‘प्रियंका गाँधी हमारी नेता, लेकिन वह हमारे खिलाफ ऑर्डर नहीं दे सकतीं, हमने पूरा जीवन कॉन्ग्रेस को दिया है’

"हम बागी नहीं हैं, मगर यह सच है कि निजी हितों को साध रहे कई नेता इस संगठन को डुबाने में लगे हुए हैं। पार्टी में वरिष्ठ लोग नए नेतृत्व द्वारा अपनी उपेक्षा से परेशान हैं और यह मीटिंग में भी साफ़ झलक रहा है।"

कॉन्ग्रेस पार्टी की अंदरूनी राजनीति और फूट अब सड़क पर आने लगी है। उत्तर प्रदेश में रविवार को कॉन्ग्रेस पार्टी के 11 बुज़ुर्ग नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अनुशासनहीनता के आरोप में निकाले गए इन नेताओं में एक नाम 87 वर्षीय रामकृष्ण द्विवेदी का भी है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के करीबी रह चुके द्विवेदी को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से 6 साल के लिए निकाल दिया गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी बुज़ुर्ग नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने का यह फैसला प्रियंका गाँधी के इशारों पर लिया गया है। इन बुज़ुर्ग नेताओं पर आरोप है कि इन्होंने सार्वजानिक रूप से अपनी ही पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व की साख पर बट्टा लगाने का काम किया है। इसके अलावा उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों, अलग से मीटिंग कराने और पार्टी लाइन का विरोध करने के आरोप लगे हैं।

कॉन्ग्रेस से निकाले गए बुज़ुर्ग नेताओं में पूर्व सांसद संतोष सिंह, पूर्व एमएलसी सिराज मेहँदी, यूपी के पूर्व गृहमंत्री रामकृष्ण द्विवेदी, पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी के मेम्बर राजेन्द्र सिंह सोलंकी, पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा, पूर्व विधायक नेकचन्द्र पाण्डेय, पूर्व विधायक हाफ़िज़ मोहम्मद उमर, पूर्व विधायक विनोद चौधरी, यूथ कॉन्ग्रेस के स्पीकर रहे स्वयं प्रकाश गोस्वामी और गोरखपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष संजीव सिंह शामिल हैं।

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इन नेताओं को पहले उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी की ओर से नोटिस भी दिया गया था। राज्य की कॉन्ग्रेस इकाई में प्रियंका गाँधी द्वारा पुराने नेताओं की जगह नए नेताओं को स्थापित करने के निर्णय से ये नेता नाराज़ चल रहे थे। बता दें कि पुराने नेताओं ने राज्य में अजय लल्लू को कॉन्ग्रेस चीफ बनाए जाने पर भी नाराजगी जताई थी।

एक प्रेस कांफ्रेंस में अपनी बात रखते हुए इन बुज़ुर्ग नेताओं ने खुद को पार्टी से किनारे किए जाने की बात कहते हुए खेद व्यक्त किया। इस दौरान अपनी बात रखते हुए रामकृष्ण द्विवेदी ने कहा कि पार्टी के संविधान के मुतबिक हमारा निलंबन अवैध और निंदनीय है। उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका हमारी नेता हैं मगर वह भी हमारे खिलाफ यूपीसीसी को कार्रवाई करने का ऑर्डर नहीं दे सकतीं। एक ज़माने में इंदिरा गाँधी के विश्वासपात्र रहे द्विवेदी ने गोरखपुर की मनीराम सीट पर हुए एक उप-चुनाव में मुख्यमंत्री कैंडिडेट त्रिभुवन नारायण सिंह को भारी मतों से पराजित किया था।

पार्टी से अलग बैठक रखने के आरोप पर द्विवेदी ने कहा कि राज्य में प्रियंका गाँधी का नियुक्त किया हुआ नेतृत्व उनकी उपेक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा, “प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धान्जलि अर्पित करने के लिए हम गोमती नगर में इकट्ठा हुए थे। इस दिन पार्टी ने राज्य के मुख्यालय में कार्यक्रम रखा था। पार्टी के दफ्तर पर तो हमारी उपेक्षा ही होती है इसलिए हम अलग से मिले भी तो इसी बात पर चर्चा हुई कि कैसे पार्टी को मजबूती प्रदान की जाए।”

उन्होंने आगे कहा कि हम बागी नहीं हैं, मगर यह सच है कि निजी हितों को साध रहे कई नेता इस संगठन को डुबाने में लगे हुए हैं। पार्टी के दावे के उलट द्विवेदी ने कहा कि उन्हें अब तक ऐसा कोई नोटिस पार्टी की ओर से नहीं मिला है, जिसका उन्हें 24 घंटे में जवाब देना हो।

निष्कासित किए गए अन्य नेताओं ने भी पार्टी की ओर से लिए गए इस फैसले पर अपनी नाराज़गी जताई है। मामले पर बोलते हुए पूर्व विधायक भूधर नारायण मिश्रा ने कहा कि पार्टी में वरिष्ठ लोग नए नेतृत्व द्वारा अपनी उपेक्षा से परेशान हैं और यह मीटिंग में भी साफ़ झलक रहा है। वहीं एक अन्य निष्कासित बुज़ुर्ग नेता और सांसद रह चुके संतोष सिंह ने कहा कि वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेताओं में किसी तरीके से भी असुरक्षा का भाव बिलकुल भी नहीं है।

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