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‘RSS को अपनेपन की भावना से देखता हूँ’: पढ़ें- संघ की शाखा में जाकर क्या बोले थे अंबेडकर और संगठन से कैसा रहा उनका रिश्ता

डॉ. बी.आर. अंबेडकर को PM मोदी की श्रद्धांजलि राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान को दर्शाती है। डॉ. अंबेडकर ने RSS की महाराष्ट्र की शाखा में जाकर संगठन की तारीफ की थी।

पीएम मोदी ने 14 जनवरी को भारत रत्न डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान निर्माता के देश निर्माण की कोशिशें बहुत मोटिवेट करने वाली हैं। उनका जीवन और काम आने वाली पीढ़ियों को एक न्यायपूर्ण और आगे बढ़ने वाला समाज बनाने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

आरएसएस की शाखा में आए थे डॉक्टर अंबेडकर

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर 85 साल पहले महाराष्ट्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की एक शाखा में आए थे। संघ के विश्व संवाद केंद्र (वीएसके) ने विदर्भ में कहा कि अंबेडकर ने अपने दौरे के दौरान कहा था कि कुछ मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद वह आरएसएस को अपनेपन की भावना से देखते हैं। उन्होंने दौरा कर उन आरोपों को भी झुठलाया, जो उस वक्त सामाजिक संगठन पर लग रहे थे। यह आरएसएस की निस्वार्थ योगदान को दर्शाता है। आरएसएस पर तीन बार प्रतिबंध लगा, लेकिन यह बेदाग बाहर निकला। उस वक्त संगठन को लेकर मनगढ़ंत सूचना फैलाई गई थी।

सतारा की शाखा में पहुँचे थे डॉक्टर अंबेडकर

डॉ. अंबेडकर ने दो जनवरी 1940 को सतारा जिले के कराड में आरएसएस की शाखा का दौरा किया। उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित भी किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “हालाँकि कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन मैं संघ को अपनेपन की भावना से देखता हूँ।” 9 जनवरी, 1940 को पुणे के मराठी दैनिक ‘केसरी’ में डॉ. आंबेडकर के आरएसएस शाखा का दौरा करने के बारे में एक खबर प्रकाशित हुई थी।

(साभार-Arise Bharat)

आरएसएस विचारक दत्तोपंत ठेंगड़ी की किताब ‘डॉ. अंबेडकर और सामाजिक क्रांति की यात्रा’में भी इसका जिक्र किया गया है, इसमें आरएसएस और डॉ. अंबेडकर के बीच संबंधों के बारे में बताया गया है। किताब के आठवें अध्याय में ठेंगड़ी कहते हैं कि डॉ. आंबेडकर को आरएसएस के बारे में पूरी जानकारी थी। संघ के स्वयंसेवक नियमित रूप से अंबेडकर के संपर्क में रहते थे और उनसे चर्चा करते थे।

डॉक्टर अंबेडकर यह भी जानते थे कि आरएसएस हिंदुओं को एकजुट करने वाला एकमात्र अखिल भारतीय संगठन है। वह इस बात से भी वाकिफ थे कि हिंदुत्व की बात करने वाले दूसरे संगठनों से आरएसएस बिल्कुल अलग है। आरएसएस के विकास की गति को लेकर उनके मन में संदेह था। इस दृष्टि से डॉ. आंबेडकर और आरएसएस के बीच संबंधों का विश्लेषण करने की आवश्यकता है।

(साभार-Arise Bharat)

संघ ने इस आरोप को भी गलत साबित कर दिया है कि वह केवल ब्राह्मणों के लिए है। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने 1934 में वर्धा में आरएसएस शिविर का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने महसूस किया कि संघ में विभिन्न जातियों और धर्मों के स्वयंसेवक शामिल थे। वहाँ उन्होंने खुद अनुभव किया कि शिविर में कोई भी स्वयंसेवक अपनी या अन्य स्वयंसेवकों की जाति जानने में दिलचस्पी नहीं रखता था। सभी के मन में एक ही भावना थी कि हम सभी हिंदू हैं। इसलिए स्वयंसेवकों ने अपनी दैनिक गतिविधि सहजता से की।

यह देख कर गाँधीजी बहुत हैरान हुए। उन्होंने आरएसएस संस्थापक डॉ. हेडगेवार के साथ वार्ता की और अस्पृश्यता उन्मूलन कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन के लिए उन्हें बधाई दी।

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Rukma Rathore
Rukma Rathore
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