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इजरायल से भी मिला मेडल, फिलिस्तीन ने भी दिया था सम्मान: PM मोदी का ग्लोबल जलवा बरकरार, 10 सालों में 33 अंतरराष्ट्रीय अवार्ड्स पाकर रचा इतिहास

चाहे भूटान के राजा का सड़क पर खड़े होकर स्वागत करना हो या रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत को 'भाग्यशाली' बताना, ये केवल औपचारिकताएँ नहीं हैं। ये उस नए भारत की तस्वीर है जिसे पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों में गढ़ा है।

आज के दौर में जहाँ दुनिया गुटों में बँटी हुई है, वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति और व्यक्तिगत करिश्मे से अंतरराष्ट्रीय राजनीति की परिभाषा बदल दी है। यह पीएम मोदी के व्यक्तित्व का ही जादू है कि रूस-यूक्रेन युद्ध हो या मध्य-पूर्व का तनाव, हर जगह शांति के लिए दुनिया भारत की ओर देखती है।

हाल ही में इजरायल की संसद में मिला सर्वोच्च सम्मान और इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स का आँकड़ा पार करना यह साबित करता है कि मोदी केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि एक वैश्विक ‘ब्रैंड’ बन चुके हैं।

इजरायल और फिलिस्तीन: संतुलन साधने की अद्भुत कला

दुनिया के नक्शे पर इजरायल और फलस्तीन दो ऐसे नाम हैं जिनकी कट्टर दुश्मनी जगजाहिर है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति से वह कर दिखाया जो वैश्विक कूटनीति में लगभग नामुमकिन माना जाता था।

पीएम मोदी की इस सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि उन्हें इन दोनों ही धुर विरोधी देशों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त हुआ है। एक ओर जहाँ साल 2018 में फिलिस्तीन ने उन्हें अपने सबसे बड़े पुरस्कार ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ से नवाजा था, वहीं दूसरी ओर फरवरी 2026 में अपनी ऐतिहासिक इजरायल यात्रा के दौरान उन्हें वहाँ की संसद ‘केसेट’ के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया।

विशेष बात यह है कि पीएम मोदी इस प्रतिष्ठित पदक को पाने वाले दुनिया के पहले नेता बने हैं। एक ही राजनेता का इन दो परस्पर विरोधी राष्ट्रों द्वारा पलक-पाँवड़े बिछाकर स्वागत करना और उन्हें अपने उच्चतम नागरिक व संसदीय सम्मानों से विभूषित करना, निस्संदेह पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक जीत का सबसे सशक्त उदाहरण है।

डिजिटल किंग: 100 मिलियन फॉलोअर्स वाले पहले राजनेता

सोशल मीडिया की डिजिटल दुनिया में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई सानी नहीं है, जहाँ उन्होंने अपनी लोकप्रियता के झंडे गाड़ते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन (10 करोड़) फॉलोअर्स का जादुई आँकड़ा पार करने वाले वे दुनिया के पहले राजनेता और विश्व नेता बन गए हैं।

इंस्टाग्राम पर पीएम मोदी के 100 मिलियन फॉलोअर्स

पीएम मोदी की इस वैश्विक स्वीकार्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी तुलना में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फॉलोअर्स की संख्या मात्र 43.2 मिलियन के करीब है, यानी मोदी को चाहने वालों की तादाद ट्रंप से दोगुनी से भी कहीं अधिक है।

यही नहीं, दुनिया के अन्य दिग्गज नेता जैसे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो (15 मिलियन) और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला (14.4 मिलियन) भी प्रधानमंत्री मोदी की इस विराट डिजिटल लोकप्रियता के आसपास कहीं नहीं टिकते। यह उपलब्धि दर्शाती है कि पीएम मोदी न केवल नीतिगत रूप से बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी दुनिया के सबसे प्रभावशाली और लोकप्रिय जननायक बन चुके हैं।

दुनिया भर की संसदों में गूंजी भारत की आवाज

पीएम मोदी ने अब तक दुनिया की 18 संसदों को संबोधित किया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। हाल ही में पीएम मोदी ने घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, नामीबिया और इथियोपिया की संसदों में भारत के विजन को रखा। हर जगह उन्हें ‘स्टैंडिंग ओवेशन’ मिला, जो बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है।

सम्मानों की झड़ी: 33 देशों से मिला सर्वोच्च नागरिक सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाते हुए एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जो भारतीय इतिहास में अब तक किसी अन्य नेता के नाम नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वैश्विक सम्मान पाने का सिलसिला साल 2016 से शुरू हुआ और आज 2026 तक यह संख्या 33 के ऐतिहासिक आँकड़े पर पहुँच गई है।

शुरुआती दौर (2016-2019)
  • सऊदी अरब: ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज (3 अप्रैल 2016) – पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
  • अफगानिस्तान: ऑर्डर ऑफ अमानुल्लाह खान (4 जून 2016)
  • फिलिस्तीन: ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन (10 फरवरी 2018)
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): ऑर्डर ऑफ जायद (24 अगस्त 2019)
  • रूस: ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू (घोषणा 2019, प्राप्त 2024 में किया)
  • मालदीव: ऑर्डर ऑफ इज्जुद्दीन (8 जून 2019)
  • बहरीन: किंग हमद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां (24 अगस्त 2019)
वैश्विक विस्तार (2020-2024)
  • अमेरिका: लीजन ऑफ मेरिट (21 दिसंबर 2020) – डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रदान किया गया।
  • भूटान: ऑर्डर ऑफ द ड्रैगन किंग (दिसंबर 2021)
  • फिजी: कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी (मई 2023)
  • पापुआ न्यू गिनी: ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू (मई 2023)
  • मिस्र: ऑर्डर ऑफ द नाइल (जून 2023)
  • फ्रांस: ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर (जुलाई 2023)
  • ग्रीस: ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर (अगस्त 2023)
  • नाइजीरिया: ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर (17 नवंबर 2024)
  • डोमिनिका: डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर (20 नवंबर 2024)
  • गुयाना: ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ गुयाना (20 नवंबर 2024)।कुवैत: ऑर्डर ऑफ मुबारक द ग्रेट (22 दिसंबर 2024)
ऐतिहासिक वर्ष 2025 (सबसे सफल साल)

बीते वर्ष पीएम मोदी ने अपनी सक्रिय कूटनीति से 10 से अधिक नए देशों को इस सूची में जोड़ा।

  • बारबाडोस: ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस (5 मार्च 2025)
  • मॉरीशस: ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन (11 मार्च 2025)
  • श्रीलंका: श्रीलंका मित्र विभूषण (5 अप्रैल 2025)
  • साइप्रस: ऑर्डर ऑफ मकारियोस III (16 जून 2025)
  • घाना: ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना (2 जुलाई 2025)
  • त्रिनिदाद और टोबैगो: ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद और टोबैगो (4 जुलाई 2025)
  • ब्राजील: ऑर्डर ऑफ द साउदर्न क्रॉस (8 जुलाई 2025)
  • नामीबिया: ऑर्डर ऑफ द वेलवित्सचिया (9 जुलाई 2025)
  • इथियोपिया: ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया (16 दिसंबर 2025)
  • ओमान: ऑर्डर ऑफ ओमान (18 दिसंबर 2025)
नया कीर्तिमान 2026
  • इजरायल: मेडल ऑफ द नेसेट (25 फरवरी 2026)- पीएम मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले विश्व नेता बने।

इसके अलावा, अन्य मित्र राष्ट्रों और महत्वपूर्ण वैश्विक संगठनों द्वारा समय-समय पर दिए गए विशेष राजकीय सम्मानों को मिलाकर यह कुल संख्या 33 हो जाती है। इनमें दक्षिण कोरिया (सियोल शांति पुरस्कार) और संयुक्त राष्ट्र (चैंपियंस ऑफ द अर्थ) जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक निकायों के सम्मान भी शामिल हैं, जिन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च मान्यता दी है।

      मजबूत अर्थव्यवस्था और निडर नेतृत्व

      वैश्विक मंदी और व्यापार युद्ध के बीच भी पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की GDP वृद्धि दर 7.3% के करीब बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ वॉर’ के सामने जहाँ दुनिया के कई देश झुक गए, वहीं मोदी ने भारतीय किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करते हुए कड़ा रुख अपनाया। आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि पर कड़ा फैसला लेकर उन्होंने साफ कर दिया कि भारत अब अपनी शर्तों पर चलता है।

      चाहे भूटान के राजा का सड़क पर खड़े होकर स्वागत करना हो या रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत को ‘भाग्यशाली’ बताना, ये केवल औपचारिकताएँ नहीं हैं। ये उस नए भारत की तस्वीर है जिसे पीएम मोदी ने पिछले 12 वर्षों में गढ़ा है। आज भारत सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि दुनिया का एक ऐसा स्तंभ है जिसके बिना वैश्विक शांति और प्रगति की कल्पना करना मुश्किल है।

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