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कमलनाथ का नया क़ानून: गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को 10 साल तक की जेल, ₹50000 तक जुर्माना

मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम-2004 में संशोधन कर राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। वर्ष 2004 में भाजपा सरकार के दौरान राज्य में गोकशी को रोकने के लिए यह क़ानून बनाया गया था।

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने गोहत्या के नाम पर होने वाली कथित गुंडई के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं। बता दें कि राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान भी गायों की देखभाल और सुरक्षा एक अहम मुद्दा थी। तब कॉन्ग्रेस ने हर ग्राम पंचायत में एक गौशाला खोलने का निर्णय लिया था। लेकिन, ताज़ा ख़बर के अनुसार, अब अगर कोई गोहत्या के नाम पर हिंसा करता है तो उसे 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सज़ा दी जा सकती है। साथ ही 25 हज़ार से लेकर 50 हज़ार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस संशोधित विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा

मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम-2004 में संशोधन कर राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। वर्ष 2004 में भाजपा सरकार के दौरान राज्य में गोकशी को रोकने के लिए यह क़ानून बनाया गया था। राज्य पशुपालन विभाग के मंत्री लखन सिंह यादव ने बताया कि सरकार एक्ट में संशोधन करने जा रही है और इसे जल्द ही कैबिनेट की मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा। राज्य में विधानसभा का मानसून सत्र 8 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसके अलावा इस प्रस्ताव में भीड़ द्वारा की गई हिंसा को लेकर भी सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

अगर गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा हत्या की जाती है तो इस तरह के मामलों में 1 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। अगर कोई एक बार से ज्यादा ऐसे अपराधों में शामिल होता है तो उसे दोगुनी सज़ा दी जाएगी। मंत्री ने इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि अगर कोई बार-बार इस तरह के अपराधों में शामिल होता है तो उसे 10 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिवनी जिले में पिछले महीने गोमांस ले जाने के संदेह में एक मुस्लिम महिला और पुरुष को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था, जिसके बाद सरकार इस तरह के मामलों में लगाम लगाने के लिए यह संशोधन कर रही है।

इससे पहले कमलनाथ सरकार ने गायों को लेकर आने-जाने वाले नियमों में बदलाव कर यह सुनिश्चित करने की बात कही थी कि अगर किसान गायों को लेकर आवागमन करते हैं तो गोरक्षक उन्हें परेशान न करें। ऐसे किसानों और व्यापारियों को पुलिस न रोके, इसके लिए भी नियम बनाने की ख़बरें आई थीं।


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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