Wednesday, April 1, 2020
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’75 मुसलमानों की कब्र के ऊपर राम मंदिर, क्या यह सही होगा?’ – अयोध्या मामले में ‘भावनात्मक’ पेंच की साजिश!

"आज भले ही मौके पर कब्र न दिख रही हो लेकिन वहाँ की 4-5 एकड़ जमीन पर मुस्लिमों की कब्रें थीं, ऐसे में वहाँ मंदिर का कैसे निर्माण किया जा सकता है।"

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

सालों बाद अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा सुलझा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन भी कर दिया। मगर राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू होने से पहले अब एक और पेंच फँसता दिखाई दे रहा है या पेंच फँसाने की साजिश के तहत कोशिश की जा रही है। इस के तहत अयोध्या के 9 मुस्लिम निवासियों ने नव-नियुक्त श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र को पत्र लिखा है, जिसमें अपील की गई है कि बाबरी स्थल के आसपास के 1,480 वर्ग मीटर के क्षेत्र में मुसलमानों के कब्रिस्तान पर नए राम मंदिर का निर्माण न करें।

पत्र में कहा गया है कि सरकार द्वारा 67 एकड़ की जमीन राम मंदिर के लिए उपयोग करना मुस्लिमों के दावे को ‘पूरी तरह से छीनना’ और कानून के विपरीत है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार चिट्ठी में कहा गया है, “आज भले ही मौके पर कब्र न दिख रही हो लेकिन वहाँ की 4-5 एकड़ जमीन पर मुस्लिमों की कब्रें थीं, ऐसे में वहाँ मंदिर का कैसे निर्माण किया जा सकता है। 1949 में जब वहाँ अंदर भगवान राम की मूर्तियाँ रखी गईं से लेकर 1992 तक जब ढाँचा ढहाया गया, उस जगह का इस्तेमाल अलग तरह से होता रहा है।”

9 मुस्लिम नागरिकों ने अपने वकील के माध्यम से ट्रस्ट को भेजी गई चिट्ठी में कहा, “केंद्र सरकार की ओर से साल 1993 में अयोध्या में अधिग्रहित की गई 67 एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए दी गई है। लेकिन इस जमीन पर मुस्लिमों की कब्रें थीं। केंद्र ने इस पर विचार ही नहीं किया कि मुस्लिमों की कब्र पर भव्य राम मंदिर नहीं बन सकता। यह धर्म के खिलाफ है।”

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चिट्ठी में ट्रस्टी से कहा गया है, “आप सभी समाज के जागरूक लोग हैं। आप हिंदू/सनातन धर्म के ज्ञाता हैं। आपको इस पर जरूर विचार करना चाहिए कि क्या राम मंदिर की नींव मुस्लिमों की कब्र पर रखी जा सकती है। इसका फैसला ट्रस्ट के मैनेजमेंट को करना होगा।” इसके साथ ही चिट्ठी में ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि साल 1855 के दंगों में 75 मुस्लिम मारे गए थे और सभी को यहीं दफन किया गया था।

बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठन के ऐलान के बाद से ही हलचल तेज है। बजट सत्र 2020 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ऐलान किया था कि अयोध्या में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन राम मंदिर ट्रस्ट को दी गई है।

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