Homeराजनीति‘अंग्रेजों के जासूस थे अटल बिहारी वाजपेयी, स्वतंत्रता सेनानियों को पकड़वाया’: दिवंगत पूर्व PM...

‘अंग्रेजों के जासूस थे अटल बिहारी वाजपेयी, स्वतंत्रता सेनानियों को पकड़वाया’: दिवंगत पूर्व PM की जयंती के दिन कॉन्ग्रेस नेता ने उगला ज़हर, बताया नरसंहार का दोषी

"वाजपेयी जी की नेहरू जी और डॉ मनमोहन सिंह ने प्रशंसा की थी। क्या वे गलत थे और क्या गौरव पाँधी सही हैं? यह पाँधी जैसे लोगों का इस्तेमाल करके प्रथम परिवार (गाँधी परिवार) जानबूझकर भारत के प्रतीक को कलंकित करने का काम कर रहा है।"

कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी (Gaurav Pandhi) ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अंग्रेजों का मुखबिर’ बताया। इस बयान को लेकर भाजपा कॉन्ग्रेस पर हमलावर है। भाजपा नेताओं ने कॉन्ग्रेस से माफी की माँग की है। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला (Shahzad Poonawala) ने कहा है कि वीर सावरकर से लेकर वाजपेयी जैसी हस्तियों का अपमान करना कॉन्ग्रेस की आदत बन गई है।

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता गौरव पाँधी ने ट्वीट कर अटल बिहारी वाजपेयी को ‘अंग्रेजों का मुखबिर’ बताने के साथ ही उन्हें भीड़ को उकसाने वाला बताया था। पाँधी ने ट्वीट कर कहा था, “1942 में, आरएसएस के अन्य सभी सदस्यों की तरह, अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का बहिष्कार किया और आंदोलन में भाग लेने वालों के खिलाफ अंग्रेजों के मुखबिर के रूप में काम किया।”

पाँधी ने यह भी कहा, “नेली हत्याकांड हो या बाबरी विध्वंस, वाजपेयी ने भीड़ को भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि आज भाजपा नेता हमेशा मोदी की तुलना गाँधी, पटेल या अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं से करते हैं न कि सावरकर, वाजपेयी या गोलवलकर से। वे सच जानते हैं।”

गौरव पाँधी के इस बयान के बाद भाजपा कॉन्ग्रेस पर हमलावर है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “देश आज भारत अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद कर रहा है। कॉन्ग्रेस ने आज अपना असली चेहरा दिखाया। वह सावरकर, अंबेडकर, अटल बिहारी जैसे व्यक्तित्वों का अपमान करने में विश्वास करती है।”

उन्होंने यह भी कहा है, “आज राहुल गाँधी के करीबी माने जाने वाले गौरव पाँधी ने वाजपेयी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह एक संयोग नहीं बल्कि एक प्रयोग है। यह कॉन्ग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है। यह उनकी आदत बन गई है। गौरव पाँधी को बर्खास्त करते हुए कॉन्ग्रेस को माफी माँगनी चाहिए।”

पूनावाला ने ट्वीट कर कहा है, “वाजपेयी जी की नेहरू जी और डॉ मनमोहन सिंह ने प्रशंसा की थी। क्या वे गलत थे और क्या गौरव पाँधी सही हैं? यह पाँधी जैसे लोगों का इस्तेमाल करके प्रथम परिवार (गाँधी परिवार) जानबूझकर भारत के प्रतीक को कलंकित करने का काम कर रहा है।”

एक अन्य ट्वीट में पूनावाला ने लिखा, “एक तरफ राहुल गाँधी वाजपेयी जी की समाधि पर जाकर उन्हें सम्मान देने का नाटक कर रहे हैं। दूसरी ओर जिस दिन हमने बाजपेयी जी को याद किया उसी दिन उनके करीबी सहयोगी गौरव पाँधी उनका अपमान कर रहे हैं। राहुल के दोगलेपन की पोल खुल गई अगर राहुल, कॉन्ग्रेस में वाजपेयी जी का सम्मान करते हैं तो उन्हें (गौरव पाँधी को) बर्खास्त कर दें।”

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता जितिन प्रसाद ने कहा है, “अटल जी जैसे नेताओं ने राष्ट्र के प्रति उनकी अमर प्रतिबद्धता के कारण राजनीतिक क्षेत्र में नेताओं का सम्मान और भारत के लोगों का प्यार हासिल किया है। क्या गौरव पाँधी के इस बयान को कॉन्ग्रेस की ओर से आधिकारिक मंजूरी मिली हुई है?”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -