₹2.6 लाख की जमीन ₹4.76 करोड़ में: ईसाई मिशनरी का 183 गुना लाभ कमाने वाला घोटाला

इस ज़मीन की ख़रीद के दस्तावेज़ों में तीन अलग-अलग पते लिखे हुए हैं जो कि ब्रदर सिरिल लकड़ा से संबंधित हैं। एक दस्तावेज़ में नामकुम का पता है तो दूसरे में गुमला का, तीसरे में पुरुलिया रोड, राँची का!

झारखंड में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने एक मिशनरी संस्था पर CNT-SPT क़ानून का दुरुपयोग करते हुए ज़मीन की ख़रीद-फरोख़्त का गंभीर आरोप लगाया है। सोमवार (22 जुलाई 2019) को पार्टी प्रदेश मुख्यालय में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात की जानकारी दी कि नामकुम अंचल के खाता नंबर-3 और 142 के प्लॉट नंबर 170, 171, 172, 173, 174, 176, 177 के कुल 4.23 एकड़ की ज़मीन की ख़रीद-बिक्री में जमकर गड़बड़ी हुई है।

प्रतुल शाहदेव ने बताया कि इस ज़मीन को साल 2004-05 में पहले ब्रदर सिरिल लकड़ा ने कोड़ियों के भाव ख़रीदा। उस समय इस ज़मीन की क़ीमत ₹2.6 लाख थी और इसे बेचते समय इसकी क़ीमत ₹4.76 करोड़ हो गई। इतना ही नहीं, इस ज़मीन की ख़रीद और बिक्री के दस्तावेज़ों में तीन अलग-अलग पते लिखे हुए हैं जो कि ब्रदर सिरिल लकड़ा से संबंधित हैं। एक दस्तावेज़ में नामकुम का पता है तो दूसरे में गुमला का। वहीं, तीसरे में पुरुलिया रोड, राँची का पता लिखा हुआ है।

ब्रदर सिरिल लकड़ा ने व्यक्तिगत तौर पर ख़रीदी ज़मीन को गेल इंडिया लिमिटेड को बेचा
ज़मीन के इस दस्तावेज़ में गुमला का पता लिखा है

ख़बर के अनुसार, यह मिशनरी संस्था रोम की मोनफोर्ट ब्रदर्स ऑफ़ सेंट गेब्रियल है। ग्रेबियल सोसायटी शैक्षणिक संस्था के रूप में निबंधित है और उसका मुख्यालय रोम में है। बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि इस संस्था ने अवैध तरीके से ज़मीन की ख़रीद और उसकी बिक्री में 183 गुना तक कमाई की है। दरअसल, ब्रदर सिरिल लकड़ा ने इस 4.3 एकड़ ज़मीन को ₹4.76 करोड़ में गेल इंडिया लिमिडेट को बेच दिया था और इससे 13 साल में इस ज़मीन से 183 गुना लाभ कमाया गया।

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प्रतुल शाहदेव के अनुसार, ब्रदर सिरिल लड़का ने जब यह ज़मीन ख़रीदी थी तो वो व्यक्तिगत तौर पर ख़रीदी थी, लेकिन उसी ज़मीन को बेचते समय मिशनरी सामने आ गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मिशनरी संस्था में फ़ादर, ब्रदर और सिस्टर को ज़मीन रखने का अधिकार प्राप्त नहीं है, जबकि इस ज़मीन की रजिस्ट्री ब्रदर सिरिल लकड़ा ने अपने नाम कराई थी।

इस ज़मीन की रजिस्ट्री ब्रदर सिरिल लकड़ा ने अपने नाम कराई थी

इसी संदर्भ में प्रतुल का कहना है कि सोसायटी को ज़मीन ख़रीदने और बेचने का कोई अधिकार नहीं था, लेकिन जिस तरह से ख़रीद-फ़रोख़्त का यह प्रकरण सामने आया है, उससे पता चलता है कि सूबे में बड़े पैमाने पर ईसाई संस्थाएँ ग़लत कार्यों में लिप्त हैं। इसकी शिक़ायत उचित फोरम में ज़रूर की जाएगी।

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