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चुनाव से पहले जिनको बता रहे थे बीमार, जिनके खत्म होने के हो रहे थे दावे; नतीजों के बाद वही नीतीश कुमार बने ‘जननायक’: जानिए कैसे विपक्ष को किया साफ

बिहार ने एक बार फिर एनडीए और सीएम नीतीश कुमार पर भरोसा जताया है। सीएम के स्वास्थ्य पर लगातार विपक्ष ने सवाल खड़े किए। युवा नेता के रूप में तेजस्वी यादव को सीएम चेहरा घोषित किया गया, लेकिन जनता ने एनडीए के शासन को बेहतर मानते हुए अपना आशीर्वाद दे दिया। दरअसल जनता को 90 के दशक का लालू राज आज भी डराता है।

बिहार चुनाव शुरू होने से पहले नीतीश कुमार को थका हुआ मान लिया गया था लेकिन नतीजों में दिख रहा है कि आज भी बिहार को नीतीश कुमार की जरूरत है। उन्होंने सारे समीकरणों को खारिज कर दिया है। चुनाव से पहले उनके स्वास्थ्य को लेकर भ्रम फैलाए गए लेकिन नीतीश कुमार ने इस चुनाव में अपनी मेहनत से साबित कर दिया कि क्यों वह 20 वर्षों तक बिहार की राजनीति की धुरी बने हुए हैं।

इस चुनाव में जब बारिश के कारण नेता अपनी सभाओं में नहीं पहुँच पा रहे थे, सभाओं को मोबाइल से संबोधित कर रहे थे लेकिन जब हेलीकॉप्टर पटना से नहीं उड़ पा रहे थे। तो नीतीश कुमार ने सड़क से कुशेश्वर स्थान से अररिया संग्राम तक नाप दिया था। वो बारिश और खराब मौसम में सड़कों से सभाओं में पहुँचते रहे और लोगों से मिलते रहे। उन्होंने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया कि उनका स्वास्थ्य एकदम ठीक है।

बिहार की जरूरत बने नीतीश कुमार

जनता ने सीएम नीतीश कुमार पर अपना विश्वास जता कर तय कर दिया है कि आज भी वे ‘बिहार की जरूरत’ हैं। लालू राबड़ी का वो 15 सालों का राज, जब राजनीति का अपराधीकरण किया गया और जनता पर ताबड़तोड़ हमले किए गए। जनता को ये मंजूर नहीं है। इस ‘जंगल राज’ से राज्य को बाहर निकाल कर महिलाओं को सशक्त बनाने की उन्होंने पहल की।

जंगलराज की छवि से निकाल कर बिहार के विकास की नींव डाली। राज्य की जनता उसे नहीं भूली है। यही वजह है कि सभी समीकरणों को धत्ता बताते हुए जनता ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर भरोसा जताया।

महिला वोटरों का भरोसा बरकरार

बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा वोट किया। दरअसल नीतीश कुमार को महिलाओं ने अपना ‘रक्षक’ माना। शराबबंदी से लेकर साइकिल स्कीम तक का असर महिलाओं पर पड़ा है। साइकिल स्कीम के बाद राज्य में महिला शिक्षा 53 फीसदी से बढ़ कर 70 फीसदी हो गई है।

महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत रिकॉर्डतोड़ 71.6% रहा, जो 1951 के बाद सबसे अधिक है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इससे पता चलता है कि महिलाओं में वोटिंग को लेकर कितना उत्साह था और ये उत्साह एनडीए को वोट देने के लिए था। नतीजे इसका ऐलान कर रहे हैं।

शराबबंदी-कैश ट्रांसफर का पड़ा असर

महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए उनके खातों में दिए गए 10000 रुपए का असर भी था। साथ ही उम्मीद थी कि अगर सरकार फिर से सत्ता में आई तो 2 लाख रुपए रोजगार को और बढ़ाने के लिए महिलाओं को दिए जाएँगे। इसका काफी असर पड़ा।

इसके अलावा फ्री राशन, आवास और शराबबंदी, हर महीने खाते में आने वाले पैसों ने नीतीश-मोदी कॉम्बो पर महिलाओं में अपना विश्वास कायम रखा। महिलाओं ने साबित किया कि उन्होंने जाति से परे विकास के मॉडल को अपना समर्थन दिया।

साफ छवि और परिवारवाद से कोसों दूर

नीतीश कुमार के 20 साल के कार्य में उनकी छवि अभी भी बेदाग रही है। राज्य में नीतीश और केन्द्र में मोदी, इन दो चेहरों पर जनता विश्वास करती है। ये इस विधानसभा चुनाव में भी साबित हो गई है। सीएम नीतीश के परिवार का कोई सदस्य राजनीति में नहीं है। यही बात पीएम मोदी के साथ भी है।

महागठबंधन पर परिवारवाद के आरोप लगते हैं। लालू यादव का पूरा कुनबा यानी पति- पत्नी और बेटे- बेटियाँ आरजेडी को संभाल रहे हैं। कॉन्ग्रेस में गाँधी परिवार के युवराज राहुल गाँधी के साथ प्रियंका गाँधी वाड्रा लोकसभा के सदस्य हैं जबकि माँ सोनिया गाँधी राज्यसभा की सांसद हैं। पीएम मोदी से लेकर सीएम नीतीश कुमार तक ने इस मुद्दे को अपनी रैली में जोरशोर से उठाया। इसका परिणाम हुआ कि जनता ने विपक्षी दलों को नकारा।

सुशासन बाबू के दौर में विकास की बयार, डबल इंजन की सरकार

2005 में बिहार को जंगलराज से बाहर निकाल कर विकास की पटरी पर लाने वाले नीतीश कुमार के काल में जनता ने देखा है कि कैसे बिहार की सड़कें तेजी से विकसित हुई है। राज्य में एयरपोर्ट, मेट्रो का निर्माण हुआ। एम्स, आईआईटी जैसी संस्थानों का निर्माण हुआ। विकास के पथ पर बिहार के अग्रसर होने का असर रहा कि जनता ने वर्तमान सरकार पर अपना भरोसा जताया।

केन्द्र सरकार की आवास योजना, उज्जवला योजना, इज्जतघर जैसी योजनाएँ जमीन तक पहुँची। सीएम नीतीश के ‘लोकल टच’ के साथ किए गए डबल इंजन की सरकार के कार्य को लोगों ने सराहा। बिहार ने पहली बार इंजन एक्सपोर्ट किया, गजाजी में इंजीनियरिंग क्लस्टर बना इससे जनता में विश्वास पैदा हुआ।

नीतीश कुमार की सेहत पर सवाल को जनता ने नकारा

चुनाव से पहले नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर भ्रम फैलाए गए। आरजेडी के सीएम चेहरा तेजस्वी यादव ने उन्हें बीमार कहा। जन सुराज के प्रशांत किशोर ने उनके सेहत को लेकर बुलेटिन जारी करने की माँग की। इस भ्रम के बीच पटना में बारिश से हेलीकॉप्टर नहीं उतरा तो सड़क मार्ग से कुचेश्वर स्थान से अररिया तक सड़क मार्ग से पहुँचे और लोगों को संबोधित किया।

इस दौरान ज्यादातर नेताओं की रैलियाँ केंसिल कर दी गई थी। ऐसे प्रतिकूल मौसम में, स्वास्थ्य को लेकर अटकलों के बीच उन्होंने साबित कर दिया कि वो सेहतमंद हैं और राज्य की बागडोर संभालने में पुरी तरह सक्षम है। ग्राउंड लेवल पर नीतीश कुमार की मेहनत रंग लाई और एनडीए की सरकार बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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