Sunday, July 3, 2022
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गुजरात चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे ‘अंडरग्राउंड’ हुए हार्दिक पटेल: लिखा- शीर्ष नेतृत्व मोबाइल में बिजी, नेताओं का ध्यान चिकन सैंडविच पर

हार्दिक बताते हैं कि जब वो शीर्ष नेतृत्व से मिले और गुजरात की समस्या पर बात करनी चाही तो साफ पता चला कि उनका ध्यान गुजरात की परेशानियों से ज्यादा मोबाइल व बाकी की चीजों पर है। इतना ही नहीं, वह कहते हैं कि जब भी देश संकट में था और कॉन्ग्रेस नेतृत्व की जरूत पड़ी तो वो विदेश में थे।

गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका देते हुए हार्दिक पटेल ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। अपने इस्तीफे की जानकारी हार्दिक ने ट्वीट के जरिए दी। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कॉन्ग्रेस से अलग होकर वह गुजरात के लिए सच में सकारात्मक काम कर पाएँगे। सूत्रों के अनुसार, इस इस्तीफे के बाद से वह ‘अंडरग्राउंड’ हो गए हैं।

हार्दिक पटेल ने 18 मई को अपने ट्विटर पर हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में पत्र साझा करते हुए लिखा, “आज मैं हिम्मत करके कॉन्ग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूँ कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।”

अपने बयान में हार्दिक पटेल ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी देशहित व समाज हित के बिलकुल विपरीत कार्य कर रही है। उन्होंने कॉन्ग्रेस में एक सक्षम और मजबूत नेतृत्व न होने को लेकर अपनी शिकायत की। साथ ही कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी सिर्फ विरोध की राजनीति कर रही है जबकि देश के लोग विकल्प चाहते हैं जो उनके भविष्य के लिए सोचता हो।

हार्दिक ने शिकायत की कि कॉन्ग्रेस अयोध्या से लेकर अनु्च्छेद 370, जीएसटी से लेकर सीएए तक के मुद्दे पर केवल केंद्र का विरोध करती रही। वह कहते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को आज देश का हर राज्य रिजेक्ट कर चुका है, इसकी वजह यही है क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी और पार्टी का नेतृत्व जनता के समक्ष एक रोडमैप प्रस्तुत नहीं करता। उनके शीर्ष नेतृत्व में ही गंभीरता की भारी कमी है।

हार्दिक बताते हैं कि जब वो शीर्ष नेतृत्व से मिले और गुजरात की समस्या पर बात करनी चाही तो साफ पता चला कि उनका ध्यान गुजरात की परेशानियों से ज्यादा मोबाइल व बाकी की चीजों पर है। इतना ही नहीं, वह कहते हैं कि जब भी देश संकट में था और कॉन्ग्रेस नेतृत्व की जरूत पड़ी तो वो विदेश में थे। ये व्यवहार बिलकुल ऐसा ही है जैसे कॉन्ग्रेस को गुजरात से नफरत हो।

उन्होंने पार्टी की स्थिति देख दुख जताया और कहा कि कार्यकर्ता 500-600 किलोमीटर अपने खर्चे पर यात्रा करके जनता के बीच जाते हैं। लेकिन पार्टी के बड़े नेताओं की चिंता होती है कि पार्टी नेतृत्व ने चिकन सैंडविच खाया या नहीं। वह कहते हैं कि उन्हें कई युवाओं ने पूछा था, ‘तुम ऐसी पार्टी में क्यों हो जो हर समय हर क्षेत्र में गुजरातियों का अपमान करती है।’ हार्दिक मानते हैं कि कॉन्ग्रेस ने बुरी तरह युवाओं का भरोसा तोड़ा है। यही वजह है कि कोई युवा कॉन्ग्रेस के साथ दिखना भी नहीं चाहता।

गुजरात में कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं पर हार्दिक ने आरोप लगाया कि उन लोगों ने जानबूझकर गुजरातियों के मुद्दे को कमजोर किया है और इसके बदले आर्थिक फायदा उठाया है। वह कहते हैं कि कॉन्ग्रेस गुजरात के लिए कुछ भी अच्छा नहीं करना चाहती। इसलिए जब उन्होंने गुजरात हित में कदम उठाए तो उनका भी तिरस्कार किया गया। हार्दिक पटेल ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कॉन्ग्रेस का नेतृत्व प्रदेश, समाज और युवाओं के लिए द्वेष भाव रखता है।

हार्दिक पटेल की कॉन्ग्रेस से नाराजगी

बता दें कि गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने साल 2017 में गुजरात विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस को समर्थन दिया था। इसके बाद साल 2019 में 12 मार्च को वो आधिकारिक तौर पर पार्टी से जुड़े थे। कुछ दिन से उनकी पार्टी से अनबन मीडिया में थी। उन्होंने पीछे दिनों कहा था कि पार्टी में उनकी जगह ऐसी है जैसे नए दूल्हे की नसबंदी करवा दी जाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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