Thursday, November 26, 2020
Home विचार सामाजिक मुद्दे हिन्दुओं को बार-बार नीचा दिखाओ, क्योंकि वे हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाएँगे...रत्ती भर भी...

हिन्दुओं को बार-बार नीचा दिखाओ, क्योंकि वे हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाएँगे…रत्ती भर भी नहीं

सितम्बर 2018, फ़रवरी 2019 और मार्च 2019- एक कम्पनी तीन-तीन बार हिन्दुओं को नीचा दिखाने की कोशिश करती है लेकिन ट्विटर पर चूँ भर करने वाला हिन्दू असहिष्णु है। सहिष्णु कौन? अपने पैगम्बर पर कार्टून बन जाने पर 12 लाशें गिराने वाले।

दुनिया में जितने भी ब्रांड्स हैं, सबको अपना व्यापार चलना है। हाँ, व्यापार व कारोबार का रूप अलग हो जाता है। कारोबार चलाने के लिए मैनेजमेंट क्षेत्र से कई लोग हायर किए जाते हैं जो कम्पनी के प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए नई-नई रणनीतियाँ बनाते रहते हैं। ‘एक पर एक फ्री’ से लेकर ‘मुफ्त में कंघी, साबुन’ तक, कम्पनियाँ अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए तरह-तरह की रणनीति बनाती रही हैं। लेकिन, अब माल बेचने का एक नया चलन चला है। पर्व-त्योहारों पर बुरा हिन्दू और अच्छा ‘शांतिप्रिय’ पेश करने का चलन। नैतिकता के भारी डोज़ के साथ माल बेचने का चलन।

कुछ उदाहरण देखते हैं। हाल में सोशल मीडिया पर रेड लेबल चाय के एक ऐड को लेकर आपत्ति जताई गई। इसमें एक हिन्दू श्रद्धालु गणेश जी की मूर्ति ख़रीदने के लिए मुस्लिम मूर्तिकार के पास जाता है। न तो दर्शकों और न ही उस व्यक्ति को पता होता है कि मूर्तिकार का मज़हब क्या है? लेकिन, हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड को यही तो हाइलाइट करना है। मज़हब। मूर्तिकार का मज़हब। जैसा कि दिखाया गया है, गणेश पूजा करने वाले व्यक्ति को अपने धर्म के बारे में, गणेश जी के बारे में, उनके मूषक के बारे में जानकारियाँ नहीं होतीं।

वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम मूर्तिकार को सब पता होता है। उसके ज्ञान पर हिन्दू व्यक्ति को आश्चर्य होता है। लेकिन, तभी वह समय आ जाता है जब वीडियो में जो दिखाना है, वह दिखता है। अजान का समय होता है और वह बूढा मुस्लिम मूर्तिकार इस्लाम वाली स्कल कैप लगा लेता है, जिसे देख कर ‘असहिष्णु’ हिन्दू ग्राहक चौंक जाता है। वह बिना मूर्ति ख़रीदे वापस जाने लगता है क्योंकि हिन्दू तो असहिष्णु होते हैं न? वे मुस्लिम मूर्तिकार से पूजा के लिए मूर्ति क्यों ख़रीदेंगे? बस, यहीं पर कम्पनी का प्रोपगेंडा सफल हो जाता है। इस ऐड का वीडियो यहाँ है:

रेड लेबल चाय का ऐड जो सितम्बर 2018 में आया

फिर हिन्दू ग्राहक को अहसास होता है कि वह ग़लत था और वह अपनी ‘असहिष्णुता’ त्याग मूर्ति ख़रीद लेता है। क्या आप भी ऐसे हैं? क्या आप भी फूल-मालाएँ, पूजा के सामान से लेकर अगरबत्ती और दीपक ख़रीदने दुकानों पर निकलते हैं तो आपको भी दुकानदार का धर्म और मज़हब जानने की उत्सुकता रहती है? अगर आप बिहार से हैं तो क्या आप छठ से पहले बाजार में ऊँख और गागर निम्बू ख़रीदने जाते हैं तो क्या उस भीड़-भाड़ में आपको इससे मतलब होता है कि बेचने वाला/ वाली मुस्लिम है या ईसाई? नहीं न।

तो फिर आपको ऐसा क्यों दिखाया जा रहा है? ये कम्पनियाँ आपको आपकी किस ग़लती का एहसास करा रही हैं? आपको किस बात के लिए प्रायश्चित करने को कह रही है? रेड लेबल के ऐड में वो हिन्दू ग्राहक, जो कम्पनी के हिसाब से आपका प्रतिनिधि है, एक बूढ़े मुस्लिम को सामने देखते ही वहाँ से भागने क्यों लगता है? अगर हिन्दू कोई भी व्यवसाय कर रहा है तो वह पैसे के लिए करता है, लेकिन एक मुस्लिम कोई कारोबार कर रहा है तो वह इबादत क्यों है? इसका जवाब जानने से पहले कुछ और उदाहरण देखने पड़ेंगे।

रेड लेबल का एक और ऐड आया था। अगर आपको नहीं याद है तो याद कीजिए। उस दौरान प्रयागराज में कुम्भ चल रहा था और वह वीडियो भी कुम्भ के इर्द-गिर्द ही था। इसमें दिखाया गया था कि कुम्भ के मेले में लोग इसलिए जाते हैं ताकि वे अपने वृद्ध पिता को वहीं छोड़ आ सकें। ध्यान दीजिए, हज के दौरान ऐसा कभी नहीं होता। कुम्भ के दौरान ही होता है। इसी तरह ‘असहिष्णुता’ भी गणेश चतुर्थी के दौरान ही आती है, मुहर्रम के दौरान नहीं। कुम्भ वाले वीडियो में भी नालायक हिन्दू श्रद्धालु को अपनी ग़लती का एहसास होता है और वह अपने पिता को वापस ले आता है।

आपलोगों में से कइयों ने कुम्भ के दौरान पवित्र स्नान किया होगा। पूजा-पाठ किया होगा। कइयों ने अपने माता-पिता, सगे-सम्बन्धियों व मित्रों के साथ कुम्भ-स्नान किया होगा। बस एक सवाल है आप सभी से। आप में से कितनों ने अपने माता-पिता को कुम्भ में धक्का दे दिया? आप में से कितनों ने कुम्भ की योजना इसलिए बनाई ताकि घर के बुजुर्गों को वहाँ पर छोड़ कर आ सकें और फिर चैन की ज़िंदगी जी सकें? कुम्भ वाले वीडियो में, जो बेटा है, जो कम्पनी के हिसाब से आपका प्रतिनिधित्व करता है, उसे श्रद्धा या पूजा-पाठ से कुछ लेना-देना नहीं होता। उसे बस अपने बूढ़े बाप को धोखे से त्यागना है। वीडियो देखें:

आप कुम्भ क्यों जाते हैं? घर के बुजुर्गों को धोखे से त्यागने के लिए?

पहला वाला वीडियो सितम्बर 2018 में आया। या तो हिन्दुओं ने विरोध-प्रदर्शन नहीं किया या फिर उनके विरोध का कोई असर ही नहीं हुआ और 6 महीने बाद ही मार्च 2019 में उसी प्रकार का वीडियो बना कर हिन्दुओं को नीचा दिखाया गया। इसके कई कारण हो सकते हैं। हो सकता है हिंदुस्तान यूनिलिवर विरोध करने वाले हिन्दुओं को अशिक्षित मानती है। या फिर हो सकता है कि कम्पनी को लगता हो चंद लोग विरोध कर के भी क्या उखाड़ लेंगे। या यह भी हो सकता है कि कम्पनी ने हिन्दू ग्राहकों को ग्रांटेड लिया हो- उन्हें जूते से मारो फिर भी प्रोडक्ट तो हमारा ही ख़रीदेंगे।

कुम्भ जैसे सफल आयोजन, जो जनसँख्या, व्यवस्था और भागीदारी के हिसाब से संसार में सबसे अव्वल है- उसकी बदनामी कर अपना प्रोडक्ट बेचना कहाँ तक उचित है? हिन्दुओं की मानसरोवर यात्रा से जम्मू-कश्मीर के मुस्लिमों को रोज़गार मिलता है, जो पहाड़ी चढ़ने के लिए लाठियों से लेकर भोजन तक बेचते हैं। वे इंतज़ार करते हैं यात्रा का ताकि उनकी कमाई हो। वो इबादत के लिए नहीं, पेट के लिए ऐसा करते हैं। कितने हिन्दू हैं जो उनसे चीजें ख़रीदने से मना कर देते हैं?

यह आजकल का नया चलन है। हमने सर्फ एक्सेल का ऐड भी देखा था। उसमें एक हिन्दू लड़की एक मुस्लिम लड़के को नमाज पढ़ने के लिए ले जाती है। अपने मुस्लिम मित्र को ‘होली के दाग’ और रंगों से बचाते हुए वह ऐसा करती है। हिन्दुओं के बाद अब मुस्लिमों से भी सवाल पूछा जा सकता है। कितने मुस्लिम ऐसे हैं जो होली के दिन डर के मारे नमाज पढ़ने नहीं जा सकते? एक हिन्दू लड़की को हस्तक्षेप करना होता है तब वो ‘बेचारा’ मुस्लिम लड़का नमाज़ पढ़ने जा पाता है। होली ‘दागों’ वाला त्योहार है और नमाज पवित्र इबादत है। ये वीडियो भी देखें:

होली ‘दागदार’ लेकिन नमाज ‘पवित्र’

उपर्युक्त वीडियो फ़रवरी 2019 में आया था। सितम्बर 2018, फ़रवरी 2019 और फिर मार्च 2019- दिखाता है कि हिंदुस्तान यूनिलिवर को हिन्दुओं की भावनाओं, विरोध और विचारों से घंटा फ़र्क़ नहीं पड़ता। रत्ती भर भी नहीं। अगर ऐसा होता तो हिन्दुओं की भावनाओं का अपमान करने, उन्हें ‘असहिष्णु’ दिखाने और होली को ‘दागदार’ बताने की हिमाकत वह 6 महीने में 3 बार नहीं करते। यही वो सारे वीडियोज हैं, जिससे मैक्डोनाल्ड्स को मुस्लिम हितों को ध्यान में रखते हुए केवल ‘हलाल मीट’ उपलब्ध कराने को विवश कर देते हैं।

ऐसा नहीं है कि मुस्लिम त्योहारों को लेकर ऐड नहीं बनाए जाते। वीडियो बनते हैं। ख़ूब बनाते हैं। रमजान के समय भी सर्फ एक्सेल का वीडियो बना था। उस दौरान उनके मज़हबी भावनाओं का पूरा ख्याल रखा जाता है। रमजान के दाग बुरे नहीं होते। रमजान के कारण किसी हिन्दू को अपने घर से निकलने में परेशानी नहीं होती। रमजान के दौरान कोई बेटा अपने बाप को भीड़ में नहीं छोड़ देता। रमजान के दौरान ताजिया बनाने वाले को हिन्दू देख कर कोई मुस्लिम भागता नहीं। क्यों? क्योंकि वह सहिष्णु है। यह सब तो होली और कुम्भ में होता है न। कितना सम्मान करते हैं न ये हमारा, हमारे धर्म का और हमारे त्योहारों का?

इन सबका जवाब यह है कि हिन्दू समाज आज अपनी ही संस्कृति, दर्शन और इतिहास का मज़ाक बनाने वालों का पोषक बना हुआ है। जरा सोचिए कि वेटिकन में यीशु को लेकर ऐसा कोई वीडियो बनता है तो क्या होगा? सऊदी में पैगम्बर मुहम्मद को लेकर कुछ इस प्रकार का वीडियो बना तो क्या होगा? सऊदी और वेटिकन छोड़िए, दुनिया के किसी भी प्रान्त में ऐसा हुआ तो क्या होगा? भारत में मुहम्मद पर टिप्पणी करने पर कमलेश तिवारी को जेल होती है। चार्ली हैब्दो में पैगम्बर को लेकर कार्टून भर छप जाने से 12 लोगों को मार डाला जाता है। केरल में पादरी के यौन-शोषण पर इनामी कार्टून बनाने वाले को मिले पुरस्कार पर पुनर्विचार करने को मजबूर होना पड़ता है।

यह क्या दिखाता है? सहिष्णु कौन। अपने मज़हब, पैगम्बर और समाज पर एक टिप्पणी भर से जानें ले लेने वाले सहिष्णु। अपने पैगम्बर पर टिप्पणी भर से किसी व्यक्ति को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में भी जेल भिजवा देने वाले सहिष्णु। अपने बलात्कार आरोपित पादरी के ख़िलाफ़ कार्टून भर बन जाने से सरकार को हिला डालने वाले सहिष्णु। और हाँ, असहिष्णु कौन? अपने त्योहार को ‘दागदार’ बताने वालों का प्रोडक्ट ख़रीदने वाला असहिष्णु। ख़ुद की इमेज ‘असहिष्णु’ दिखाए जाने के बावजूद ट्विटर पर चूँ भर कर चुप हो जाने वाला असहिष्णु। ख़ुद को बुजुर्गों को भगा देने वाला नालायक वंश बताने पर भी सिर्फ़ देखते रहने वाला असहिष्णु।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

संविधान दिवस पर PM मोदी ने की एक राष्ट्र और एक चुनाव पर बात, कहा- ये केवल विमर्श का नहीं बल्कि देश की जरूरत

"हमारे निर्णय का आधार एक ही मानदंड होना चाहिए और वो है राष्ट्रहित। राष्ट्रहित ही हमारा तराजू होना चाहिए। हमें ये याद रखना है कि जब विचारों में देशहित और लोकहित की बजाय राजनीति हावी होती है तो उसका नुकसान देश को उठाना पड़ता है।"

संविधान दिवस: आरक्षण किसे और कब तक, समान नागरिक संहिता पर बात क्यों नहीं? – कुछ फैसले जो अभी बाकी हैं

भारत की धर्म निरपेक्षता के खोखलेपन का ही सबूत है कि हिंदुओं के पास आज अपनी एक 'होम लैंड' नहीं है जबकि कथित अल्पसंख्यक...

बंगाल: मर्डर, फायरिंग, बमबाजी, आगजनी… BJP के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ अध्यक्ष तक बने निशाना

बीजेपी (BJP) ने दक्षिण दिनाजपुर में अपने बूथ अध्यक्ष स्वाधीन राय की हत्या का आरोप सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर लगाया है।

डॉ. वर्गीज कुरियन: भारत में ‘ह्वाइट मनी’ की धारा बहाने वाला नायक, जिसने दिया ‘द टेस्ट ऑफ इंडिया’

26 नवंबर 1921 को कालीकट में पैदा हुए डॉ. वर्गीज कुरियन ने गुजरात के आनंद को कर्मभूमि बनाई। AMUL को दुनिया भर में एक ब्रांड… और भारत को डेयरी उत्पादन का नंबर #1 देश बनाया।

प्रचलित ख़बरें

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

ओवैसी को सूअर वाली स्वादिष्ट बिरयानी खिलाने का ऑफर, AIMIM नेता के बीफ बिरयानी पर BJP का पलटवार

"मैं आपको आज बिरयानी का निमंत्रण दे रहा हूँ। वाल्मिकी समुदाय के लोग पोर्क के साथ बिरयानी अच्छी बनाते हैं। आइए हम आपको स्वादिष्ट बिरयानी..."

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ – बलिदानी ओंबले के भतीजे का वो गीत… जिसे सुन पुलिस में भर्ती हुए 13 युवा

सामने वाले के हाथों में एके-47... लेकिन ओंबले बिना परवाह किए उस पर टूट पड़े। ट्रिगर दबा, गोलियाँ चलीं लेकिन ओंबले ने कसाब को...
- विज्ञापन -

2008 में फार्म हाउस में पार्टी, अब कर रहे इग्नोर: 26/11 पर राहुल गाँधी की चुप्पी 12 साल बाद भी बरकरार

साल 2008 में जब पाकिस्तान के आतंकी मुंबई के लोगों को सड़कों पर मार चुके थे उसके कुछ दिन बाद ही गाँधी परिवार के युवराज अपने दोस्त की संगीत रस्म को इंजॉय कर रहे थे।

’26/11 RSS की साजिश’: जानें कैसे कॉन्ग्रेस के चहेते पत्रकार ने PAK को क्लिन चिट देकर हमले का आरोप मढ़ा था भारतीय सेना पर

साल 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अजीज़ को उसके उर्दू भाषा अखबार रोजनामा राष्ट्रीय सहारा के लिए उत्कृष्ट अवार्ड दिया था। कॉन्ग्रेस में अजीज़ को सेकुलरिज्म का चमचमाता प्रतीक माना जाता था।

नाबालिगों से गैंगरेप, जबरन मुस्लिम बनाना, नाम बदल कर दोस्ती… SIT की वह रिपोर्ट जिसे वामपंथी नकार रहे हैं

ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यह ग्रूमिंग जिहाद के कुछ बेहद चर्चित मामले थे, जिनमें हिन्दू युवतियों को धोखा देकर उनके धर्मांतरण का प्रयास या उनका उत्पीड़न किया गया।

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

26/11 की नाकामी छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस चाटुकारों की फौज के साथ किसानों को भड़काने में जुटी, शेयर की पुरानी तस्वीरें

कॉन्ग्रेस की एकमात्र कोशिश है कि बस किसी तरह लोगों का ध्यान इस दिन किसी दूसरे मुद्दे की ओर भटक जाए और कोई उनकी नाकामयाबी व कायरता पर बात न करे।

केरल: राहुल गाँधी ने बाढ़ पीड़ितों के लिए भेजी थी राहत किटें, बंद दुकान में लावारिस मिलीं

बाढ़ प्रभावितों के लिए राहुल गाँधी की तरफ से भेजी गई राहत किटें केरल के एक दुकान में लावारिस मिली हैं।

दिल्ली के बेगमपुर में शिवशक्ति मंदिर में दर्जनों मूर्तियों का सिर कलम, लोगों ने कहते सुना- ‘सिर काट दिया, सिर काट दिया’

"शिव शक्ति मंदिर में लगभग दर्जन भर देवी-देवताओं का सर कलम करने वाले विधर्मी दुष्ट का दूसरे दिन भी कोई अता-पता नहीं। हिंदुओं की सहिष्णुता की कृपया और परीक्षा ना लें।”

शादी के लिए धर्म-परिवर्तन की धमकी पर 10 साल, कराने वाले मौलवियों/पुजारियों को 5 साल सजा: MP में सख्त विधेयक

शादी में धर्मांतरण का लालच देने, धमकाने और दबाव बनाने पर 10 साल की सज़ा का प्रावधान होगा। मध्य प्रदेश में इस विधेयक का मसौदा...

ट्विटर ने सुशील मोदी का ट्वीट किया डिलीट: लालू यादव को एक्सपोज़ करने में नियमों के उल्लंघन को बताया वजह

सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में कहा था कि जब उन्होंने वापस उस नंबर को मिलाया तो लालू प्रसाद यादव ने सीधे फोन उठाया था। जिसके बाद उन्होंने जवाब दिया था कि यह गंदा खेल सफल नहीं होगा।

‘ललुआ का सब आदमी इसके साथ हो गया है’: वह सीट जो बार-बार कह रही थी सरकार एनडीए की ही बनेगी

बिहार कवरेज के दौरान हम केवटी सीट पर बार-बार गए। यही वह सीट थी जहाँ पहली बार 'माई समीकरण' को दरकते देखा और एनडीए की वापसी शत-प्रतिशत तय लगी।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,404FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe