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देर से शादी, बच्चे भी नहीं, ‘एग्स फ्रीज’ कर लो… उपासना कोनिडेला जो ज्ञान लड़कियों को दे रहीं, उससे माँ और बच्चे दोनों का भविष्य होता है बर्बाद

एंटरप्रेन्योर और एक्टर राम चरण की पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला ने IIT हैदराबाद के स्टूडेंट्स को एग्स फ्रीज करने की सलाह देकर एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा है कि महिलाओं को बाद में बच्चे पैदा करना चाहिए और अपने करियर पर ध्यान देने के लिए 'एग फ्रीज' कर लेना चाहिए। इसके पक्ष और विपक्ष में जबरदस्त प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।

अपोलो से जुड़ी और एक्टर राम चरण की पत्नी उपासना कोनिडेला ने महिलाओं को एग्स फ्रिज कर ‘जी लो अपनी जिंदगी’ टाइप-सी सलाह दी है। महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आजादी से अलग एक महिला के लिए एक बच्चे को दुनिया में लाना इमोशनल शारीरिक-मानसिक मामला भी है। 45 साल की महिला अगर बच्चे को जन्म देती है, तो बच्चे के शारीरिक मानसिक विकास के साथ-साथ उसके जवान होने पर दुनिया में अकेला पड़ जाने का खतरा भी होता है।

ऐसी सलाह लड़कियों को देना सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचाने जैसा है। परिवार, जिसे बच्चों की पहली पाठशाला कहा जाता है, उसके भी खिलाफ है।

आर्थिक तौर पर बात की जाए तो एग फ्रीज करने और उससे बच्चे पैदा करने की पूरी प्रक्रिया में करोड़ों खर्च आते हैं। ये अभिजात्य वर्ग के चोचले हो सकते हैं, आम महिला इसे वहन नहीं कर सकती। अगर किसी ने हिम्मत भी दिखाई, तो इसकी कोई गारंटी नहीं कि बच्चा पैदा हो ही जाएगा। ऐसे में महिला के डिप्रेशन, एन्जाइटी होने का खतरा पैदा हो जाता है।

इसके अलावा डॉक्टर तो महिलाओं को 30 की उम्र तक बच्चा पैदा कर लेने की सलाह देते हैं। इससे बच्चे के स्वस्थ और सुरक्षित दुनिया में आने की संभावना ज्यादा होती है।

क्या कहा उपासना कोनिडेला ने

उपासना कोनिडेला ने अपने X हैंडल पर शेयर किए एक वीडियो में कहा, “महिलाओं के लिए सबसे बड़ा इंश्योरेंस अपने एग्स फ़्रीज़ करना है। क्योंकि तब आप चुन सकती हैं कि कब शादी करनी है, कब बच्चे पैदा करने हैं, अपनी शर्तों पर, कब आप फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हैं।”

कोनिडेला ने साथ वाली पोस्ट में कहा कि जब उन्होंने IIT हैदराबाद के स्टूडेंट्स से पूछा कि उनमें से कितने शादी करना चाहते हैं, तो महिलाओं से ज्यादा पुरुषों ने हाथ उठाए। उन्होंने लिखा, “महिलाएं ज़्यादा करियर-फोकस्ड लग रही थीं। यह नया—प्रोग्रेसिव इंडिया है।”

उनके इस सलाह पर डॉक्टरों से लेकर इन्फ्लुएंसर समेत कई लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर कोई उनका समर्थन कर रहा है तो कोई विरोध में खड़ा है। लेकिन इस बहस के हर पहलू पर बात करने से पहले हम जान लेते हैं कि एग फ्रीज करना होता क्या है?

क्या होता है एग्स फ्रीज करना ?

एग फ्रिजिंग एक तरीका है, जिसमें महिलाएँ अपने एग्स को निकालकर उसे अस्पतालों में फ्रीज करवा सकती है और भविष्य में माँ बनने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है। जब महिला अपने करियर या दूसरे कारणों से तत्काल माँ बनना नहीं चाहती हैं, लेकिन उन्हें भविष्य में बच्चा भी चाहिए, तो एग फ्रीज करवाती हैं। इसमें काफी खर्च आता है और फ्रीज एग से बच्चे पैदा हो ही जाएँ, इसकी गारंटी नहीं होती। हर महिला का शरीर अलग होता है और उसकी हार्मोनल स्थिति भी अलग होती है।

25-30 साल मानी जाती है एग फ्रीज करने की ‘बेस्ट एज’

एक तो ये प्रक्रिया बहुत शारीरिक और मानसिक रूप से कष्ट देने वाली है। जब एग फ्रीज किया जाता है तो उससे पहले महिला को कई तरह के हॉर्मोन्स एक्टिव करने वाली दवाएँ और इंजेक्शन पड़ते हैं, इसका असर महिला के शरीर पर पड़ता है।

डॉक्टर के मुताबिक, “महिला की फर्टिलिटी बीस की उम्र में सबसे ज़्यादा होती है, तीस की उम्र में कम होती है और 35 के बाद तेजी से गिरती है। एग फ़्रीज़ करना कोई गारंटी नहीं है। यह एक जुआ है जिसमें सक्सेस रेट कम है।”

अगर कोई महिला अपने एग्स फ्रीज भी कर लेती है, तो भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इससे सफल एम्ब्रियो ट्रांसफर और सफल प्रेग्नेंसी होगी। जैसे-जैसे महिला की उम्र बढ़ती है, कई हेल्थ फैक्टर्स होते हैं जो सफल एम्ब्रियो ट्रांसफर और इम्प्लांटेशन को रोकते हैं।

इसके अलावा ये काफी महँगी प्रक्रिया है। इसके लिए शारीरिक-मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। साथ ही ये भी सच है कि ये एक तकनीक है, नेचुरल प्रक्रिया नहीं। एग निकालने के दौरान छोटी सी सर्जरी होती है। हालाँकि अब बड़े-बड़े अस्पतालों में सुरक्षित तरीके से एग फ्रीज कर लिया जाता है। इसके बाद जब आप बच्चा चाहते हैं तो अस्पताल उसे पिघलाता है। और आईवीएफ के लिए उपयोग लायक बनाता है।

एग फ्रीज करने की बेस्ट उम्र 25 से 30 साल मानी जाती है। इसे 10 से 15 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। यानी 25-30 साल में आप माँ नहीं बनना चाहती हैं, तो 40-45 साल तक माँ बन सकती हैं। ये तो हुई मेडिकल तकनीक, जिससे आप बच्चे पैदा करने की ख्वाइश पूरी कर सकती हैं। लेकिन एक महिला जो अकेले बच्चे को पैदा करना और संभालना चाहती हैं, वह 40-45 साल में माँ बन गई तो कैसे उसकी परवरिश करेगी। इसके अलावा अधिक उम्र में माँ बनने से कई बीमारियों के होने का खतरा होता है।

40-45 की उम्र में माँ बनना कितना मुश्किल?

40 साल के बाद शारीरिक रूप से महिला कमजोर होने लगती है। उसका गर्भाशय बच्चे को 9 महीने तक संभालने की स्थिति में है या नहीं, ये भी काफी महत्वपूर्ण है। अगर दवाईयों और डॉक्टरों की मदद से उसने बच्चे को जन्म दे भी दिया, फिर उसे फीड करना, उसकी देखभाल करना आसान नहीं होता। 40 साल के बाद महिलाओं का शरीर कमजोर पड़ने लगता है। हड्डियाँ को मजबूत करने के लिए डॉक्टर कैल्शियम और विटामिन की गोलियाँ खाने की सलाह देने लगते हैं। ऐसे में बच्चे के पीछे दौड़ना, उसे गोद में उठाना, उसकी अच्छी तरह देखभाल करना आसान नहीं है।

जब बच्चा स्कूल जाने लगता है तो उसके मन में कई सवाल पैदा होते हैं। वह घर पर खुद को अकेला महसूस करने लगता है। इस वक्त उसे पिता की कमी महसूस होती है। जाहिर है माँ कामकाज के लिए बाहर जाएँगी। ऐसे में बच्चे दोस्तों के साथ वक्त गुजारने की कोशिश करते हैं। बच्चा गलत संगत में भी पड़ सकता है।

बच्चे के लिए जीवन ‘एक मुश्किल सफर’ न बन जाए

बच्चा जब स्कूल से कॉलेज में जाने की उम्र में आता है, तब माँ 60 पार कर चुकी होती हैं। रिटायर होकर घर पर बच्चे के साथ होती हैं। लेकिन इस उम्र में बच्चे को गाइड करने वाले के साथ-साथ ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है, जो उसकी पीढ़ी को समझता हो। करियर में सहायक हो और उसकी भविष्य की योजना तैयार करने में मददगार हो। माँ के लिए ये काम आसान नहीं होता। न पिता, न भाई-बहन और न दूसरे रिश्तेदार, बेचारा बच्चा अपने आप में सिमट कर रह जाता है।

जब बच्चा करियर बनाने और शादी की उम्र में आए, तो माँ शायद दुनिया में भी नहीं रहे। क्या दुनियादारी के बीच बच्चे को सामाजिक, मानसिक, आर्थिक हर दृष्टि से अकेला छोड़ देना सही है। ऐसा नौजवान, जिसका दुनिया में कोई नहीं, आखिर वह जाए तो जाए कहाँ। अपने इमोशन को किसके साथ शेयर करे। अगर भविष्य को लेकर कोई फैसला लेना हो, तो किससे पूछे? अगर बच्चे को अपने पिता के बारे में भी पता हो। फिर भी बच्चा हर हाल में अकेला ही रहेगा।

खुद के लिए बच्चे के साथ ‘अन्याय’ न करें

जब कोई महिला ये फैसला लेती है कि उसे शादी नहीं करनी है, तो ठीक है। अगर कोई महिला फैसला लेती है कि उसे शादी करनी है, लेकिन बच्चे पैदा नहीं करना। ये भी चलता है। लेकिन, जानबूझ कर जब महिला अपने जीवन की स्वतंत्रता और आर्थिक सफलता पा जाने के बाद बच्चे पैदा करती है, तो न केवल वह उस बच्चे के साथ अन्याय कर रही है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचा रही है।

अपने मन मुताबिक खुद की जिंदगी जीने की आजादी सबकी है। आर्थिक और सशक्तिकरण के लिए पूरी कोशिश करें, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति की ‘कीमत’ पर नहीं, जो कि आपका बच्चा है।

लाखों खर्च करने के बाद भी सफलता की गारंटी नहीं

डॉक्टरों का मानना है कि अगर आप करोड़पति हैं और करोड़ों रुपए खर्च करने की स्थिति में हैं, तो ये रिस्क लिया जा सकता है। उनका मानना है कि एग फ्रीजिंग की सलाह देना आसान है लेकिन उसके खर्च को वहन करना उतना ही मुश्किल।

पिछले 30 सालों से गायनोकॉलोजिस्ट के रूप में काम कर रहे डॉक्टर राजेश पारिख ने कहा, “जब आपके बैंक में करोड़ों रुपए हों, तो एग फ़्रीज़िंग पर सलाह देना बहुत आसान है। IVF में हर साइकिल का खर्च लाखों में आता है। एग फ़्रीज़िंग में लाखों पहले से लगते हैं और सालाना स्टोरेज चार्ज भी। उपासना की सलाह सुनने वाली ज्यादातर जवान औरतें एक कोशिश भी नहीं कर सकतीं।”

गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन में कई ऐसे कपल्स देखे हैं, जिनका आईवीएफ सफल नहीं हो पाया। ये कपल्स लगातार फेल हो रहे आईवीएफ के साइकिल, निराशा और बढ़ते बिलों के कारण रोते हुए मिले।

सोशल मीडिया पर हो रही बहस

उपासना कोनिडेला ने 17 नवंबर 2025 को X पर अपनी पोस्ट शेयर की। 18 नवंबर तक 108,000 से ज्यादा बार देखी गईं। महिला सशक्तिकरण के नाम पर कुछ लोगों ने इसकी तारीफ की, वहीं बायोलॉजिकल और आर्थिक पहलू को लेकर सवाल उठाए गए।

कुछ लोगों ने यहाँ तक आरोप लगाया कि अपोलो हॉस्पिटल्स में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की वाइस चेयरपर्सन उपासना ने अपोलो अस्पताल की नींव रखी थी। सभी जानते हैं कि अपोलो अस्पताल में एग फ्रीज जैसी सुविधाएँ आसानी से उपलब्ध हैं। ऐसे में कहा जा रहा है कि उपासना ने जानबूझ कर अस्पताल को फायदा पहुँचाने और बाजार बढ़ाने के लिए ‘एग्स फ्रीज’ जैसे मुद्दों पर बात की। दरअसल उपासना ने खुद का उदाहरण देते हुए बातें कही थी।

कौन हैं उपासना कोनिडेला

उपासना अपोलो हॉस्पिटल्स में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी की वाइस चेयरपर्सन और एक्टर राम चरण की पत्नी हैं। दोनों ने 2012 में शादी की थी। जब उपासना 34 साल की थीं तब 2023 में उनकी बेटी हुई। एक बार फिर राम चरण और उपासना जुड़वाँ बच्चों के स्वागत के लिए तैयार हैं। उपासना ने 23 अक्टूबर को इंस्टाग्राम पर दिवाली पोस्ट करके बताया कि वे प्रेग्नेंट हैं।

उपासना अपोलो जैसी फैमिली हेल्थकेयर एम्पायर का हिस्सा हैं। वह फैमिली हेल्थ प्लान इंश्योरेंस TPA लिमिटेड की मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर भी काम करती हैं। वह अपोलो लाइफ की वाइस चेयरपर्सन हैं, जो अपोलो ग्रुप की एक वेलनेस-फोकस्ड ब्रांच है।

उन्होंने URLife शुरू किया, जो एक होलिस्टिक वेलनेस प्लेटफॉर्म है जिसका मकसद डिजिटल रिसोर्स के ज़रिए हेल्दी लाइफस्टाइल को बढ़ावा देना है। इसके अलावा उपासना बी पॉजिटिव मैगज़ीन की एडिटर-इन-चीफ भी हैं, जो अपोलो एम्पायर का ही पार्ट है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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