Monday, April 19, 2021
Home विचार राजनैतिक मुद्दे 2-2 बार सीएम को धूल चटाई, राहुल गाँधी के करीब आते ही 10 महीने...

2-2 बार सीएम को धूल चटाई, राहुल गाँधी के करीब आते ही 10 महीने में 2 बार हारे

राहुल से करीबी होने की कीमत क्या होती है, रणदीप सिंह सुरजेवाला से बेहतर कॉन्ग्रेस में शायद ही कोई जानता हो। कभी ​हरियाणा के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देखे जाने वाले 'जाइंट किलर' सुरजेवाला 10 महीनों के भीतर दूसरी बार चुनाव हारे हैं।

कॉन्ग्रेसी हर वक्त गॉंधी परिवार और उसके युवराज राहुल गॉंधी की करीबी हासिल करने के तीन-तिकड़म में लगे रहते हैं। सोनिया गॉंधी जब से पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बनीं हैं, तब से राहुल के करीबियों को किनारे किए जाने की चर्चा भी जोरों पर है। लेकिन, राहुल से करीबी होने की कीमत क्या होती है, रणदीप सिंह सुरजेवाला से बेहतर कॉन्ग्रेस में शायद ही कोई जानता हो।

कभी ​हरियाणा के भावी मुख्यमंत्री के तौर पर देखे जाने वाले ‘जाइंट किलर’ सुरजेवाला 10 महीनों के भीतर दूसरी बार चुनाव हारे हैं। जनवरी में जींद उपचुनाव में वे तीसरे नंबर पर रहे तो अब कैथल की विधायकी हाथ ​से निकल गई है। चुनावी मैदान में उनका ग्राफ कॉन्ग्रेस प्रवक्ता बनने के बाद से गिरा है। यह जिम्मेदारी दिसंबर 2017 में पार्टी का अध्यक्ष बनते ही राहुल गॉंधी ने उन्हें थमाई थी। पार्टी के कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट का मुखिया भी बनाया। लेकिन, इससे सुरजेवाला की वो जमीन ही गायब हो गई जिसकी वजह से वे राहुल की नजरों में चढ़े थे। जिससे राहुल के करीबी होने का सुख मिला था।

सुरजेवाला को राजनीति विरासत में मिली है। पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला हरियाणा में मंत्री और कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। इसलिए, उन्होंने राजनीति के गुर तेजी से सीखे। 17 साल की उम्र में रणदीप हरियाणा प्रदेश युवा कॉन्ग्रेस के महासचिव बन गए थे। 21 की उम्र में बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की। 1987 से 1990 के बीच पिता के साथ रह सांगठनिक काम सीखा, जो उस समय हरियाणा कॉन्ग्रेस के मुखिया थे। मार्च 2000 में वे युवक कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। इस पद पर पहुॅंचने वाले वे हरियाणा से पहले शख्स थे। वे फरवरी 2005 तक युवक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे। यह इसके इतिहास का सबसे लंबा कार्यकाल है।

दिसंबर 2004 में रणदीप सुरजेवाला हरियाणा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। अगले साल हुए विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 67 सीटें हासिल कर राज्य की सत्ता में वापसी की। इसके बाद सुरजेवाला भी करीब 10 साल तक हुड्डा के कैबिनेट में बने रहे। 2014 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की करारी शिकस्त के बावजूद सुरजेवाला नहीं हारे।

राष्ट्रीय स्तर पर सुरजेवाला को सुर्खी 1996 और 2005 के हरियाणा विधानसभा चुनाव से मिली। दोनों बार उन्होंने ओम प्रकाश चौटाला को पटखनी दी। दिलचस्प ये है कि दोनों बार चौटाला बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे थे। इन्हीं नतीजों की वजह से उन्होंने जाइंट किलर के तौर पर सुर्खियॉं बटोरी और राजनीतिक विश्लेषक उनमें भविष्य का सीएम देखने लगे। ऐसे में राहुल गॉंधी ने जब उन्हें अपनी टीम में शामिल किया तो माना गया कि हरियाणा कॉन्ग्रेस के वे ही भविष्य हैं। लेकिन, समय का पहिया ऐसा घूमा कि इस बार सुरजेवाला उस कैथल से हार गए, जिस सीट पर 2005 से ही उनके परिवार का कब्जा था।

रणदीप सुरजेवाला अक्सर बताया करते हैं कि कैसे राजीव गॉंधी ने उनकी जान बचाई थी। बकौल सुरजेवाला- एक बार वे हैपेटाइटिस बी के चलते कोमा जैसी स्थिति में पहुँच गए थे। पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों को एक इंजेक्शन की जरूरत थी जो उस समय इंग्लैड में ही मिलता था। ऐसे वक्त में राजीव गॉंधी ने अपने एक पायलट दोस्त से बात की और इंग्लैंड से इंजेक्शन मॅंगाया गया। सो, इस बात की उम्मीद रखनी भी नहीं चाहिए कि सौम्य और मृदुभाषी सुरजेवाला कभी उस टीस को बयॉं करेंगे जो उन्होंने राहुल गॉंधी की नजदीकियों से हासिल किया। भले ही वे चुप रहें, लेकिन सोशल मीडिया में ऐसी प्रतिक्रियाओं की भरमार है, जिनमें कहा गया है कि महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव से राहुल गॉंधी के दूर रहने के कारण ही कॉन्ग्रेस की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। अब देखना है कि सुरजेवाला अपनी मुक्ति का मार्ग कैसे तलाशते हैं!

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जमातों के निजी हितों से पैदा हुई कोरोना की दूसरी लहर, हम फिर उसी जगह हैं जहाँ से एक साल पहले चले थे

ये स्वीकारना होगा कि इसकी शुरुआत तभी हो गई थी जब बिहार में चुनाव हो रहे थे। लेकिन तब 'स्पीकिंग ट्रुथ टू पावर' वालों ने जैसे नियमों से आँखें मूँद ली थी।

मनमोहन सिंह का PM मोदी को पत्रः पुराने मुखौटे में कॉन्ग्रेस की कोरोना पॉलिटिक्स को छिपाने की सोनिया-राहुल की नई कवायद

ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस ने मान लिया है कि सोनिया या राहुल के पत्र गंभीरता नहीं जगा पाते। उसके पास किसी भी तरह के पत्र को विश्वसनीय बनाने का एक ही रास्ता है और वह है मनमोहन सिंह का हस्ताक्षर।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने आज रात से 26 अप्रैल की सुबह तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

मोदी सरकार ने चुपके से हटा दी कोरोना वॉरियर्स को मिलने वाली ₹50 लाख की बीमा: लिबरल मीडिया के दावों में कितना दम

दावा किया जा रहा है कि कोरोना की ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख की बीमा योजना केंद्र सरकार ने वापस ले ली है।

पंजाब में साल भर से गोदाम में पड़े हैं केंद्र के भेजे 250 वेंटिलेटर, दिल्ली में कोरोना की जगह ‘क्रेडिट’ के लिए लड़ रहे...

एक तरफ राज्य बेड, वेंटिलेंटर और ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं, दूसरी ओर कॉन्ग्रेस शासित पंजाब में वेंटिलेटर गोदाम में बंद करके रखे हुए हैं।

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

"Fuck Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं।"

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने आज रात से 26 अप्रैल की सुबह तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

SC के जज रोहिंटन नरीमन ने वेदों पर की अपमानजनक टिप्पणी: वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन की माफी की माँग, दी बहस की चुनौती

स्वामी विज्ञानानंद ने SC के न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन द्वारा ऋग्वेद को लेकर की गई टिप्पणियों को तथ्यात्मक रूप से गलत एवं अपमानजनक बताते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणियों से विश्व के 1.2 अरब हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं हैं जिसके लिए उन्हें बिना शर्त क्षमा माँगनी चाहिए।

ईसाई युवक ने मम्मी-डैडी को कब्रिस्तान में दफनाने से किया इनकार, करवाया हिंदू रिवाज से दाह संस्कार: जानें क्या है वजह

दंपत्ति के बेटे ने सुरक्षा की दृष्टि से हिंदू रीति से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया था। उनके पार्थिव देह ताबूत में रखकर दफनाने के बजाए अग्नि में जला देना उसे कोरोना सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ठीक लगा।

जिसने उड़ाया साधु-संतों का मजाक, उस बॉलीवुड डायरेक्टर को पाकिस्तान का FREE टिकट: मिलने के बाद ट्विटर से ‘भागा’

फिल्म निर्माता हंसल मेहता सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं। इस बार विवादों में घिरने के बाद उन्होंने...

रोजा वाले वकील की तारीफ, रमजान के बाद तारीख: सुप्रीम कोर्ट के जज चंद्रचूड़, पेंडिग है 67 हजार+ केस

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिककर्ता के वकील को राहत देते हुए एसएलपी पर हो रही सुनवाई को स्थगित कर दिया।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,231FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe