Wednesday, July 24, 2024
Homeराजनीतिउद्धव ने पलटा पिछली फणनवीस सरकार का फैसला, राज्यपाल ने किया हस्ताक्षर से इनकार

उद्धव ने पलटा पिछली फणनवीस सरकार का फैसला, राज्यपाल ने किया हस्ताक्षर से इनकार

महाराष्ट्र सरकार की इस सिफारिश को राज्यपाल ने खारिज कर दिया और कहा कि 24 फरवरी से शुरू होने वाले विधानमंडल के सत्र में तत्संबंधी कानून बनाया जाए। राज्यपाल द्वारा अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करने की वजह से अब विधानमंडल में कानून बनने तक सीधे सरपंच चुनने का पहले का निर्णय बरकरार रहेगा।

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार द्वारा पेश किए गए एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उद्धव सरकार और राज्यपाल के बीच मतभेद की खबरें आने लगी। बता दें कि महाविकास अघाड़ी सरकार ने राज्यपाल से सीधे जनता से सरपंच चुनने के पूर्ववर्ती सरकार के निर्णय को रद्द कर ग्राम पंचायत सदस्यों में से सरपंच चुनने संबंधी अध्यादेश जारी करने की सिफारिश की थी।

महाराष्ट्र सरकार की इस सिफारिश को राज्यपाल ने खारिज कर दिया और कहा कि 24 फरवरी से शुरू होने वाले विधानमंडल के सत्र में तत्संबंधी कानून बनाया जाए। राज्यपाल द्वारा अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करने की वजह से अब विधानमंडल में कानून बनने तक सीधे सरपंच चुनने का पहले का निर्णय बरकरार रहेगा।

जब उद्धव ठाकरे से इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मतभेद होने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि राज्य विधानमंडल का सत्र होने वाला है और राज्यपाल ने सुझाव दिया है कि सदस्यों में से सरपंच चयन का निर्णय सदन में कराया जाना चाहिए। वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ने अब अध्यादेश जारी करने के बजाय कैबिनेट के फैसले पर नए सिरे से विधेयक बनाने का फैसला किया है।

बता दें कि राज्य मंत्रिमंडल ने 29 जनवरी को फडणवीस सरकार के सीधे सरपंच चुने जाने के फैसले को पलट दिया और अध्यादेश को राज्यपाल के सामने हस्ताक्षर के लिए पेश किया। लेकिन राज्यपाल ने हस्ताक्षर से मना कर दिया। इसके अलावा ठाकरे सरकार ने नगरपालिका परिषदों जैसे स्थानीय स्व-सरकारी निकायों में डायरेक्ट इलेक्शन को लेकर किया गया भाजपा सरकार का एक और निर्णय भी पलट दिया।

गौरतलब है कि हाल ही में शिवसेना के दो मंत्रियों ने इस्तीफा दि दिया था। जानकारी के मुताबिक दोनों मंत्रियों ने लाभ का पद मामले में विपक्ष के आरोपों से बचने के लिए इस्तीफा दिया था। ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि विपक्ष बजट सत्र के दौरान विधानसभा में इस मसले को प्रमुखता से उठा सकती है। वह दोनों की नियुक्तियों को मुद्दा बना सकती है। बताया जा रहा है कि आपसी मतभेद में घिरी सरकार को और ज्यादा संकट में डालने से बचाने के लिए दोनों नेताओं ने अपना इस्तीफा उद्धव को भेज दिया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेरे बेटे को मार डाला’: आधुनिक पश्चिमी सभ्यता ने दुनिया के सबसे अमीर शख्स को भी दे दिया ऐसा दर्द, कहा – Woke वाले...

लिंग-परिवर्तन कराने वाले को उसके पुराने नाम से पुकारना 'Deadnaming' कहलाता है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि उनका बेटा मर चुका है।

‘बंद ही रहेगा शंभू बॉर्डर, JCB लेकर नहीं कर सकते प्रदर्शन’: सुप्रीम कोर्ट ने ‘आंदोलनजीवी’ किसानों को दिया झटका, 15 अगस्त को दिल्ली कूच...

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू बॉर्डर को अभी बंद ही रखने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा किसान JCB लेकर प्रदर्शन नहीं कर सकते।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -