Thursday, May 13, 2021
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CPI(M) ने TMC के लोगों को मारा पर वो BJP से अच्छे: डैमेज कंट्रोल करने आए डेरेक ने किया बेड़ा गर्क

"हमारा फ़ोकस आज मोदी और शाह को हटाना है। बीजेपी के साथ फिर कभी लड़ लेंगे... भले ही तृणमूल कॉन्ग्रेस के कैडर को सीपीआइ (एम) ने पहले कभी मारा हो पर वो किसी भी दिन BJP से अच्छा विपक्ष है।"

राजनीति दलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, ज़िलाध्यक्ष, सचिव, महासचिव, प्रदेश सचिव, प्रदेश प्रभारी, उप प्रभारी जैसे पद तो होते हैं पर कुछ अति महत्वपूर्ण भूमिकाओं के लिए पद नहीं होते। तमाम दलों के नेताओं द्वारा समय-समय पर डैमेजर की भूमिका अदा करने की वजह से मुझे हमेशा यह लगता है कि हर दल के पास चीफ़ डैमेज कंट्रोलर, डेप्युटी डैमेज कंट्रोलर, रेज़िडेंट डैमेज कंट्रोलर, अकेज़नल डैमेज कंट्रोलर जैसे पद भी होने चाहिए। ऐसे पद रहने से दल के समर्थक, कार्यकर्ता और कैडरगण के लिए चिंता के कारण कम रहेंगे।

ऐसा हो जाए तो कम्यूनिकेशन चैनल बहुत कुछ पारदर्शी हो जाएगा। जैसे किसी नेता के बयान या किसी ख़ास ग्रुप के लोगों के लिए गाली वग़ैरह दिए जाने की वजह से डैमेज कितना गंभीर है इसका अंदाज़ा इस बात से लग जाएगा कि उसे कंट्रोल करने के लिए किसे आगे किया गया है। जैसे अगर चीफ़ डैमेज कंट्रोलर को आगे किया जाए तो लोग समझ जाएँगे कि डैमेज राष्ट्रीय स्तर का है और डेप्युटी डैमेज कंट्रोलर को आगे किया जाएगा तो पता चल जाएगा कि डैमेज प्रदेश स्तर का है।

जब तक राजनीतिक दल ऐसे पद नहीं बनाते तब तक उन्हें अनाधिकारिक डैमेज कंट्रोलर से काम चलाना पड़ रहा है। तृणमूल कॉन्ग्रेस को ही ले लीजिए। प्रशांत किशोर ने जब से क्लब हाउस में पार्टी के लिए महा डैमेज जैसा कुछ किया है, उसे कंट्रोल करने की कोशिशें लगातार हो रही हैं। अनअफ़िशियल डैमेज कंट्रोलर की अपनी भूमिका में यशवंत सिन्हा ट्विटर पर ओवरटाइम कर रहे हैं। अब ट्विटर पुराना प्लैटफॉर्म है तो सिन्हा जी की बातें सुनने के लिए वहाँ ट्विटर के पुराने चावल हैं जो अधिकतर उनकी बात पर उन्हें ट्रोल कर जाते हैं।

वैसे भी चूँकि प्रशांत किशोर ने डैमेज का यह बुलडोजर क्लब हाउस पर चलाया था तो कम्यूनिकेशन नीति के अनुसार उससे पैदा हुए मलवे को समेटने का काम ट्विटर पर करने का कोई औचित्य नहीं है। शायद इसलिए डेरेक ओ’ ब्रायन कल रात क्लब हाउस पर आए। उन्होंने प्रशांत किशोर द्वारा की गई बातों पर ठंडा पानी उड़ेलने की हर संभव कोशिश की। सब वही बातें कही जो क्लब हाउस के बाहर अधिकतर परंपरागत मीडिया के सामने कहते रहे हैं।

पर राजनीति में कम्यूनिकेशन का तक़ाज़ा है कि सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर आया नेता कुछ तो अलग कहेगा। कारण यह है कि सोशल मीडिया पर एक ही जगह कई लोग एक साथ प्रश्न पूछते हैं। नेता बेचारा करे भी तो क्या करे? प्रश्नों के तीर को मैच करने के लिए डेरेक को भी जल्दी-जल्दी तीर चलाने पड़े। ऐसे में उन्होंने ऐसी बातें कहीं जो उनके विवेक, समझ और मायूसी को दर्शाती हैं।

लोगों से बात करते हुए डेरेक ने महत्वपूर्ण राज खोला। बोले; कांग्रेस पार्टी ने कभी भी संविधान की अवमानना नहीं की। वे आगे बोले; सीपीआइ (एम) ने पहले भले ही तृणमूल कॉन्ग्रेस के कैडर को मारा हो पर वो किसी भी दिन बीजेपी से अच्छा विपक्ष है।

वहाँ उपस्थित एक मेम्बर ने उनकी इस बात पर कहा; उनकी बात सुनकर इच्छा हुई कि इक्स्क्यूज़ मी कहकर रूम से बाहर जाकर हँस आऊँ। माने एक एमपी द्वारा यह कहना कि कॉन्ग्रेस ने संविधान की अवमानना कभी नहीं की, वैसे ही है जैसे कोई पाकिस्तानी जनरल कहे कि पाकिस्तानी आर्मी ने देश में लोकतंत्र की जड़ों को मज़बूत करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है।

वैसे डेरेक की इन बातों से लगा जैसे उन्होंने चुनाव नतीजों के बाद की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रख कर यह बात कही हो। शायद तृणमूल कॉन्ग्रेस ऐसा कुछ नहीं कहता चाहती, जिससे उसे आवश्यकता पड़ने पर कॉन्ग्रेस या वाम दलों के पास जाने में असुविधा हो। वैसे भी प्रशांत किशोर ने सार्वजनिक मंचों पर विधानसभा चुनाव की जो तस्वीर बनाई है उसे देखते हुए डेरेक का यह बयान राजनीतिक व्यावहारिकता के अनुसार उनके अपने दल के पक्ष में ही है।

पर यहाँ डेरेक ने एक और महत्वपूर्ण बयान दिया। ऐसा बयान जो उनके दल की वर्तमान हालत की असली कहानी कहता है। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा; हमारा फ़ोकस आज मोदी और शाह को हटाना है। बीजेपी के साथ फिर कभी लड़ लेंगे।

लड़ाई तो आज है तो आज लड़ना होगा न? फिर कभी जो लड़ाई होगी वो दूसरी होगी। यह बयान क्या वर्तमान लड़ाई में तृणमूल की स्थिति के बारे में कुछ नहीं कहता? और अगर कहता है तो क्या कहता है? शायद यही कि दल ठोस ज़मीन पर नहीं है।

कोरोना फैलने की स्थिति में क्या आगे के चार चरणों के लिए चुनाव प्रचार बंद कर देना चाहिए? इस प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा; यदि चुनाव आयोग ऐसा करता है तो फ़ायदा बीजेपी को ही होगा क्योंकि बीजेपी के पास मज़बूत डिजिटल मीडिया प्रचार के साधन हैं और इसका लाभ उसे मिलेगा। चुनाव प्रचार को लेकर डेरेक ने जो कहा उससे इस चर्चा को विराम मिलेगा, जिसमें लोग चुनाव प्रचार के लिए रैलियों पर रोक की बात कर रहे हैं।

डेरेक के ये बयान महत्वपूर्ण तो हैं ही पर इस समय होने वाले चुनाव में उनके दल की स्थिति पर काफ़ी कुछ कहते भी हैं। पता नहीं जिस उद्देश्य से वे क्लब हाउस पर आए थे वह प्राप्त कर सके या नहीं पर यह अवश्य है कि कई मामलों में वे प्रशांत किशोर द्वारा कही गई बातों पर स्टैम्प लगाते हुए ही दिखे। अब देखना यह है कि डेरेक ओ’ब्रायन द्वारा किए गए इस डैमेज कंट्रोल को फ़ाइनल मान लिया जाएगा या किसी सीनियर डैमेज कंट्रोलर को आगे किया जाएगा?

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