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लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 साल: कॉन्ग्रेस को भी नहीं कबूल, बताया- राजनीति से प्रेरित; कट्टरपंथी और मुल्ले-मौलवी भी कर रहे विरोध

कॉन्ग्रेस नेता कहते हैं, “युवा महिलाएँ खासकर ग्रामीण इलाकों में अपने शैक्षिक और आर्थिक उत्थान के लिए कदम चाहती हैं। जाहिर तौर पर, सरकार ने इस प्रस्ताव को लाने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ उचित चर्चा नहीं की। इसलिए, कॉन्ग्रेस पार्टी, सरकार द्वारा इस तरह के विधेयक को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ है।”

लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने के लिए मोदी कैबिनेट ने जो प्रस्ताव पारित किया है, उससे कॉन्ग्रेस को समस्या है इसलिए अब वो इसका विरोध करेंगे। पार्टी को लगता है कि इस फैसले के पीछे की मंशा बेहद संदिग्ध और राजनीति से प्रेरित है।

इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए एआईसीसी के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा, मोदी सरकार का प्रस्ताव और जल्दबाजी में न्यूनतम आयु बढ़ाकर 21 करने का प्लान बहुत ज्यादा संदिग्ध और राजनीति से प्रेरित है। सरकार के इस प्रस्ताव का पहले से ही विभिन्न महिला प्रतिनिधियों और संगठनों ने भी कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अवैज्ञानिक और अवास्तविक बताते हुए खारिज कर दिया है।”

कॉन्ग्रेस नेता कहते हैं, “युवा महिलाएँ खासकर ग्रामीण इलाकों में अपने शैक्षिक और आर्थिक उत्थान के लिए कदम चाहती हैं। जाहिर तौर पर, सरकार ने इस प्रस्ताव को लाने से पहले विभिन्न हितधारकों के साथ उचित चर्चा नहीं की। इसलिए, कॉन्ग्रेस पार्टी, सरकार द्वारा इस तरह के विधेयक को आगे बढ़ाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ है।”

वेणुगोपाल ने कहा, “अगर मोदी सरकार हकीकत में गंभीर है और महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, तो इसके बजाय, लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण विधेयक को तुरंत लाया जाना चाहिए। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों में महिलाओं के लिए दो-तिहाई सीटों पर आरक्षण दे।”

वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार को महिला प्रतिनिधियों और संगठनों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाने के अपने प्रस्ताव पर व्यापक चर्चा शुरू करनी चाहिए। राजनीतिक मंशा पर बात करते हुए वह बोले कि ये प्रस्ताव सिर्फ किसानों के मुद्दों, लखीमपुर की घटनाओं, केंद्रीय मंत्री अजय से ध्यान हटाने के लिए लाया गया है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, वामपंथी दल, आईयूएमएल, एआईएमआईएम भी वो नाम हैं जो प्रस्ताव के विरोध में उतरी हुई हैं। कुछ मुस्लिम संगठन आरोप लगा रहे हैं कि ये प्रस्ताव लाकर सरकार ने पर्सनल लॉ में घुसपैठ की कोशिश की है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 साल करने का अहम फैसला लिया था और इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2020 को लाल किले की प्राचीर से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के दौरान लड़कियों की शादी की उम्र को 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष किए जाने संबंधी प्रस्ताव का ऐलान किया था। PM ने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा था, ”सरकार बेटियों और बहनों के स्वास्थ्य को लेकर हमेशा से चिंतित रही है। बेटियों को कुपोषण से बचाने के लिए जरूरी है कि उनकी शादी सही उम्र में हो।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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