Homeराजनीतिमहबूबा और अब्दुल्ला पर PSA लगा दिया, कश्मीर भावनात्मक रूप से हमारे साथ नहीं:...

महबूबा और अब्दुल्ला पर PSA लगा दिया, कश्मीर भावनात्मक रूप से हमारे साथ नहीं: अधीर रंजन

महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला पिछले साल 5 अगस्त से ही नज़रबंद हैं। गुरुवार को पुलिस की मौजूदगी में मजिस्ट्रेट ने उस बंगले में जाकर महबूबा को PSA लगाए जाने का आदेश सौंपा जहाँ उन्हें नजरबंद रखा गया है।

विवादों में रहने के लिए कुख्यात कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी फिर एक बार कश्मीर पर दिए अपने बयान के कारण सुर्खियाँ बटोर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ़्ती तथा उमर अब्दुल्ला के खिलाफ जन सुरक्षा कानून (PSA) लगाए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए, अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कश्मीर सिर्फ भौगोलिक तौर पर भारत के साथ है न कि भावनात्मक तौर पर भी।

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता, बरहमपुर से कॉन्ग्रेस सांसद चौधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल ही संसद में उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के बारे में टिप्पणी की और रात में उन पर पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) लगा दिया गया। आप कश्मीर पर इस तरह राज नहीं कर सकते हैं। कश्मीर भौगोलिक तौर पर तो हमारा है लेकिन भावनात्मक रूप से नहीं।”

ज्ञात हो कि महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला पिछले साल 5 अगस्त से ही नज़रबंद हैं। गुरुवार को पुलिस की मौजूदगी में मजिस्ट्रेट ने उस बंगले में जाकर महबूबा को PSA लगाए जाने का आदेश सौंपा जहाँ उन्हें नजरबंद रखा गया है। बाद में अधिकारियों ने यह भी बताया कि उमर अब्दुल्ला के खिलाफ भी पीएसए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

आखिर क्या है PSA ?
इस कानून के तहत किसी भी आरोपी को बिना किसी अन्य आरोप या फिर ट्रायल के 2 साल तक हिरासत में रखा जा सकता है। इस कानून के तहत आरोपी व्यक्ति को बिना वारंट, किसी विशेष जुर्म के किए आरोपी होने के बिना भी बिना किसी समयसीमा के अरेस्ट या डिटेन कर रखा जा सकता है। बताते चलें कि उमर अब्दुल के पिता फारूक अब्दुल्ला को पहले ही इस कानून के तहत नज़रबंद करके रखा गया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -