Tuesday, July 23, 2024
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जानिए क्या है ‘संविधान का मृत पत्र’: कॉन्ग्रेस इसी के सहारे उखाड़ फेंकती थी चुनी हुई सरकार, इंदिरा गाँधी ने 51 बार किया था इस्तेमाल

अंबेडकर ने कहा था, "मुझे लगता है कि ऐसे आर्टिकल्स को कभी भी लागू नहीं किया जाएगा और वे एक मृत पत्र बने रहेंगे। यदि इन्हें लागू किया जाता है तो मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति, राज्य सरकारों को निलंबित करने से पहले उचित सावधानी बरतेंगे। मैं आशा करता हूँ कि यदि किसी राज्य सरकार ने गलती की है तो पहले उसे चेतावनी दी जाएगी।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने गुरुवार (9 फरवरी 2023) को विपक्ष पर जमकर हमला बोला। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा है कि पंडित जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गाँधी ने 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिराया। इंदिरा गाँधी ने तो 50 बार संविधान के आर्टिकल 356 का दुरुपयोग किया।

क्या है आर्टिकल 356?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस आर्टिकल 356 के दुरुपयोग की बात कही है, उसे आम भाषा में राष्ट्रपति शासन कहा जाता है। राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद वह राज्य सीधे केंद्र सरकार के शासन के अधीन आ जाता है। वहाँ राज्यपाल के निर्देश पर सारे कार्य होते हैं।

राष्ट्रपति शासन केंद्रीय मंत्री मण्डल की अनुशंसा पर लगाया जाता है। केंद्र सरकार की अनुशंसा के बाद राष्ट्रपति संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का उपयोग करते हुए किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं। राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए कुछ नियमों का पालन करने के लिए कहा गया है।

 1.) यदि राष्ट्रपति को लगता है कि किसी राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है कि राज्य सरकार संविधान के नियमों के अनुसार नहीं चलाई जा सकती है।

2.) राज्यपाल द्वारा निर्धारित समय के भीतर यदि मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं होता है, तब राज्यपाल की अनुशंसा पर राष्ट्रपति आर्टिकल 356 का उपयोग कर सकते हैं।

3.) जब सरकार अल्पमत में हो और राज्यपाल द्वारा दी गई समयावधि में मुख्यमंत्री बहुमत साबित न कर पाएँ।

4.) अविश्वास प्रस्ताव के बाद अल्पमत में सरकार।

5.) प्राकृतिक आपदा, युद्ध या महामारी या अन्य विषम परिस्थितियों के कारण चुनाव स्थगित होने की स्थिति में भी राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।

यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए हर हाल में राज्यपाल की अनुशंसा की आवश्यकता होती है। देश में अब तक जितनी बार भी राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, उसमें से अधिकांश बार इन नियमों का उल्लंघन कर ही लगाया है। इसके लिए पंडित नेहरू और इंदिरा गाँधी का शासन हमेशा आलोचना के घेरे में रहा है।

कितने समय के लिए लगाया जा सकता है राष्ट्रपति शासन?

आर्टिकल 356 के तहत किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन 6 महीने के लिए लगाया जा सकता है। इसके बाद इस समय अवधि को अधिकतम 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है। राष्ट्रपति शासन हटाने के लिए राष्ट्रपति को संसद की मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वह अपने विवेक से इसे हटा सकते हैं।

जिस राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है, वहाँ की सारी व्यवस्था सीधे केंद्र सरकार के हाथों में होती है। राज्य की शासन व्यवस्था कहने को तो राष्ट्रपति के हाथों में होती है, लेकिन उसे चलाती केंद्र सरकार है। बता दें कि केंद्र की सरकार भी राष्ट्रपति के नाम पर ही चलती है।

कब-कब हुआ आर्टिकल 356 का इस्तेमाल…

आर्टिकल 356 का इस्तेमाल पहली बार 20 जून 1951 को पंजाब की गोपीचंद भार्गव सरकार को गिराने के साथ हुआ था। उस समय पंजाब में 302 दिनों तक राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। गोपीचंद भार्गव कॉन्ग्रेस से ही मुख्यमंत्री थे। सरकार के पास पूर्ण बहुमत था। राज्य में कोई विपरीत परिस्थिति भी नहीं थी, लेकिन इसके बाद भी राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।

इसके बाद साल 1954 में आंध्र प्रदेश की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को भी आर्टिकल 356 के तहत उखाड़ फेंका गया था। उस समय आंध्र के मुख्यमंत्री तन्गुतुरी प्रकाशम थे। कॉन्ग्रेस की सरकार होने के बाद भी राष्ट्रपति शासन लगने का कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू का वामपंथियों से भय को माना जाता है। दरअसल, नेहरू को डर था कि आंध्र प्रदेश में कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आ सकती है।

पंडित नेहरू द्वारा सरकार गिराने की शुरू की गई प्रथा को इंदिरा गाँधी ने आगे बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हालाँकि, लालबहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई और चौधरी चरण सिंह की सरकार में भी राष्ट्रपति शासन लगा, लेकिन 356 के दुरुपयोग का सबसे बड़ा आरोप इंदिरा गाँधी पर लगता रहा है।

इंदिरा गाँधी ने कुल मिलाकर 51 बार राज्य सरकारों को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया था। आँकड़ों को देखें तो इंदिरा गाँधी का बतौर प्रधानमंत्री करीब 15 साल का कार्यकाल रहा। इस दौरान 1966 से 1977 के बीच 36 बार तथा 1980 से 1984 के बीच उन्होंने 15 बार अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाए। साल 1980 में आपातकाल के बाद सरकार में वापसी होते ही इंदिरा गाँधी ने जनता पार्टी की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई 9 सरकारें गिरा दी थीं।

इंदिरा गाँधी के साथ-साथ मोरारजी देसाई के कार्यकाल में 21 बार तो पीवी नरसिंह राव के कार्यकाल में 11 बार राष्ट्रपति शासन लगा गया था। जनता पार्टी के तीन साल के कार्यकाल में 6 महीने का चौधरी चरण सिंह का कार्यकाल भी शामिल है।

वहीं, राजीव गाँधी के कार्यकाल में 6 बार तो मनमोहन सिंह के समय 12 बार आर्टिकल 356 का उपयोग व दुरुपयोग किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कॉन्ग्रेस पर हमला करने की बड़ी वजह यह रही है कि देश में अब तक कुल 132 बार राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। इनमें से करीब 90 बार कॉन्ग्रेस की सत्ता के समय राष्ट्रपति शासन लागू करते हुए सरकारें गिराई गईं।

अंबेडकर ने बताया था ‘संविधान का मृतपत्र’

भारतीय संविधान समिति के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर ने आर्टिकल 356 को ‘संविधान का मृत पत्र’ कहा था। अंबेडकर ने कहा था कि उन्हें लगता है कि राजनीतिक फायदे के लिए इस आर्टिकल का दुरुपयोग किया जा सकता है।

अंबेडकर ने कहा था, “मुझे लगता है कि ऐसे आर्टिकल्स को कभी भी लागू नहीं किया जाएगा और वे एक मृत पत्र बने रहेंगे। यदि इन्हें लागू किया जाता है तो मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति, राज्य सरकारों को निलंबित करने से पहले उचित सावधानी बरतेंगे। मैं आशा करता हूँ कि यदि किसी राज्य सरकार ने गलती की है तो पहले उसे चेतावनी दी जाएगी।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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