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राजस्थान के छोटे से गाँव से लेकर उप-राष्ट्रपति तक, ऐसा रहा है जगदीप धनखड़ का सफर: बंगाल हिंसा के बाद CM ममता से भिड़े, रहे हैं केंद्रीय मंत्री भी

1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में वो केंद्रीय मंत्री के पद पर भी रहे। 1991 में जनता दल ने उनका टिकट काट दिया।

मोदी सरकार हमेशा अपने फैसलों से चौंकाती रही है। राष्ट्रपति पद के लिए द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाने के बाद बीजेपी ने अब उप-राष्ट्रपति पद के लिए पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है। दिल्ली में संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके नाम का ऐलान किया।

कौन हैं जगदीप धनखड़

बीजेपी के जाट नेता जगदीप धनखड़ मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। उनका जन्म झुंझुनू जिले के किठाना गाँव में 1951 में साधारण से किसान परिवार में हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से लॉ करने के बाद उनका सेलेक्शन आईआईटी, एनडीए और आईएएस के लिए भी हुआ था। हालाँकि, उन्होंने इन सभी को ठोकर मारकर वकालत करना शुरू किया। धनखड़ राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे।

इसके बाद वे जनता दल से जुड़ गए। वर्ष 1989 में वो झुंझुनू से चुनकर सासंद बने। यहीं नहीं, 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में वो केंद्रीय मंत्री के पद पर भी रहे। 1991 में जनता दल ने उनका टिकट काट दिया तो वो कॉन्ग्रेस में चले गए। 1993 में अजमेर के किशनगढ़ से चुनाव लड़कर वो विधायक बने। हालाँकि, 1003 में अचानक से उन्हें कॉन्ग्रेस से नफरत सी होने लगी और वो फिर से बीजेपी में शामिल हो गए।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में से एक धनखड़ को राजस्थान में जाट आरक्षण दिलवाने के लिए जाना जाता है। धनखड़ को 30 जुलाई साल 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था।

वो पश्चिम बंगाल के मौजूदा राज्यपाल हैं। राज्य में पिछले साल चुनाव बाद हुई हिंसा के विरोध में धनखड़ ने कई बार सीएम ममता बनर्जी की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने राज्य में हिंसा के लिए सीधे तौर पर ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था, “मैं चुप रहने वाला गवर्नर नहीं हूँ।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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