूज़

'द हिन्दू' ने इस फर्जी खबर में लिखा है कि डेनमार्क की PM ने द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए सोमवार को भारत में COVID-19 की स्थिति के बारे में गहरी चिंता व्यक्त की है।

‘1991 का कानून कॉन्ग्रेस की अवैध मस्जिदों को जिंदा रखने की साजिश, 9 मस्जिदों का जिक्र कर बताया यहाँ पहले थे मंदिर’: PM को...

"द प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 कॉन्ग्रेस की हुकूमत में इसलिए बनाया गया, ताकि मुगलों द्वारा भारत के प्राचीन पवित्र मंदिरों को तोड़ कर बनाई गई अवैध मस्जिदों को हिंदुस्तान की जमीन पर एक विवाद के रूप में जिंदा रखा जाए और....."

हाथरस ‘गैंगरेप’ में लिबरल गिरोह ‘जाति’ क्यों ढूँढ रहा है? अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Hathras ‘gangrape’ case

इस बीच मौकापरस्त पत्रकार और नेता मामले को स्पिन देते हुए आरोपित की ‘जाति’ निकाल कर सामने ला रहे हैं कि वो उच्च जाति का होने की वजह से पुलिस ने रेप से इनकार किया।

1959 के एकतरफा तरीके से परिभाषित LAC कभी स्वीकार नहीं: भारत ने चीन को दिया दो टूक जवाब

चीन ने एक बार फिर एलएसी के मसले पर नया विवाद खड़ा करने की कोशिश की है। लेकिन भारत ने पलटवार करते हुए चीन से सख्त अंदाज में कह दिया है कि बार-बार भटकाने की मंशा सफल नहीं होगी।

‘उसे अल्लाह ने चुना था’: शार्ली एब्दो के पूर्व कार्यालय के बाहर हमला करने वाले आतंकी को PAK ने बनाया हीरो, जताई खुशी

"मुझे सुनकर बहुत अच्छा लगा। पैगंबर का सम्मान बचाने के लिए मैं अपनी जिंदगी और अपने पाँचों बेटों की कुर्बानी देने को तैयार हूँ।"

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,078FollowersFollow
326,000SubscribersSubscribe