Thursday, February 25, 2021
Home विचार राजनैतिक मुद्दे चंदा बाबू जैसों के डर का नाम है जंगलराज, आँकड़ों की लीपापोती से नहीं...

चंदा बाबू जैसों के डर का नाम है जंगलराज, आँकड़ों की लीपापोती से नहीं धुलेगा लालू का ये दाग

TISS के एक प्रोफेसर को यह पता होना चाहिए कि डेटा की क्वांटिटेटिव अनालिसिस से ही सारी बातें पता नहीं चलतीं। अगर वो सामाजिक डर के मापने में असफल रहे हैं, सिर्फ डेटा पर ही खेल कर, उन अपराधों के होने के तरीकों की व्याख्या नहीं कर पाते, तो उन्हें ऐसे संस्थानों में पढ़ा कर विद्यार्थियों को मूर्ख बनाना छोड़ देना चाहिए।

बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान एक शब्द का बार-बार इस्तेमाल हुआ है। यह है- जंगलराज। 1990 से 2005 तक के उस वक्त के लिए जिस दौरान बिहार में लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी का शासन रहा, जंगलराज कहा जाता है।

10 नवंबर 2020 को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। लिबरल बिरादरी के लिए एनडीए का सत्ता बचा लेना बड़ा झटका था, क्योंकि उन्होंने सपनों में लालू के जंगलराज के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले तेजस्वी यादव को शपथ लेते भी देख लिया था। इसी छटपटाहट में नतीजों के अगले दिन प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द प्रिंट‘ ने राकेश चंद्रा की एक लेख प्रकाशित की। चंद्रा टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस (TISS) के सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी, प्लानिंग और मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इस लेख के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि नीतीश कुमार और बीजेपी भले लालू-राबड़ी के राज को जंगलराज कहें, लेकिन यह झूठ है। अपनी बातों को साबित करने और ‘राजद के युवराज’ के दामन को पाक-साफ़ बताने के लिए लेखक ने आँकड़ों की बाजीगरी दिखाई है।

आँकड़ों के जरिए यह भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई है कि जंगलराज कोरी कल्पना के सिवा कुछ नहीं है। लिबरल मीडिया और कथित बुद्धिजीवी जमीन से कितने कटे हैं और अपनी ही कल्पनाओं के संसार में किस कदर उतराते रहते हैं, यह बिहार के चुनाव नतीजों ने पहले ही साबित कर दिया है। इस लेख के तथ्यों पर आने से पहले जरा इस बयान को गौर से पढ़िए;

“मरना तो है ही अब ईश्वर मार दे या शहाबुद्दीन”

करीब चार साल पहले यह बात एक पिता ने कही थी। इस पिता का नाम है- चंदा बाबू। चंदा बाबू के दो बेटों को शहाबुद्दीन ने तेजाब से नहलाकर मार डाला था। तीसरे बेटे की गवाह बनने पर हत्या कर दी थी। शहाबुद्दीन कौन था? वह लालू प्रसाद यादव की राजद का सांसद था। अपनी सामानांतर सरकार चलाता था। पुलिस पर भी गोलियाँ बरसाने से नहीं डरता था। वह नाराज हो जाता था तो सत्ता समर्पण कर देती थी। उसने यह खौफ किसके राजनीतिक राजनीतिक संरक्षण की वजह से बनाया था? सीधा सा जवाब है- लालू प्रसाद यादव।

आँकड़ों में चंदा बाबू के तीन बेटों का मारा जाना तो केवल तीन हत्या के रूप में दर्ज है। लेकिन, क्या यही आँकड़े यह भी बताते हैं कि उन्हें किस बेरहमी से मारा गया था? चंदा बाबू ने किस भय में जिंदगी गुजारी? इस घटना ने कितने माँ-बाप को डराया ? इसने कितने शहाबुद्दीन को कानून को रौंद देने की छूट दी?

डाटा भले यह बता दे कि कितनी हत्या हुई है। कितने किडनैप किए गए है। लेकिन, क्या उससे यह भी पता चलेगा कि उस दौर में हत्या और अपहरण एक ‘उद्योग’ बन चुका था? एक कारोबार था, पैसे कमाने का एक जरिया था? राजनेताओं, अधिकारियों और माफियाओं का ऐसा गठजोड़ इसके पहले कहीं देखा ही नहीं गया था? और सबसे बड़ी बात अपराध का साम्राज्य शहाबुद्दीन जैसे गुंडों और सालों के भरोसे चलता था?

16 अक्टूबर 1994 की रात त्रिवेणीगंज से राजद का विधायक रहा योगेन्द्र नारायण सरदार एक दलित युवती को उसके घर से उठाकर अपनी जीप में डालता है। उससे रेप करता है। डाटा में तो यह केवल रेप के तौर पर दर्ज होगा। लेकिन, इसने दलितों में किस कदर खौफ भरा होगा, महिलाएँ खुद को कितनी असुरक्षित और असहाय महसूस कर रही होंगी, कैसे बताएगा?

आम आदमी को तो छोड़िए। उस दौर में कौन सुरक्षित था। IAS अधिकारी बीबी विश्वास की पत्नी, माँ, भतीजी का लगातार दो साल तक यौन शोषण किया गया। जब मामला सामने आया तो आरोपित को बचाने में पूरी सरकार लग गई। कौन सा आँकड़ा इस हकीकत को बताएगा?

बाथे नरसंहार हो या अन्य जातीय नरसंहार, डाटा में वह केवल चंद लोगों की हत्या कही जाएगी। लेकिन इसने भूमिहारों का जनमानस किस वृहद रूप से प्रभावित किया, वह डाटा से सामने नहीं आएगा। ‘भूरा बाल साफ करो’ के नारे से सवर्णों में पैदा हुआ डर आँकड़े नहीं बताते।

आप गिनते जाएँगे पर उस दौर की ऐसी घटनाओं की फे​हरिस्त खत्म नहीं होगी। असल में जंगलराज एक अहसास है, जिसे केवल कुछ आँकड़ों के दम पर नहीं झुठलाया जा सकता। यह 2020 में भी कायम है। यही कारण है कि जब हमने अपने चुनावी कवरेज के दौरान गया के व्यापारियों से सवाल किया: गंदगी, जाम और जलजमाव आपके शहर की पहचान बन गई है, फिर भी आप बीजेपी को वोट क्यों करते हैं? उनका जवाब था- धंधा तो आराम से कर लेते हैं। यह डर नहीं होता कि कब कौन किधर से आएगा और गल्ले पर ही कॉलर पकड़ लेगा।

कायदे से तो TISS के एक प्रोफेसर को यह पता होना चाहिए कि डेटा की क्वांटिटेटिव अनालिसिस से ही सारी बातें पता नहीं चलतीं। अगर वो सामाजिक डर के मापने में असफल रहे हैं, सिर्फ डेटा पर ही खेल कर, उन अपराधों के होने के तरीकों की व्याख्या नहीं कर पाते, तो उन्हें ऐसे संस्थानों में पढ़ा कर विद्यार्थियों को मूर्ख बनाना छोड़ देना चाहिए।

जंगलराज जैसे नाम आँकड़ों पर नहीं, लोगों के भीतर एक अपराध को ले कर जगे डर के कारण मिलते हैं। जब पुलिस केस दर्ज न करे, केस दर्ज करने पर आपकी हालत चंदा बाबू जैसी हो जाए, तो वो डेटा में नहीं लिखा जाता।

जंगलराज का वह डर 2020 का बिहार भी महसूस करता है। यही कारण है कि केनार चट्टी के युवा हों या पटना की कॉलेज गर्ल्स, जिससे भी हमने अपने चुनावी कवरेज के दौरान बात की, वह इस बात को लेकर सशंकित थे कि यदि राजद सत्ता में लौटती है तो जंगलराज का वही डर फिर से लौटेगा।

ये शंकाएँ भी बेजा नहीं थी। 11 नवंबर को बेनीपट्टी विधानसभा के मलमल गाँव की 60 साल की एक महिला ने हमें बताया, “ढेनी टोल बला सब काइल्हे स घर धेने छै। सब छलै ललटेम बला स पाई लेने। हारि गेलै त नुकाएल छै। लेकिन रमनरेस्बा के बेटा भैर गाम गाड़ी पर हुर्र-हुर्र करैत छलै जे ककरो स मारि भ जै।”

सत्ता हाथ से छिटक जाने के बाद भी एक वर्ग विशेष के लोगों से इस बुजुर्ग महिला को दिख रहा डर भला कौन सा आँकड़ा बताएगा प्रोफेसर साहब? याद रखिएगा निर्भया बलात्कार केस भी डाटा में एक ही गिना जाएगा, लेकिन उस एक बलात्कार ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

LoC पर युद्धविराम समझौते के लिए भारत-पाक तैयार, दोनों देशों ने जारी किया संयुक्त बयान

दोनों देशों ने तय किया कि आज, यानी 24-45 फरवरी की रात से ही उन सभी पुराने समझौतों को फिर से अमल में लाया जाएगा, जो समय-समय पर दोनों देशों के बीच हुए हैं।

यहाँ के CM कॉन्ग्रेस आलाकमान के चप्पल उठा कर चलते थे.. पूरे भारत में लोग उन्हें नकार रहे हैं: पुडुचेरी में PM मोदी

PM मोदी ने कहा कि पहले एक महिला जब मुख्यमंत्री के बारे में शिकायत कर रही थी, पूरी दुनिया ने महिला की आवाज में उसका दर्द सुना लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ने सच बताने की बजाए अपने ही नेता को गलत अनुवाद बताया।

‘लोकतंत्र सेनानी’ आज़म खान की पेंशन पर योगी सरकार ने लगाई रोक, 16 सालों से सरकारी पैसों पर कर रहे थे मौज

2005 में उत्तर प्रदेश की मुलायम सिंह यादव की सपा सरकार ने आजम खान को 'लोकतंत्र सेनानी' घोषित करते हुए उनके लिए पेंशन की व्यवस्था की थी।

RSS कार्यकर्ता नंदू की हत्या के लिए SDPI ने हिन्दूवादी संगठन को ही बताया जिम्मेदार: 8 गुंडे पुलिस हिरासत में, BJP ने किया बंद...

BJP ने RSS कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में अलप्पुझा जिले में सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ‘हड़ताल’ का आह्वान किया है। 8 SDPI कार्यकर्ता हिरासत में हैं।

दिल्ली दंगों का 1 साल: मस्जिदों को राशन, पीड़ित हिन्दुओं को लंबी कतारें, प्रत्यक्षदर्शी ने किया खालसा व केजरीवाल सरकार की करतूत का खुलासा

ऑपइंडिया ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के स्थानीय लोगों से बात की, जिन्होंने दंगों को लेकर अपने अनुभव साझा किए और AAP सरकार के दोहरे रवैए के बारे में बताया।

केजरीवाल की रैली में ₹500 देने का वादा कर जुटाई भीड़, रूपए ना मिलने पर मजदूरों का हंगामा

वीडियो में देखा जा सकता है कि रैली में आने के लिए तय किए गए रुपए न मिलने के कारण मजदूर भड़के हुए हैं और पैसों की माँग कर रहे हैं। उनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

प्रचलित ख़बरें

उन्नाव मर्डर केस: तीसरी लड़की को अस्पताल में आया होश, बताई वारदात से पहले की हकीकत

विनय ने लड़कियों को कीटनाशक पिलाकर बेहोश किया और बाद में वहाँ से चला गया। बेहोशी की हालत में लड़कियों के साथ किसी तरह के सेक्सुअल असॉल्ट की बात सामने नहीं आई है।

ई-कॉमर्स कंपनी के डिलीवरी बॉय ने 66 महिलाओं को बनाया शिकार: फीडबैक के नाम पर वीडियो कॉल, फिर ब्लैकमेल और रेप

उसने ज्यादातर गृहणियों को अपना शिकार बनाया। वो हथियार दिखा कर रुपए और गहने भी छीन लेता था। उसने पुलिस के समक्ष अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

कला में दक्ष, युद्ध में महान, वीर और वीरांगनाएँ भी: कौन थे सिनौली के वो लोग, वेदों पर आधारित था जिनका साम्राज्य

वो कौन से योद्धा थे तो आज से 5000 वर्ष पूर्व भी उन्नत किस्म के रथों से चलते थे। कला में दक्ष, युद्ध में महान। वीरांगनाएँ पुरुषों से कम नहीं। रीति-रिवाज वैदिक। आइए, रहस्य में गोते लगाएँ।

महिला ने ब्राह्मण व्यक्ति पर लगाया था रेप का झूठा आरोप: SC/ST एक्ट में 20 साल की सज़ा के बाद हाईकोर्ट ने बताया निर्दोष

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, "पाँच महीने की गर्भवती महिला के साथ किसी भी तरह की ज़बरदस्ती की जाती है तो उसे चोट लगना स्वाभाविक है। लेकिन पीड़िता के शरीर पर इस तरह की कोई चोट मौजूद नहीं थी।”

UP: भीम सेना प्रमुख ने CM आदित्यनाथ, उन्नाव पुलिस के खिलाफ SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की FIR

भीम सेना प्रमुख ने CM योगी आदित्यनाथ और उन्नाव पुलिस अधिकारियों पर गुरुग्राम में SC/ST एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करवाई है।

लोगों को पिछले 10-15 सालों से थूक वाली रोटियाँ खिला रहा था नौशाद: पूरे गिरोह के सक्रीय होने का संदेह, जाँच में जुटी पुलिस

नौशाद के साथ शादी समारोह में लगे ठेकेदारों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। वो शहर की कई मंडपों और शादियों में खाना बना चुका है।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

291,994FansLike
81,854FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe